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एफटीए से यूरोप-भारत व्यापार को बूस्टर डोज़

अब देखना होगा कि यह बहु-प्रतीक्षित समझौता भारत के 140 करोड़ और यूरोपीय संघ के 45 करोड़ लोगों हेतु कितना बड़ा अवसर लाता है। इंतज़ार रहेगा कि एफटीए का ईयू-अमेरिका व भारत-चीन के उभयपक्षीय संबंधों पर क्या असर पड़ता है।...

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अब देखना होगा कि यह बहु-प्रतीक्षित समझौता भारत के 140 करोड़ और यूरोपीय संघ के 45 करोड़ लोगों हेतु कितना बड़ा अवसर लाता है। इंतज़ार रहेगा कि एफटीए का ईयू-अमेरिका व भारत-चीन के उभयपक्षीय संबंधों पर क्या असर पड़ता है।

बिना एफटीए के भी यूं तो यूरोपीय देशों से भारत का व्यापार दशकों से होता आ रहा है। लेकिन, ऐसा माना गया कि मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) होने से इसे बूस्टर डोज़ मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने इंडिया एनर्जी वीक का वर्चुअली उद्घाटन करते हुए कहा, ‘ईयू-इंडिया एफटीए सभी सौदों की जननी है। यह सौदा यूके और ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापार समझौतों का पूरक है। भारत में कपड़ा, रत्न, आभूषण, चमड़ा और जूट जैसे विभिन्न क्षेत्रों को इस व्यापार समझौते से फायदा होने वाला है।’ पीएम मोदी ने कहा कि यह डील भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत करेगी, और सर्विस सेक्टर को नया सहारा देगी।

वर्ष 2007 में शुरू हुई वार्ता प्रक्रिया का समापन देर-सवेर हुआ ही। मनमोहन सिंह से आरम्भ वार्ता को मोदी ने अंजाम दिया। यहां तक पहुंचने में 19 साल लगे। लेकिन रुकिए, अभी बहुत कुछ होना बाक़ी है। सभी यूरोपीय संघ के सदस्य देशों की भाषाओं में एफटीए के कानूनी दस्तावेज़ों को प्रकाशित करना होगा। सभी धाराओं की एक-एक करके जांच होगी, जिसे ‘लीगल स्क्रबिंग’ कहते हैं, यूरोपीय परिषद द्वारा औपचारिक मंज़ूरी के बाद, यूरोपीय संसद की सहमति चाहिए, इसके प्रकारांतर भारतीय कैबिनेट द्वारा पुष्टि होगी। इन सबसे गुज़रने के बाद, 2027 तक इसके लागू होने की उम्मीद है।

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मंगलवार को यूरोपियन कमीशन की प्रतिक्रिया ग़ौर करने लायक है— ‘इस डील से ईयू कंपनियों और किसानों को ज़्यादा निर्यात करने में मदद मिलेगी। इस डील से पहले ही आठ लाख यूरोपीय नौकरियों को सपोर्ट मिलता रहा है। अब एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी से, और भी ज़्यादा यूरोपीय नौकरियां मिल सकती हैं।’ यूरोपियन कमीशन का सन्देश था, ‘उम्मीद है कि यह समझौता भारत को होने वाले ईयू एक्सपोर्ट को दोगुना कर देगा। इसके अलावा, भारतीय सर्विस मार्केट तक बेहतर पहुंच, खासकर फाइनेंशियल सर्विसेज़, मैरीटाइम सर्विसेज़ और दूसरे मुख्य सेक्टर्स में, नए बिज़नेस और रोज़गार के अवसर पैदा करेगी।’

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यूरोपीय आयोग ने जानकारी दी, कि इस डील से 90 फीसद से ज़्यादा यूरोपीय संघ के देशों के सामानों के एक्सपोर्ट टैरिफ खत्म, या कम कर दिया जाएगा। इससे यूरोपीय प्रोडक्ट्स पर ड्यूटी में हर साल अरबों यूरो तक की बचत होगी। यूरोपियन कमीशन ने कहा, ‘भारत ने किसी भी व्यापारिक सहकार को इतनी बड़ी ट्रेड ओपनिंग नहीं दी है। इससे एक्सपोर्ट को तेज़ और आसान बनाने के लिए कस्टम प्रक्रियाओं को सहज बनाया जायेगा।’

27 जनवरी को डील के तुरंत बाद यूरोपियन कमीशन ने आधिकारिक जानकारी दी कि भारत ईयू को टैरिफ में ऐसी छूट देगा, जो उसके किसी भी दूसरे ट्रेडिंग पार्टनर को नहीं मिली है, जिससे ईयू एक्सपोर्ट के लिए भारतीय बाजार में पहुंच बहुत आसान हो जाएगी। उदाहरण के लिए, कारों पर टैरिफ धीरे-धीरे 110 प्रतिशत से घटकर 10 फीसद हो जाएगा, जिसमें हर साल 250,000 गाड़ियों का कोटा होगा। मशीनरी पर 44 प्रतिशत, केमिकल्स पर 22 परसेंट और फार्मास्यूटिकल्स पर 11 प्रतिशत तक के ऊंचे टैरिफ को ज़ीरो पर ले आया जाएगा। टैरिफ एक टैक्स है, जो कोई देश अपने यहां विदेश से आयात होने वाले समान पर लगाता है। इससे विदेश से आने वाला सामान महंगा हो जाता है, और जिस देश में सामान आता है, उसे टैक्स से आय होता है।

यूरोपियन कमीशन ने अपनी वेबसाइट पर एक चार्ट के ज़रिये सारा गणित समझाया है। कमीशन ने वर्ष 2024 को आकलन का आधार बनाया, जिसमें मशीनरी और इलेक्ट्रिकल उपकरण पर 16.3 बिलियन यूरो बतौर टैरिफ देने पड़े थे। एफटीए के कार्यान्वयन के बाद, यूरोपीय संघ के देशों को टैरिफ की देनदारी ज़ीरो प्रतिशत हो जाएगी। विमान और अंतरिक्ष यान निर्यात पर 11 प्रतिशत के हिसाब से 6.4 अरब यूरो टैरिफ के रूप में 2024 में देना पड़ा था, आगे से यह शून्य हो जाएगा। ऑप्टिकल, मेडिकल और सर्जिकल उपकरण के एक्सपोर्ट पर 27.5 प्रतिशत के हिसाब से 3.4 बिलियन यूरो देना पड़ा था, इनमें से 90 फीसद प्रोडक्ट पर शून्य टैरिफ लगा करेगा। प्लास्टिक पर भी ज़ीरो टैरिफ लगा करेगा, जिससे यूरोपीय संघ के देशों को 2 अरब 20 करोड़ यूरो की बचत होगी। केमिकल्स पर 22 प्रतिशत टैरिफ आगे से शून्य हो जायेगा, उससे 3 अरब 20 करोड़ यूरो की बचत होगी। आयरन एंड स्टील पर भी 22 प्रतिशत से शून्य टैरिफ हो जाने से डेढ़ अरब और फार्मास्युटिकल्स पर टैरिफ शून्य हो जाने के बाद 1 अरब 10 करोड़ का फायदा यूरोपीय संघ के देशों को होना है।

इस डील से यूरोपीय संघ के किसानों की बल्ले-बल्ले होनी है। यूरोपियन कमीशन ने समझाया है, ‘यह एग्रीमेंट ईयू से एक्सपोर्ट होने वाले एग्री-फूड प्रोडक्ट्स पर अक्सर लगने वाले बहुत ज़्यादा टैरिफ (औसतन 36 प्रतिशत से ज़्यादा) को हटाएगा या कम करेगा, जिससे यूरोपीय किसानों के लिए एक बहुत बड़ा बाज़ार खुल जाएगा। जैसे वाईन पर 150 प्रतिशत टैक्स है, उसे घटाकर प्रीमियम रेंज के वास्ते 20 परसेंट और मीडियम रेंज पर 30 फीसद टैरिफ लाने के वास्ते सहमति बन गई है। स्पिरिट्स पर टैरिफ 150 प्रतिशत से घटाकर 40 पर ले आएंगे। ईयू देशों से भारत भेजे जाने वाले बीयर पर 110 प्रतिशत टैरिफ है, उसे कम कर 50 फीसद कर देना है। जैतून का तेल, मार्जरीन और अन्य वनस्पति तेल पर जो 45 प्रतिशत टैरिफ लगता था, वो ज़ीरो हो जायेगा। कीवी और नाशपाती पर 33 से घटाकर 10 फीसद, फलों के जूस और नॉन-अल्कोहलिक बीयर पर 55 प्रतिशत टैक्स लगा करता था, आगे से ज़ीरो हो जायेगा, प्रोसेस्ड फ़ूड (ब्रेड, पेस्ट्री, बिस्कुट, पास्ता, चॉकलेट, पालतू जानवरों का खाना) पर टैरिफ 50 प्रतिशत से ज़ीरो कर देंगे। भेड़ के मांस पर 33 फीसद टैरिफ लगाते थे, उसे भी ज़ीरो कर देंगे। सॉसेज और मांस से बने अन्य प्रोडक्ट्स पर जो 110 फीसद तक टैरिफ लगते थे, जब एफटीए लागू होगा, उसे 50 प्रतिशत पर ले आया जायेगा।’

ईयू और भारत, बौद्धिक संपदा अधिकारों को मजबूत करने वाले ‘ज्योग्राफिकल इंडिकेशन्स’ पर एक अलग से समझौते पर बातचीत कर रहे हैं, जिससे सदस्य देशों के पारंपरिक खेती वाले उत्पादों को भारत में ज़्यादा बेचने में मदद मिलेगी। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन देयर लॉयेन ने कहा कि इससे दोनों पक्षों के लिए लाखों नौकरियां सृजित होंगी। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने हामी भरते हुए कहा कि हम दो अरब लोगों के लिए बाजार बना रहे हैं। अब देखना यह है कि यह बहु-प्रतीक्षित समझौता भारत के 140 करोड़ लोगों, और 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ के 45 करोड़ लोगों के लिए कितना बड़ा अवसर लेकर आता है। हमें इसका भी इंतज़ार रहेगा कि इस एफटीए का ईयू-अमेरिका और भारत-चीन के उभयपक्षीय संबंधों पर क्या असर पड़ता है।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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