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महंगी बहस, जीत के दावे और वही ढाक के तीन पात

उलटबांसी

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पाकिस्तान के टीवी स्टूडियो में हर बार नया जोश पैदा होता है। फिर मैदान में गेंद आती है, बल्ला आता है और स्कोरबोर्ड पुरानी कहानी सुनाने लगता है।

दृश्य एक : न्यूयॉर्क, संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय

महासचिव : सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में हम रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान-अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं।

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पत्रकार : सर, निंदा से बंदूक की गोली रुकती है क्या?

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महासचिव : देखिए, गोली तो नहीं रुकती, लेकिन हमारी प्रेस विज्ञप्ति बहुत असरदार बनी है।

पत्रकार : संस्था का नाम तो यूनाइटेड नेशन्स है। काम डिबेट क्लब वाला है। हर मुद्दे पर बहस, भाषण, वोटिंग, वीटो, फिर अगली बैठक की तारीख तय।

महासचिव : लेकिन संकल्प पारित हुआ है। बड़ी बात है।

पत्रकार : संकल्प से टैंक रुकते हैं या सिर्फ फाइल में दर्ज होते हैं?

महासचिव : फाइल भी इतिहास का हिस्सा बनती है।

पत्रकार : इतिहास तो युद्ध खुद लिख रहा है। आपकी फाइल तो बस हाशिए पर बैठकर फुटनोट लिख रही है।

महासचिव : शांति स्थापना हमारा मूल उद्देश्य है।

पत्रकार : शांति कब स्थापित हुई थी आखिरी बार, याद है?

महासचिव : याद करने के लिए भी एक सब-कमेटी बनानी पड़ेगी।

पत्रकार : और सब-कमेटी?

महासचिव : वह एक कार्यदल बनाएगी।

पत्रकार : फिर?

महासचिव : कार्यदल अपनी रिपोर्ट देगा।

पत्रकार : तब तक?

महासचिव : तब तक हम एक और आपात बैठक बुला लेंगे।

यही संयुक्त राष्ट्र की आधुनिक त्रासदी है।

दृश्य दो : लाहौर, टीवी स्टूडियो

पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर बड़े आत्मविश्वास से बयान दे रहे हैं। कैमरा उन पर ज़ूम करता है।

पूर्व क्रिकेटर : इस बार इंडिया को फाइनल में हरा देंगे। टीम का जोश देखा है आपने?

एंकर : पिछले टूर्नामेंट में भी यही कहा था।

पूर्व क्रिकेटर : वो अलग बात थी। इस बार तैयारी पूरी है।

एंकर : हर बार तैयारी पूरी होती है, नतीजा वही पुराना।

पूर्व क्रिकेटर : क्रिकेट में कुछ भी हो सकता है।

एंकर : बिल्कुल। बस मैच के दिन इंडिया के सामने वही ‘कुछ भी’ नहीं होता।

पूर्व क्रिकेटर : आप नेगेटिव हो गए हैं।

एंकर : नहीं, बस पिछले बीस साल का स्कोरकार्ड पढ़ लिया है।

पूर्व क्रिकेटर : इस बार जज्बा अलग है।

एंकर : जज्बा हर बार अलग होता है। स्कोरबोर्ड हर बार वही पुराना।

पूर्व क्रिकेटर : इस बार रणनीति बहुत आक्रामक है।

एंकर : रणनीति कागज पर है या मैदान में भी आएगी?

पूर्व क्रिकेटर : आप टीम का मनोबल गिरा रहे हैं।

पाकिस्तान के टीवी स्टूडियो में हर बार नया जोश पैदा होता है। फिर मैदान में गेंद आती है, बल्ला आता है और स्कोरबोर्ड पुरानी कहानी सुनाने लगता है।

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