सी.यू.ई.टी.

शिक्षा में समान सहभागिता का अवसर

शिक्षा में समान सहभागिता का अवसर

आचार्य राघवेंद्र पी. तिवारी

प्राचीन काल से ही गुणवत्ता शिक्षा प्रणाली का केंद्र बिन्दु रही है। दीर्घकाल से ही विमर्श चल रहा है कि क्या शिक्षा के लिए अवसर और सामर्थ्य प्रदान करने के साथ-साथ गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जा सकती है? विशेषकर भारतीय परिप्रेक्ष्य में, जहां व्यापक स्तर में सामाजिक-आर्थिक विषमता विद्यमान है। गुणवत्ता का एक मापदंड स्नातकों की रोजगारोन्मुख क्षमता है, जो भारत में विचारणीय है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में गुणवत्ता और रोजगारपरक शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु अनेक सुधारों की अनुशंसा है। इनमें प्रवेश प्रक्रिया में गुणवत्ता, एकरूपता और पारदर्शिता लाने एवं नवप्रवेशियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने हेतु विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए सार्वजनिक प्रवेश परीक्षा का आयोजन सम्मिलित है।

वर्तमान में भारतीय विश्वविद्यालयों में तीन प्रकार की प्रवेश-प्रक्रिया प्रचलन में हैं। जैसे कि दिल्ली विश्वविद्यालय मात्र 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं में प्राप्त अंकों के आधार पर छात्रों को प्रवेश देता है, जिसमें कुछ विषयों में कट-ऑफ 99 प्रतिशत तक जाता है। परिणामस्वरूप कक्षा-बारहवीं के विद्यार्थियों में सीखने एवं समझने के स्थान पर उच्च प्रतिशत स्कोर प्राप्त करने के लिए प्रतिस्पर्धा उत्पन्न होती हैं। फलस्वरूप शिक्षा का मूल उद्देश्य और सार प्रभावित होता है। इसके इतर, देश भर में बोर्डों के मानक, विशेष रूप से मूल्यांकन प्रणाली, एक समान नहीं है क्योंकि कुछ बोर्ड अंक देने में अत्यधिक उदार हैं, जबकि अन्य रूढ़िवादी हैं। इस प्रकार केवल बोर्ड के अंकों के आधार पर छात्रों को प्रवेश देना न्यायसंगत नहीं है। जेएनयू, बीएचयू, डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय आदि कुछ संस्थान अखिल भारतीय स्तर पर अपनी अलग-अलग प्रवेश परीक्षा आयोजित कराते हैं, जिससे छात्रों को कई केंद्रों पर प्रवेश परीक्षाओं में प्रतिभागिता करनी पड़ती है, साथ ही प्रवेश के लिए कई बार शुल्क का भुगतान करना पड़ता है। कुछ केंद्रीय विश्वविद्यालय स्नातक, स्नातकोत्तर एवं शोध पाठ्यक्रमों में छात्रों को प्रवेश देने के लिए 2015 से सीयूसीईटी आयोजित करा रहे हैं, और 2020 में उनकी संख्या बढ़कर 14 हो गई थी। इन केंद्रीय विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की जनसांख्यिक विभिन्नता है; जैसे कि पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय में वर्तमान में देश के विविध समुदायों और संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व करने वाले 26 राज्यों और चार केंद्रशासित प्रदेशों के विद्यार्थी हैं।

पिछले डेढ़ वर्षों के दौरान शिक्षा मंत्रालय, यूजीसी और एनटीए द्वारा स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश की परीक्षाओं की रूपरेखा तैयार करने एवं विशेष रूप से विभिन्न विषयों में सीयूईटी के लिए अलग पात्रता तथा प्रवेश मानदंडों को तर्कसंगत बनाने के लिए गहन विचार-विमर्श हुआ। एनटीए ने पहले से ही जेएनयू और बीएचयू के लिए अलग-अलग प्रवेश परीक्षा आयोजित करने के अतिरिक्त बारह केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए ऐसी परीक्षा पिछले वर्ष सफलतापूर्वक आयोजित की है, और अब यह अखिल भारतीय स्तर पर इसे व्यापक पैमाने पर आयोजित करने जा रही है।

स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए कंप्यूटर आधारित सीयूईटी तीन खंडों में होगी, जिसमें कक्षा-बारहवीं के एनसीईआरटी पाठ्यक्रम से बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे। खंड Iए में 13 भाषाओं में से किसी एक भाषा की परीक्षा शामिल होगी; खंड Iबी में 20 भाषाओं में से किसी एक भाषा पर; खंड II में 27 में से किन्हीं छह विशिष्ट विषयों पर; और खंड III में उन स्नातक कार्यक्रमों के लिए परीक्षा होगी जहां आवश्यक हो। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए सीयूईटी डोमेन आधारित विषयों पर होगी।

स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए बोर्ड के अंकों को महत्व नहीं दिया गया है। हालांकि, विश्वविद्यालय सीयूईटी में प्रतिभागिता के लिए बोर्ड परीक्षा के अंकों को पात्रता के रूप में अपना सकते हैं। केंद्रीय विश्वविद्यालयों और संबद्ध महाविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश अनिवार्य रूप से सीयूईटी स्कोर के आधार पर होगा, जबकि स्नातकोत्तर कार्यक्रमों के लिए यह अगले शैक्षणिक सत्र के लिए ऐच्छिक है। आरक्षण नीतियां संबंधित विश्वविद्यालयों के अध्यादेशों के अनुसार होंगी। एनटीए द्वारा प्रत्येक राज्य में विभिन्न परीक्षा केंद्र होंगे, ताकि दूर-दराज क्षेत्रों के छात्र भी परीक्षा केंद्रों तक निर्बाध पहुंच सकें। काउंसलिंग सीयूईटी स्कोर के आधार पर संबंधित केंद्रीय विश्वविद्यालयों द्वारा आयोजित की जाएगी। विश्वविद्यालय रिक्त सीटों को भरने के लिए आधार बनाने के लिए स्वतंत्र होंगे; इसलिए कुल नामांकन कम नहीं होगा। प्रवेश के लिए सीयूईटी स्कोर का उपयोग राज्य विश्वविद्यालय, मानद विश्वविद्यालय एवं निजी विश्वविद्यालयों द्वारा भी किया जा सकता है। सीयूईटी की विशेषता यह है कि अंग्रेजी के अलावा 12 भारतीय भाषाओं (हिंदी, पंजाबी, मराठी, गुजराती, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, उर्दू, असमिया, बंगाली और उड़िया) में भाषायी बाधाओं को दूर करने हेतु आयोजित की जायेगी।

सीयूईटी जेनेरिक प्रकृति की होगी, जिसके अंतर्गत व्यापक अर्थों में छात्रों के ज्ञान, सीखने की प्रवृत्ति एवं गहन सोच की क्षमता का परीक्षण होगा। यह शिक्षकों और छात्रों को स्व-शिक्षण की दिशा में प्रवृत्त होने व वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप सीखने के लिए स्वयं को पुनः उन्मुख करने का अवसर प्रदान करता है। सीयूईटी-2022 भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली में एक नया सोपान होगा। यह उच्च कट ऑफ की बाधाओं को दूर करेगा। विविध सामाजिक-आर्थिक तबके के छात्र-छात्राओं के लिए एक समान-सहभागिता का अवसर और शिक्षा में समान अवसर की उपलब्धता हेतु पसंदीदा शैक्षणिक संस्थानों तक आम विद्यार्थी की पहुंच सुनिश्चित करेगा एवं ज्ञानार्जन हेतु स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का मार्ग प्रशस्त करेगा। 

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