तिरछी नज़र

डूबने से बचाने वाली योजनाओं का डूबना

डूबने से बचाने वाली योजनाओं का डूबना

डूबने से बचाने वाली योजनाओं का डूबना

शमीम शर्मा

कई दिनों से एक सवाल दिमाग में घूम रहा है कि क्या गूंगे-बहरे या अन्धे अफसर दिव्यांग की श्रेणी में आते हैं। ऐसा नहीं है कि इनकी जुबान, कान या आंख नहीं होती। होते-सुहाते ये इन अंगों का इस्तेमाल नहीं करते। तो क्या कोई बतायेगा कि वे अपाहिज माने जायें या नहीं कि जिन्हें न तो जनता की दुख-दुविधायें दिखाई देती हैं और जो न आम लोगों की सुनते हैं। ये ही वे इने-गिने होते हैं जो पूरे सिस्टम को ही अपाहिज बना सकते हैं। पूरा सिस्टम व्हीलचेयर पर आ जाता है। लोगों की वेदना के प्रति पूरी तरह उदासीन और आधिकारिक कर्तव्यों को ठंेगा दिखाते ये अधिकारीगण किसी अजूबे से कम नहीं होते।

आये साल बारिश को आना ही होता है। उसके आगमन की सूचना टीवी, अखबार चीख-चीख कर हमें डेट सहित पहाड़े की तरह याद करवा देते हैं। पर देश की टाॅप परीक्षा पास करके आये अधिकारी पता नहीं कानों में कौन-सी रूई ठंूसे बैठे रहते हैं कि उन्हें बादलों की पदचाप से लेकर घनघोर गर्जनायें तक नहीं सुनतीं। जितनी मेरी उम्र है, उतने ही साल मुझे देखते हो गये कि हर बार बरसातों में गली-बाजारों में इतना पानी भर जाता है कि आम जन का जीवन अस्त-व्यस्त तो होता ही है पर कई माअों के लाल पानी में बह जाते हैं, कार-स्कूटर जलमग्न हो जाते हैं। मकान धंस जाते हैं और सड़कें दरक जाती हैं। झोपड़ियों की तो गिनती करना भी मुश्किल है। इन मेघों ने कितने ही लोगों की बर्बादी पर दस्तखत कर दिये।

मैं किश्ती किनारे या सहारे की बात नहीं कर रही। शहर ही समन्दर में तब्दील हो जाते हैं। पूरा नगर ही तालाब की शक्ल ले लेता है और हमारे अफसर यह तमाशा हर साल देखते हैं और जल निकासी की योजनाओं पर कागज काले करते हैं। लाखों के वारे-न्यारे भी होते हैं और करोड़ों डूब भी जाते हैं। कोई साहिल पे खड़ा होकर हमारे डूबने का नजारा देख रहा है और कोई बचने को किनारा देख रहा है। कुल निचोड़ यही है कि आमजन को तैरना नहीं आता और हमारे चतुर-सुजान अफसरान को डूबना नहीं आता।

जिन्होंने डूबने की ठान ही ली हो, वे तो किसी की आंखों में भी डूब मरते हैं। पर ऐसे भी महारथी हैं जो दरिया तो पार कर जाते हैं पर चुल्लू भर पानी में डूब जाते हैं।

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एक बर की बात अक अखबार पढ़कै नत्थू ठहाका लगाकै हंसण लाग्या तो रामप्यारी बोल्ली—इसमैं इसा के लिख राख्या है जो भूंडी ढाल दांत पाड़ै है। नत्थू बोल्या—न्यूं लिख राख्या है अक देशभर के कई इलाकों में मूसलाधार बारिश। लड़कियों का मेकअप धुलने से आठ लड़कों की मौत।

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