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महाभारत से नये भारत तक के श्वान

उलटबांसी

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हमें प्यार करने के लिए भी एक ऐसा प्राणी चाहिए, जिसकी बैटरी खत्म हो जाए तो हम उसे प्लग में लगा दें। जो कुत्ता पहले रोटी के टुकड़े के लिए पूंछ हिलाता था, वह अब ‘प्रोसेसर’ की गर्मी से पूंछ हिला रहा है।

महाभारत में युधिष्ठिर के कुत्ते का जिक्र आता है। यह कुत्ता परम वफादार कुत्ता था और युधिष्ठिर ने उसके बिना स्वर्ग में दाखिल होने से इनकार कर दिया था। युधिष्ठिर के कुत्ते की प्रसिद्धि अब तक है। विकट प्रसिद्धि एक कुत्ते को भी मिली, हाल में दिल्ली में आयोजित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सम्मेलन में। रोबोट टाइप यह कुत्ता बहुत चर्चित हुआ, इसके मूल पर सवाल हुआ कि यह चीन का है या देसी है। कुत्तों का विभाजन इस आधार पर होता रहा है कि वह बुलडॉग है या शेपर्ड है। पर एआई कुत्ता, चाईनीज कुत्ता, इस तरह के विभाजन अब सामने आ रहे हैं।

कुत्तों की किस्मत का पहिया निश्चित रूप से गोल घूम चुका है। इतिहास गवाह है कि जब पांडव स्वर्ग की चढ़ाई चढ़ रहे थे, तो एक-एक करके सब साथ छोड़ गए। बचा तो सिर्फ एक कुत्ता। वह कुत्ता, जो युधिष्ठिर के साथ स्वर्ग के दरवाजे तक गया। जब इंद्र ने कहा कि ‘महाराज, आप तो आ जाइए, पर इस पूंछ हिलाते प्राणी को बाहर छोड़िए’, तब युधिष्ठिर जो अड़ गये कि नहीं कुत्ते के साथ ही जाऊंगा। पुराना वक्त था, इंसान कुत्ते के प्रति भी वफादारी निभाता था, अब तो इंसान भी इंसान के प्रति वफादार न होता।

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आजकल तो कुत्तों की नस्ल से इंसान की औकात नापी जाती है। कुत्तों की कीमत से, उनकी वंशावली से उनके मालिकों की हैसियत का आकलन होता है। युधिष्ठिर के कुत्ते की परीक्षा स्वर्ग के द्वार पर हुई थी। आज का एआई कुत्ता हमारी ‘इंटेलिजेंस’ की परीक्षा ले रहा है। हम इतने आलसी हो गए हैं कि हमें प्यार करने के लिए भी एक ऐसा प्राणी चाहिए, जिसकी बैटरी खत्म हो जाए तो हम उसे प्लग में लगा दें। जो कुत्ता पहले रोटी के टुकड़े के लिए पूंछ हिलाता था, वह अब ‘प्रोसेसर’ की गर्मी से पूंछ हिला रहा है। पुराना कुत्ता अटेंशन चाहता था एआई कुत्ते की ऐसी कोई जरूरत नहीं है, न वह भाव लेता न भाव देता।

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राजनीति के चश्मे से देखें, तो ‘कुत्ता’ शब्द एक गाली भी है और एक अलंकार भी। जब कोई नेता अपनी पार्टी बदलता है, तो लोग उसे ‘वफादार’ नहीं कहते, बल्कि दूसरे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। आजकल की राजनीति में अब ‘श्वान-नीति’ भी आ गई है। युधिष्ठिर का कुत्ता धर्म का प्रतीक था, और आज के ‘सिस्टम’ का कुत्ता वह है जो सत्ता की थाली के पास बैठा रहता है।

हमें कुत्ता चाहिए, पर उसकी गंदगी नहीं चाहिए। हमें वफादारी चाहिए, पर उसकी जिम्मेदारी नहीं चाहिए। इसीलिए हमने एआई कुत्ता बनाया। युधिष्ठिर का कुत्ता इसलिए महान था क्योंकि वह ‘मौन’ रहकर भी सत्य के साथ खड़ा था। व्यंग्य यह है कि कुत्ता तो कुत्ता ही रहा, इंसान बदल गया।

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