लगता है इंसानों ने इंसानियत बिल्कुल छोड़ दी है। होली में वैश्विक पटल पर दिवाली-सा माहौल है। धमाकों में तीसरे विश्व युद्ध की विभीषिका नज़र आ रही है।
रोज प्रातः भ्रमण के लिए निकलता हूं। सुरक्षा की दृष्टि से हाथ में छड़ी लेकर चलता हूं। रास्ते में मिलने वाले श्वानों की पीठ पर छड़ी जड़ देता हूं। बेचारे दर्द से रोते-बिलखते दूर भाग जाते हैं। एक दिन निकला तो रास्ते में अचानक एक श्वान प्रकट हुआ। मैंने छड़ी उठा ली, लेकिन वह नतमस्तक होकर पूंछ हिलाते हुए बोला, ‘बिलेटेड हैप्पी होली।’
मैं चौंका। श्वान मनुष्य की आवाज़ में बोल रहा है! कहीं ये एआई वाला रोबोटिक श्वान तो नहीं है? मैंने फिर छड़ी उठा ली और कन्फर्म करने की गरज से घुमाते हुए फटकार लगाई, ‘क्यों बे! इंसानी जुबान बोल रहा है?’ वह डर गया और पूरी गति से पूंछ हिलाने लगा। आंखों में याचना झलक आई। मैं खुश हो गया कि श्वान असली है। वैसे भी रोबोटिक श्वान आवारा नहीं घूम सकेंगे। आदमी असली श्वान को भले ही लतिया दे, रोबोटिक श्वान को ले भागेगा। श्वान दोबारा बोला, ‘बुरा न मानो, होली है।’ मैंने बनावटी दया दिखाई और कहा, ‘मैं भला तुमसे क्यों बुरा मानने लगा? होली में बुरा न मानने की परंपरा है। मैं ठहरा परंपरावादी। लोग होली के बहाने बैर भुनाते हैं। इसलिए दुखी हूं।’
श्वान असली था। सो दुखी हो गया। मेरे पैरों से लिपटकर प्यार का इज़हार करने लगा। मैंने झिड़का, ‘चलो हटो। नेता न बनो।’ मेरी बात सुनकर श्वान मेरे दोनों पैरों के बीच निराश-सा बैठ गया और जोर-जोर से हांफने लगा। पूंछ को अपने दोनों पैरों के बीच छिपाते हुए कहने लगा, ‘लगता है इंसानों ने इंसानियत बिल्कुल छोड़ दी है। होली में वैश्विक पटल पर दिवाली-सा माहौल है। धमाकों में तीसरे विश्व युद्ध की विभीषिका नज़र आ रही है।’
निराशा से भरी आवाज में श्वान आगे बोला, ‘सर! एआई के आने से हमारा अस्तिव खतरे में है। रोबोटिक श्वान की चर्चा हो रही है। हम सबके प्यारे धरम पाजी अब नहीं हैं। उनकी डांट में हमारा सम्मान छुपा था। कितनी शान से कहते थे, ‘कुत्ते मैं तुम्हारा खून पी जाऊंगा’। हालांकि, रोबोटिक श्वानों के जमाने में ऐसा नहीं कह पाते। उन्हें मजबूरन कहना पड़ता, कुत्ते मैं तुम्हारी बैटरी निकाल लूंगा।’ श्वान की बड़ी-बड़ी बातें सुनकर मुझे गुस्सा आ गया। श्वान पीछे हट गया और विदा होते-होते बोला, ‘इंसान ने भले ही इंसानियत छोड़ दी हो, हमने वफादारी नहीं छोड़ी। हमने इंसानियत की जिम्मेदारी न ली होती तो इंसानियत कब की मर गई होती। सो एक बार फिर बिलेटेड हैप्पी होली।’ मैंने प्रत्युत्तर में कहा, ‘भौ... भौ...।’

