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लाइकतंत्र के भरोसे नहीं चलता लोकतंत्र

उलटबांसी

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अब लोग नेताओं की नहीं, सोशल इनफ्लुएंसरों की सुन रहे हैं। इस ख्याल से कई सोशल इनफ्लुयएंसर पॉलिटिक्स में आ जाते हैं। पांच लाख फॉलोअर वाले इनफ्लुएंसर को पांच सौ वोट न मिलते।

वर्ष 2025 खत्म होने को है, पर रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म नहीं हो रहा है। कई बार लगता है कि बस अंत हो गया है, पर फिर चलता जाता है। लगता है कि इस युद्ध को चलाने वालों ने एकता कपूर के सीरियल स्कूल से ट्रेनिंग ली है, हर बार स्टोरी आगे बढ़ा देते हैं। पुतिन हर बार कहते हैं—‘हम शांति चाहते हैं।’ और फिर अगले दिन मिसाइलें भेज देते हैं। जेलेंस्की हर मंच पर कहते हैं—‘हम जीत रहे हैं।’ और फिर अगले दिन मदद की गुहार लगाते हैं। दुनिया देख रही है कि यह युद्ध अब असली से ज़्यादा राजनीतिक रियलिटी शो बन गया है।

पाकिस्तान साल के शुरू में भिखारी था और अंत में भी भिखारी ही है। पाक नेता, आर्मी जनरल जब अपनी एयरलाइंस नहीं बेच रहे होते हैं, तो वो किसी देश या इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड के पास भीख मांगने जा रहे होते हैं। आईएमएफ के दरवाज़े पर पाक द्वारा इतनी बार दस्तक दी गई कि अब आईएमएफ ने बोर्ड पर लिख दिया है—‘पाकिस्तानियों के लिए अलग लाइन।’

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ट्रंप का जलवा कायम रहा, कॉमेडियनों और कार्टूनिस्टों के बीच। रोज कुछ बयान ऐसे देते हैं ट्रंप कि कार्टूनिस्टों को रोजगार मिल जाता है। ट्रंप की मानें तो हजारों युद्ध रुकवा चुके हैं, यह अलग बात है कि इतने युद्ध फिर शुरू हो गये हैं।

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दिल्ली कुछ समय पहले तक भीषण स्मॉग से परेशान थी, अब यह परेशानी कम हो गयी है, क्योंकि अब जनता ठंड से परेशान है। ठंड और स्मॉग मिलकर अद्भुत कॉकटेल बना रहे हैं दिल्ली में। अब तक तमाम डिपार्टमेंट के अफसर, कर्मचारी दिल्ली में पोस्टिंग की जुगाड़ लगाते हैं। बहुत जल्दी यह होगा कि जिन्हें दंड देना होगा, उनकी पोस्टिंग दिल्ली में होगी- पनिशमेंट पोस्टिंग।

कइयों को लगता है कि नेताओं से ज्यादा पॉपुलर हो रहे हैं सोशल मीडिया स्टार। लाखों फॉलोअर हैं सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों के। अब लोग नेताओं की नहीं, सोशल इनफ्लुएंसरों की सुन रहे हैं। इस ख्याल से कई सोशल इनफ्लुयएंसर पॉलिटिक्स में आ जाते हैं। पांच लाख फॉलोअर वाले इनफ्लुएंसर को पांच सौ वोट न मिलते। यानी इस देश की जनता 2025 बीतते-बीतते बहुत चतुर हो गयी है। वह नेता के साथ-साथ सोशल इन्फ्लुएंसर को भी बेवकूफ बना लेती है। इससे पता लगता है कि जनता चतुर हो रही है और नेता बेवकूफ। लोकतंत्र या लाइकतंत्र, जनता के सामने ठोस रिजल्ट देने होंगे। सिर्फ लफ्फाजी से काम न चलेगा।

धुरंधर फिल्म सुपर कामयाब रही है। पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ गयी हैं क्योंकि धुरंधर टू भी आने वाली है। पहले सन्नी देयोल ही खंभा उखाड़ परफारमेंस देते थे, अब रणवीर सिंह खंभा नहीं, आईएसआई उखाड़ परफारमेंस दे रहे हैं। पाकिस्तान से युद्ध लड़ने में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री बिजी है। सीनियरटी के लिहाज से इस युद्ध में सन्नी देओल को ब्रिगेडियर माना जा सकता है और रणवीर सिंह को कर्नल।

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