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वाकई धुरंधर निकले डांसर आफ दि ईयर

उलटबांसी

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ट्रंप परेशान हैं कि इतनी भीड़ या तो मैसी ला सकते हैं या अक्षय खन्ना। बहुत संभव है कि ट्रंप अपनी रैलियों में मैसी या अक्षय खन्ना को बुलवा लें।

वक्त क्या-क्या दिखाता है। अक्षय खन्ना ने जो डांस दिखाया है धुरंधर फिल्म में, वह डांस परम सुपरहिट हो गया है। यही अक्षय खन्ना कुछ समय पहले आयी फिल्म छावा में औरंगजेब बने थे। औरंगजेब डांस, गाने का कड़ा विरोधी था। औरंगजेब की आत्मा बहुत उदास होगी यह देखकर कि उसके किरदार को निभाने वाले कलाकार को नाच से प्रसिद्धि मिल रही है। अक्षय खन्ना उस छोटे से डांस सीक्वेंस के लिए ‘डांसर आफ दि इयर’ घोषित किये जा सकते हैं। यूं इस फिल्म में कुछ नृत्यांगनाओं ने भी डांस करके एक गीत गाया था, पर उस गीत की कहीं चर्चा नहीं है। अकेले अक्षय खन्ना कई नृत्यांगनाओं पर भारी पड़ लिये जी, डांसर आफ दि इयर।

अक्षय खन्ना की नई फिल्म ‘धुरंधर’ की कामयाबी ने साबित कर दिया कि अगर एक्टिंग में दम हो, तो दर्शक टिकट खिड़की पर उसी तरह टूट पड़ते हैं जैसे कोलकाता में साल्ट लेक स्टेडियम में लोग फुटबाल स्टार मैसी को देखने के लिए टूट पड़े थे। फर्क बस इतना था कि सिनेमाघर में सीटें फिक्स थीं, साल्ट लेक स्टेडियम में सीटें जनता के सपनों की तरह हवा में उड़ रही थीं।

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मैसी जब साल्ट लेक स्टेडियम पहुंचे तो लगा कि फुटबॉल का भगवान धरती पर उतर आया है। लेकिन भगवान भी इंसानों से ही मिलता है—और वो इंसान थे। जनता को लगा कि वो खतरों के खिलाड़ी के सेट पर आ गयी है। तोड़ फोड़ मच रही थी। लोगों ने टिकट खरीदा था फुटबॉल देखने के लिए, लेकिन असल में उन्हें मिला था ‘सरवाइवल आफ दि फिटेस्ट’ का लाइव शो। किसी की चप्पल गायब, किसी का मोबाइल खो गया, और किसी का तो होश ही उड़ गया।

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ट्रंप परेशान हैं कि इतनी भीड़ या तो मैसी ला सकते हैं या अक्षय खन्ना। बहुत संभव है कि ट्रंप अपनी रैलियों में मैसी या अक्षय खन्ना को बुलवा लें। वोट के लिए भीड़ चाहिए होती है, वह फुटबाल स्टार या फिल्म स्टार लाते हैं। वैसे मैसी के प्रशंसकों की भीड़ देखकर विराट कोहली या रोहित शर्मा भी फुटबाल की तरफ का रुख कर सकते हैं। फुटबाल खेलने का एक फायदा यह है कि इसमें हारो या जीतो, किसी को फर्क नहीं पड़ता। क्रिकेट में हार या जीत पर अपार गालियों और तालियों का प्रावधान है।

धुरंधर के फिल्म हाल और मैसी वाले साल्ट लेक स्टेडियम में कुछ फर्क रहे।

धुरंधर फिल्म : दर्शक आराम से बैठे, पॉपकॉर्न खाया, तालियां बजाईं।

साल्ट लेक स्टेडियम : दर्शकों ने धक्का खाया, पसीना बहाया, और अंत में बोले— ‘मैसी तो दूर है, पानी की बोतल भी नहीं मिली।’

अक्षय खन्ना की एक्टिंग ने दर्शकों को सीट से चिपकाए रखा, जबकि साल्ट की अव्यवस्था ने दर्शकों को सीट से खदेड़ दिया।

साल्ट लेक के दर्शकों ने कहा, ‘मैसी ने तो बस आंखों से वीआईपी लोगों को देखा, हमें तो सिक्योरिटी ने आंखें दिखाईं।’

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