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ईद तक टला टकराव मगर तनातनी बरकरार

भारत ने मंगलवार को अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में नशा मुक्ति केंद्र पर पाकिस्तान के हवाई हमले की कड़ी आलोचना की। भारत ने इसे ‘सैन्य अभियान की आड़ में किया गया नरसंहार’ और अफ़ग़ानिस्तान की संप्रभुता पर सीधा हमला करार...

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भारत ने मंगलवार को अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में नशा मुक्ति केंद्र पर पाकिस्तान के हवाई हमले की कड़ी आलोचना की। भारत ने इसे ‘सैन्य अभियान की आड़ में किया गया नरसंहार’ और अफ़ग़ानिस्तान की संप्रभुता पर सीधा हमला करार दिया।

पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान ने बुधवार को ईद-उल-फ़ितर से पहले दुश्मनी में कुछ समय के लिए रोक लगाने का ऐलान किया। इस्लामाबाद और काबुल द्वारा अलग-अलग ऐलान किया गया कि सीज़फ़ायर 18/19 मार्च की आधी रात से 23/24 मार्च की आधी रात तक लागू रहेगा, दोनों पक्षों ने चेतावनी दी है कि किसी भी उल्लंघन पर मिलिट्री ऑपरेशन तुरंत फिर से शुरू हो सकते हैं। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा, कि यह फैसला आने वाले इस्लामिक त्योहार को देखते हुए और अच्छी नीयत से लिया गया है। तरार बोले, ‘आने वाले इस्लामिक त्योहार ईद-उल- फ़ितर को देखते हुए, ‘भाई इस्लामिक देशों’ की गुज़ारिश पर ‘ऑपरेशन ग़ज़ब-लिल-हक’ के बीच कुछ समय के लिए रोक लगाने का फैसला किया है।’

पाकिस्तानी सूचना मंत्री ने कहा कि यह रोक ‘अच्छी नीयत और इस्लामिक नियमों के हिसाब से’ लगाई जा रही है, लेकिन यह साफ किया कि यह समझौता शर्तों पर है। बयान में चेतावनी दी गई, ‘पाकिस्तान के अंदर किसी भी क्रॉस-बॉर्डर हमले, ड्रोन हमले या आतंकवादी घटना की स्थिति में, ‘ऑपरेशन ग़ज़ब लिल हक’ नई तेज़ी के साथ शुरू होगा।’

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दूसरी तरफ, अफगान तालिबान शासन ने भी ‘डिफेंसिव ऑपरेशन (राद-उल ज़ुल्म)’ कहे जाने वाले अभियान पर कुछ समय के लिए रोक लगाने की पुष्टि की है। तालिबान सरकार के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने एक्स पर पोस्ट किए गए एक बयान में कहा कि ईद-उल-फितर के मौके पर हम भी ख़ामोश रहेंगे। मुजाहिद ने कहा, ‘इस्लामिक अमीरात ऑफ़ अफ़गानिस्तान की सिक्योरिटी और डिफेंस फोर्स, ईद-उल-फितर के मौके पर ‘डिफेंसिव ऑपरेशन्स (रद-उल-ज़ुल्म)’ को कुछ समय के लिए सस्पेंड करने की घोषणा करती हैं।’ उन्होंने सऊदी अरब, तुर्की और कतर की ‘अच्छी नीयत और कंस्ट्रक्टिव कोशिशों’ की तारीफ़ की, साथ ही दोहराया कि ‘किसी भी खतरे की हालत में, इस्लामिक अमीरात मज़बूती से जवाब देगा।’

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हालांकि दोनों पक्षों ने इसे सशर्त अस्थाई रोक बताया है, फिर भी जानकार सावधानी से देख रहे हैं, कि क्या इस पहल से बड़े पैमाने पर बातचीत का रास्ता बन सकता है? यह कदम पाकिस्तान के काबुल में नए एयरस्ट्राइक शुरू करने के दो दिन बाद आया, जिसमें करीब 400 से अधिक सिविलियन मारे गए हैं। एक प्राइवेट टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में, इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के महानिदेशक, लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया, और कहा कि काबुल में हालिया हमले का मुख्य टारगेट एक डिपो था, जिसमें अफगान तालिबान का गोला-बारूद, हथियार और ड्रोन थे।

डीजी आईएसपीआर ने कहा कि यह ऑपरेशन अफगान तालिबान द्वारा पाकिस्तानी चेक पोस्ट पर किए गए 53 हमलों के जवाब में किया गया था। उन्होंने आम लोगों के मारे जाने की खबरों को प्रोपेगैंडा बताते हुए उसे खारिज कर दिया, यह दावा करते हुए कि तालिबान लड़ाके अक्सर यूनिफॉर्म नहीं पहनते हैं, और इसके बजाय आम लोगों के कपड़े पहनते हैं, और तालिबान सुसाइड हमलों के लिए ड्रग एडिक्ट्स का भी इस्तेमाल करते हैं। पकिस्तान का झूठ एक्सपोज़ करने के वास्ते अफ़ग़ानिस्तान में यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल की प्रभारी वेरोनिका बोस्कोविक पोहार ने कज़ाकिस्तान के राजदूत और अन्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर काबुल में उस नशा मुक्ति केंद्र का दौरा किया, जिसे मंगलवार की सुबह पाकिस्तान के सैन्य शासन द्वारा निशाना बनाया गया था।

डीजी आईएसपीआर ने आरोप लगाया, कि हाल ही में पाकिस्तान के खिलाफ अफगान तालिबान ने जिन ड्रोन का इस्तेमाल किया, उन्हें भारत सप्लाई कर रहा था। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि पाकिस्तान का अफगान लोगों से कोई झगड़ा नहीं है, जो खुद आतंकवादियों के बंधक हैं। लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा, कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है, और दावा किया कि आतंकवादी गतिविधियों के पीछे भारत का हाथ है। चीन खामोशी से दोनों तरफ के हमले देख रहा है। अफ़ग़ानिस्तान को सैन्य मदद चीन से भी मिली है। वर्ष 2021 में तालिबान के कब्जे के बाद से, चीन ने पूर्वी तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट को रोकने के लिए, अफ़ग़ानिस्तान को मिलिट्री ट्रेनिंग और हार्डवेयर प्रदान किए हैं। लेकिन रावलपिंडी की हिम्मत नहीं, कि वह चीन के ख़िलाफ़ चूं भी बोले।

त्रालाई मस्जिद हमले का ज़िक्र करते हुए डीजी आईएसपीआर ने कहा कि इसमें बेगुनाह लोग मारे गए। हमलावर अफगानिस्तान से आया था, जहां उसने ट्रेनिंग ली थी। उन्होंने वाना कैडेट कॉलेज पर हुए हमले का भी ज़िक्र किया, और कहा कि मारे गए सभी पांच हमलावर अफगान नागरिक थे। उन्होंने कहा कि पुलिस, आम लोगों, और मस्जिदों पर हमले किए जा रहे हैं। इन आतंकी संगठनों के सरगना अफ़ग़ानिस्तान में हैं। पाकिस्तान ने अपनी नवीनतम सैन्य कार्रवाई को ऑपरेशन ग़ज़ब-लिल-हक नाम दिया। इसका अर्थ ‘सत्य के लिए क्रोध’ या ‘न्याय के लिए रोष’ समझा जाता है। पिछले दो दशकों में, पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए अधिकांश अभियानों को धार्मिक नाम दिए गए हैं। धार्मिक एंगल पाकिस्तानी अवाम से राजनीतिक फायदे के वास्ते भी है।

15 जून, 2014 को, अफ़गानिस्तान की सीमा से लगे एक कबायली क्षेत्र, उत्तरी वज़ीरिस्तान में, सेना ने आतंकवादियों के खिलाफ़ ऑपरेशन ज़र्ब-ए-अज़ब शुरू किया था। जिसका सामूहिक अर्थ है ‘सत्य की तलवार का प्रहार’। फरवरी 2017 में, पाकिस्तानी सेना ने आतंकवाद को खत्म करने के लिए चारों प्रांतों में राष्ट्रव्यापी तलाशी अभियान चलाया और ऑपरेशन ‘रद-उल-फसाद’ के तहत कई व्यक्तियों को हिरासत में लिया, जिसका अर्थ है ‘अव्यवस्था और आतंकवाद का उन्मूलन’।

एकाध बार अंग्रेजी नाम भी पाकिस्तान ने रखे, मसलन, 2019 में भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान, पाकिस्तान ने भारतीय हवाई हमलों के जवाब में ऑपरेशन स्विफ्ट रिटॉर्ट (त्वरित प्रतिक्रिया) की घोषणा की, जिसमें भारतीय पायलट अभिनंदन वर्धमान को पकड़ लिया गया था। पाकिस्तान ने 1990 के दशक की शुरुआत में अफ़गान तालिबान बनाने में मदद की थी। वर्ष 2001 में अफ़गानिस्तान पर अमेरिकी कब्जे के दौरान कई तालिबान लीडर पाकिस्तान में छिपे थे। तब अमेरिकी विदेशमंत्री हिलेरी क्लिंटन ने पाकिस्तानी नेताओं से कहा था, ‘आप अपने घर के पीछे सांप नहीं पाल सकते और उम्मीद नहीं कर सकते कि वे सिर्फ़ आपके पड़ोसियों को ही काटेंगे।’

भारत ने मंगलवार को अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में नशा मुक्ति केंद्र पर पाकिस्तान के हवाई हमले की कड़ी आलोचना की। भारत ने इसे ‘सैन्य अभियान की आड़ में किया गया नरसंहार’ और अफ़ग़ानिस्तान की संप्रभुता पर सीधा हमला करार दिया। पाकिस्तान यदि भारत पर हमले के लिए चीनी हथियार का सहारा ले तो सही। अफ़ग़ानिस्तान, भारत से सैन्य मदद ले, तो ग़लत। भारत यदि तालिबान से सैन्य सहयोग समझौता कर चुका है, तो उसे खुलकर मदद करने में कोई बुराई नहीं है। दुश्मन का दुश्मन, दोस्त होता है!

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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