Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

सेमीकंडक्टर वाले चिप्स बनाम आलू चिप्स

उलटबांसी

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

मध्यम वर्ग का त्याग अब इतना स्थायी हो गया है कि बजट दिवस को ‘राष्ट्रीय त्याग दिवस’ घोषित कर देना चाहिए।

 

बजट में घोषणा हुई कि हस्तिनापुर का विकास होगा, उसे पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित किया जायेगा। सुनकर हस्तिनापुर से जुड़ी आत्माएं सक्रिय हुईं।

सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा हुई है।

Advertisement

सरकार का दावा : अर्जुन के रथ जैसी गति मिलेगी।

Advertisement

जनता की प्रतिक्रिया : रथ तो तेज़ होगा, लेकिन किराया इतना होगा कि हम पैदल ही चलना पसंद करेंगे। गरुड़ की गति तो ठीक है, पर जेब में कबूतर की फड़फड़ाहट भी नहीं है?

सेमीकंडक्टर और बायो-फार्मा पर हजारों करोड़ का आवंटन।

जनता की प्रतिक्रिया : भविष्य में चिप्स सस्ते होंगे, लेकिन आज आलू के चिप्स ही महंगे हैं। हमारी थाली में आज दाल का भविष्य ही अंधकारमय है।

महिला छात्रावास का प्रस्ताव

सरकार का दावा : द्रौपदी की आत्मनिर्भरता को सम्मान।

जनता : अच्छा है, अब कम से कम चीरहरण के समय कोई हॉस्टल वार्डन तो होगा।

टैक्स स्लैब जस का तस।

सरकार का दावा : मध्यम वर्ग राष्ट्र निर्माण का आधार है।

जनता की प्रतिक्रिया : हम कर्ण हैं, लेकिन हर साल कवच-कुंडल उतारते-उतारते अब बनियान भी फट गई है। राहत की जगह हमें ‘त्याग का प्रमाणपत्र’ मिल रहा है।

मध्यम वर्ग का त्याग अब इतना स्थायी हो गया है कि बजट दिवस को ‘राष्ट्रीय त्याग दिवस’ घोषित कर देना चाहिए।

सरकार का दावा रक्षा बजट : देश सुरक्षित रहेगा।

जनता : ‘हमारे घर की रक्षा तो प्याज़ और टमाटर के दाम से ही खतरे में है। असली युद्ध तो रसोई में चल रहा है।

बजट : दवाइयां सस्ती होंगी।

जनता : कम से कम इलाज में अब डॉक्टर की फीस ही जान लेगी। दवा सस्ती है, लेकिन अस्पताल का बिल अब भी महाभारत का सबसे बड़ा अस्त्र है।

बजट में शराब महंगी।

सरकार : विदुर की नीति, व्यसन बुरी बात है।

जनता की प्रतिक्रिया : दारू पीने से पहले अब बजट पढ़ना पड़ेगा। विदुर की नीति समझ में नहीं आई, लेकिन जेब खाली हो गई।

बजट के बाद शेयर बाजार गिरा-

जनता की प्रतिक्रिया : संजय, ये दृश्य मत दिखाओ, आंखों में आंसू आ रहे हैं।

सरकार के बजट का महाभारत एक दिन का होता है, आम जनता का महाभारत तो रोज का है।

Advertisement
×