ईरान पर हमले से बढ़ेगा मध्यपूर्व का संकट
ओमान को भी लगा है कि बातचीत के धोखे में ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई, उनके परिवार और दूसरे टॉप ईरानी अधिकारियों की हत्या सीआईए और मोसाद के बीच इंटेलिजेंस शेयरिंग के बाद हुई। अली ख़ामेनेई की सत्ता पलटी...
ओमान को भी लगा है कि बातचीत के धोखे में ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई, उनके परिवार और दूसरे टॉप ईरानी अधिकारियों की हत्या सीआईए और मोसाद के बीच इंटेलिजेंस शेयरिंग के बाद हुई। अली ख़ामेनेई की सत्ता पलटी जा सकती थी, उन्हें मारना ट्रंप-नेतन्याहू की ‘कूटनीतिक मिसफायर’ है। वो सद्दाम हुसैन नहीं थे।
शनिवार को हुए हमलों में कम से दो सौ से अधिक लोग मारे गए हैं, जिनमें दक्षिणी ईरान के एक स्कूल में हुए 80 से ज़्यादा लोग शामिल हैं। अमेरिका में इस हमले के हवाले से जो पोल कराया गया, उससे स्पष्ट हुआ कि केवल 33 फीसद लोग ईरान पर आक्रमण के पक्ष में थे। डेमोक्रेटिक हाउस माइनॉरिटी लीडर हकीम जेफ्रीस ने कहा, ‘डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर हमला करने से पहले कांग्रेस से मंज़ूरी लेने में नाकाम रहे थे।’ ट्रंप को कन्विंस करना होगा कि ईरान पर कार्रवाई के बाद अमेरिकन्स सुरक्षित हैं।
चीनी विदेश मंत्रालय मिडल ईस्ट में फंसे अपने नागरिकों को वहां से निकल लेने के कई विकल्प दे चुका है। मंत्रालय ने कहा कि अस्तारा बॉर्डर क्रॉसिंग के ज़रिए अज़रबैजान में हमारे नागरिक बिना वीज़ा के आ सकते हैं, जो रोज़ सुबह 9:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक खुला रहता है। अगराक क्रॉसिंग से आर्मेनिया में भी बिना वीज़ा के एंट्री मिलती है। चीनी दूतावास के मुताबिक, ‘वान, आगरी और हक्कारी प्रांतों में बॉर्डर क्रॉसिंग के ज़रिए तुर्की में ज़मीन के रास्ते खुले हैं, जहां चीनी पासपोर्ट होल्डर्स को भी बिना वीज़ा के आने-जाने की इजाज़त है। जो लोग इराक में घुसना चाहते हैं, वे शालमचेह बॉर्डर क्रॉसिंग के ज़रिए ऐसा कर सकते हैं, बशर्ते वे पहले से इलेक्ट्रॉनिक वीज़ा ले लें, या पहुंचने पर टेम्पररी वीज़ा के लिए अप्लाई करें।’
मिडिल ईस्ट में कई एम्बेसी, जिनमें तुर्की, अज़रबैजान और इराक शामिल हैं, ने उन चीनी नागरिकों के लिए अधिसूचना जारी की हैं, जो ईरान से इन देशों में इवैक्युएट होना चाहते हैं। इससे एक बात तो नज़र आ रही है, कि मिडल-ईस्ट में लड़ाई लम्बी चलेगी। उसमें चीन और रूस की भूमिका अभी स्पष्ट नहीं है। इनकी पहली प्राथमिकता अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने की रहेगी। युद्ध प्रभावित और ईरानी टारगेट वाले देशों में कोई 50 हज़ार रूसी नागरिक हैं। क़तर और बहरीन में कोई दो हज़ार रूसी नागरिकों को निकलने की चिंता क्रेमलिन को है। लेकिन चीन-रूस से कई गुना अधिक 97 लाख के क़रीब भारतीय नागरिक युद्ध प्रभावित गल्फ के देशों में हैं, उन्हें सुरक्षित निकालना आसान नहीं है।
इराकी कुर्दिस्तान के एरबिल में हवाई हमले और धमाकों की खबर है। शिया मिलिशिया शरया उलिया अल-दाम ने उस जगह पर कब्ज़ा करने का दावा किया, जहां एक बड़ी फ्यूल स्टोरेज की जगह थी। मूवमेंट के मिलिट्री विंग के प्रतिनिधियों ने घोषणा की, कि इराक में अमेरिकी सैनिकों, प्रॉपर्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले जारी रहेंगे। कतर, कुवैत, बहरीन, जॉर्डन और यूएई अमेरिकी मित्र और सैन्य ठिकानों वाले देश हैं। ईरानी ऑपरेशन में मरने वाले अमेरिकी सैनिकों की संख्या कथित तौर पर बढ़ गई है। कुवैत में एक बेस और बहरीन में अमेरिकी सैनिकों के ठिकानों पर ईरानी रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प के हमलों में सबसे ज़्यादा अमेरिकी सैनिक मारे गए।
एक बात तो मान कर चलें, जिन-जिन देशों में अमेरिकी बेस हैं, वो मुल्क़ भी महफूज़ नहीं हैं। राजधानी दोहा के बाहर रेगिस्तान में 24 हेक्टेयर का अल उदीद एयर बेस, यूएस सेंट्रल कमांड का फॉरवर्ड हेडक्वार्टर है, जो पश्चिम में मिस्र से लेकर पूर्व में कजाकिस्तान तक फैले इलाके में अमेरिकी मिलिट्री ऑपरेशन्स को डायरेक्ट करता है। मिडिल ईस्ट के सबसे बड़े अल उदीद बेस में करीब 10,000 अमेरिकी सैनिक हैं। इसके अलावा कैंप आरिफजान में अमेरिकी सैनिकों का जमावड़ा है।
अमेरिकन आर्मी सेंट्रल का फॉरवर्ड हेडक्वार्टर, अली अल सलेम एयर बेस को माना जाता है, जो इराकी बॉर्डर से लगभग 40 किलोमीटर दूर है, और अपने ऊबड़-खाबड़ माहौल की वजह से ‘द रॉक’ के नाम से जाना जाता है। यूएस आर्मी की वेबसाइट के मुताबिक, कैंप ब्यूहरिंग 2003 के इराक युद्ध के दौरान बनाया गया था, और यह इराक और सीरिया में तैनात अमेरिकी आर्मी यूनिट्स के लिए एक स्टेजिंग पोस्ट है। अबू धाबी के दक्षिण में मौजूद अल धाफरा एयर बेस, अमेरिकी एयर फोर्स का एक अहम हब है। दुबई का जेबेल अली पोर्ट, मिडिल ईस्ट में यूएस नेवी का सबसे बड़ा पोर्ट ऑफ़ कॉल है, जहां नियमित रूप से अमेरिकी युद्धक विमान और दूसरे जहाज़ आते-जाते रहते हैं।
व्हाइट हाउस के मुताबिक, ‘अमेरिका, इराक के पश्चिमी अनबर प्रांत में ऐन अल असद एयर बेस पर अपनी उपस्थिति बनाए रखता है, जो इराकी सुरक्षा बलों को सपोर्ट करता है और नाटो मिशन में योगदान देता है।’ 2020 में ईरानी मिसाइल हमलों में इस बेस को निशाना बनाया गया था। उत्तरी इराक के सेमी-ऑटोनॉमस कुर्दिस्तान इलाके में मौजूद, एरबिल एयर बेस अमेरिकी और मित्र सेनाओं के लिए ट्रेनिंग, एक्सरसाइज़ और बैटल ड्रिल करने के लिए एक हब के तौर पर काम करता है। यूएस कांग्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘यह बेस उत्तरी इराक में ट्रेनिंग, इंटेलिजेंस शेयरिंग और लॉजिस्टिक कोऑर्डिनेशन में अहम भूमिका अदा करता है।’
सऊदी अरब के रियाद से लगभग 60 किलोमीटर दक्षिण में, प्रिंस सुल्तान एयर बेस पैट्रियट मिसाइल बैटरी और टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस सिस्टम सहित यूएस आर्मी के एसेट्स को सपोर्ट करता है। जॉर्डन की राजधानी अम्मान से 100 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में अज़राक में, मुवफ़्फ़क अल साल्टी एयर बेस अमेरिकी एयर फ़ोर्स सेंट्रल के 332वें एयर एक्सपेडिशनरी विंग को होस्ट करता है, जो लाइब्रेरी ऑफ़ कांग्रेस की 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार, ‘यह अमेरिकी सैन्य ठिकाना, ‘लेवेंट मिशन’ में शामिल है।’
इस हमले ने मिडल ईस्ट में मुस्लिम एकता को बांट रखा है। मिडल ईस्ट में अमेरिकी मित्र राष्ट्र एकजुट हैं, जिन्हें सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान समन्वित कर रहे हैं। प्रिंस सलमान ट्रंप के लगातार संपर्क में हैं। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और सीरिया के प्रेसिडेंट अहमद अल-शरा ने इलाके में चल रही मिलिट्री बढ़ोतरी पर चर्चा की। क्राउन प्रिंस के पास ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन से भी अलग-अलग कॉल आए, जिसमें किंगडम और दूसरे खाड़ी देशों को टारगेट करने पर चर्चा हुई। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल में अब तक सिर्फ़ ओमान ही ऐसा देश है, जिस पर ईरान ने हमला नहीं किया है।
ओमान ने कई सालों तक ईरान और दूसरे देशों के बीच संपर्क का काम किया है। जिनेवा में ईरान और अमेरिका के बीच हुई बातचीत में ओमान ने अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन, ओमान को भी लगा है कि बातचीत के धोखे में ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई, उनके परिवार और दूसरे टॉप ईरानी अधिकारियों की हत्या सीआईए और मोसाद के बीच इंटेलिजेंस शेयरिंग के बाद हुई। अली ख़ामेनेई की सत्ता पलटी जा सकती थी, उन्हें मारना ट्रंप-नेतन्याहू की ‘कूटनीतिक मिसफायर’ है। वो सद्दाम हुसैन नहीं थे।
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

