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इस्राइल से दोस्ती और गहरी करने का उपक्रम

इस्राइल से दोस्ती और गहरी करने का उपक्रम

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सवाल है, भारत को हेक्सागन समझौते में शामिल होना चाहिए, या नहीं? निर्गुट आंदोलन के फ़ाउंडिंग मेंबर होने के नाते, नई दिल्ली ने हमेशा से कट्टर गुट की पॉलिटिक्स से परहेज किया है।

नवंबर, 2025 में, भारत के कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने इस्राइल का दौरा किया था और भारत- इस्राइल फ़्री ट्रेड एग्रीमेंट के लिए स्ट्रक्चर्ड बातचीत शुरू करने के लिए टर्म्स ऑफ़ रेफ़रेंस पर साइन किए। वाणिज्य मंत्री के इस दौरे के दौरान 250 से ज़्यादा बी-टू-बी मीटिंग हुईं, साथ ही दोनों तरफ़ के बिज़नेस और सरकारी नेताओं को एक साथ लाने वाले फ़ोरम भी हुए। लेकिन ऐसा कुछ तय नहीं हुआ था कि भारत ‘हेक्सागन अलायंस’ का हिस्सा बनेगा। पीएम मोदी का दो दिवसीय इस्राइल दौरा 26 फ़रवरी, 2026 को समाप्त हो जायेगा। पूरी दुनिया की नज़र व्यापार से अधिक हेक्सागन समझौते पर है।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने जानकारी दी थी, कि मोदी और उनके समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू भारत- इस्राइल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप में हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे और सुरक्षा, साइंस-टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, एग्रीकल्चर, वॉटर मैनेजमेंट, ट्रेड, इकॉनमी और लोगों के बीच उभयपक्षीय संबंधों पर अगले कदमों पर चर्चा करेंगे। स्टॉकहोम स्थित ‘सीपरी’ ने 2025 में रिपोर्ट दी थी, कि इस्राइल 2020-24 में दुनिया का आठवां सबसे बड़ा हथियार एक्सपोर्टर था, और भारत इस्राइली हथियारों का सबसे बड़ा अकेला इंपोर्टर था, जो उस समय में इस्राइली एक्सपोर्ट का 34 प्रतिशत था। यह 34 प्रतिशत अब और कितना प्लस होता है, वह नए समझौते से स्पष्ट हो जायेगा।

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नेतन्याहू ने कहा, ‘मेरे सामने जो विज़न है, उसके हिसाब से हम एक पूरा सिस्टम बनाएंगे। हेक्सागन ऑफ़ अलायंस का मकसद ऐसे देशों की एक धुरी बनाना है, जो मुस्लिम कट्टरपंथी गुटों के खिलाफ एक जैसी राय रखते हों। एक नहीं दोनों कट्टरपंथी गुट। पहला, ईरान की सरपरस्ती वाली शिया धुरी, जिस पर हमने बहुत ज़ोरदार हमला किया है। और दूसरी, उभरती हुई कट्टरपंथी सुन्नी धुरी।’

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हालांकि, किसी भी सरकार ने इस प्लान, या इसके सांप्रदायिक ढांचे का खुले तौर पर समर्थन नहीं किया है। नेतन्याहू की ख्वाहिश है कि इस समूह में भारत, इस्राइल, ग्रीस, साइप्रस और कुछ उदारवादी अरब व अफ्रीकी देश शामिल हों। यह दीगर है कि इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (आईसीसी) इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके विदेश मंत्री के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने की तैयारी में है। नेतन्याहू ने जिन तीन देशों का नाम लिया, उनमें से ग्रीस और साइप्रस इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के सदस्य हैं। ‘आईसीसी’ में जो कुछ पक रहा है, उसे काउंटर करने के वास्ते जो कुछ तैयारी नेतन्याहू की है, वो समझ में आने लगा है।

किंग्स कॉलेज लंदन में सिक्योरिटी स्टडीज़ के एसोसिएट प्रोफेसर एंड्रियास क्रेग कमेंट करते हैं, कि इस्राइली प्रधानमंत्री शायद अपने आइडिया को बढ़ा-चढ़ाकर बता रहे हैं, लेकिन ज़रूरी नहीं कि ‘हेक्सागन अलायंस’ नाटो स्टाइल के समझौते जैसा हो। नेतन्याहू ‘शिया एक्सिस’, जिसे ‘एक्सिस ऑफ़ रेज़िस्टेंस’ भी कहा जाता है, के खिलाफ अपनी ‘जीत’ को दोहराने की कोशिश कर रहे हैं। यह मध्य-पूर्व में इस्राइली और पश्चिमी असर का विरोध करने वाले ईरान केंद्रित नेटवर्क है। लेबनान में हिज़्बुल्ला को ईरान सपोर्ट करता है, जिसे लंबे समय से इस इलाके का सबसे ताकतवर नॉन-स्टेट एक्टर माना जाता है। 2024 में इस्राइल द्वारा ज़्यादातर लीडरशिप को खत्म करने से पहले हिज़्बुल्ला तेहरान के साथ जुड़ा हुआ था।

इराक में तेहरान कई शिया हथियारबंद समूहों के साथ रिश्ते बनाए हुए है, जिसमें कताइब हिज़्बुल्ला जैसे ग्रुप शामिल हैं। हाल ही में, यमन में, हूथी, एक ज़ैदी शिया आंदोलन, खास तौर पर उभरा है, जिसे तेहरान ने अधोसंरचनात्मक सहयोग, ट्रेनिंग और हथियार दिए हैं। इसके बर'अक्स, सुन्नी अतिवादी समूह है। इस्राइल ने 2025 में इस इलाके के कम से कम 6 सुन्नी बहुल देशों पर हमला किया, जिसमें फ़लस्तीन, लेबनान, सीरिया और यमन शामिल हैं। गाज़ा से जुड़े ट्यूनीशिया और ग्रीस के इलाके में भी हमले किए। इस्राइल ने मिस्र, तुर्की, सऊदी अरब, इराक और जॉर्डन को भी धमकी दी है।

इस इलाके के कई सुन्नी-बहुल देशों ने इस्राइल के इलाके में लड़ाई के जवाब में कूटनीतिक तरीके से कोऑर्डिनेट किया है। इस्राइल ने 26 दिसंबर, 2025 को सोमालीलैंड को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी है। उस फैसले ने अरब लीग, खाड़ी सहयोग परिषद, अफ्रीकी यूनियन और इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी ) देशों के बाद अब चीन को भी इस्राइल के खिलाफ खड़ा कर दिया है। सोमालीलैंड, लाल सागर और बाब अल-मंडेब के पास होने की वजह से ‘हॉर्न ऑफ अफ्रीका’ का सामरिक इलाका है, जिसने 1991 में गृहयुद्ध के दौरान सोमालिया से अलग होकर खुद को स्वतंत्र देश घोषित कर लिया था।

सवाल है, भारत को हेक्सागन समझौते में शामिल होना चाहिए, या नहीं? निर्गुट आंदोलन के फ़ाउंडिंग मेंबर होने के नाते, नई दिल्ली ने हमेशा से कट्टर गुट की पॉलिटिक्स से परहेज किया है। भारत एक ही समय में चीन, रूस और अमेरिका के साथ जुड़ा रहता है। भारत के खाड़ी देशों में भी बड़े अच्छे रिश्ते हैं। नई दिल्ली के ईरान के साथ करीबी रिश्ते हैं, वह इन रिश्तों को ‘सिविलाइज़ेशनल’ बताता है। साथ ही भारत, सऊदी अरब के साथ स्ट्रेटेजिक कोऑपरेशन भी बढ़ा रहा है। अभी यह पता नहीं है कि कौन से अरब और अफ्रीकी देश नेतन्याहू के सोचे हुए ‘हेक्सागन ऑफ़ अलायंस’ का हिस्सा बनेंगे। इस बीच इस्राइली प्रेसिडेंट आइज़ैक हर्ज़ोग मंगलवार को इथियोपिया पहुंचे। मकसद हेक्सागन ऑफ़ अलायंस का हिस्सा बनने के वास्ते इथियोपिया को सहमत करना है।

इस्राइली राजनीतिक विश्लेषक ओरी गोल्डबर्ग ने कहा, ‘सच तो यह है कि इस्राइल के पास हर तरह के टैक्टिकल, टेक्निकल पार्टनरशिप और अलायंस हो सकते हैं, लेकिन कोई भी इस्राइल को 10 फुट के डंडे से भी नहीं छूना चाहता। इस्राइली ब्रांड इतना खराब हो गया है कि इससे सिर्फ़ संभावित अराजकता और अस्थिरता ही आती है।’ पोलिटिकल एनालिस्ट ओरी गोल्डबर्ग ने कहा, ‘इस साल के आखिर में चुनाव होने हैं, इसलिए नेतन्याहू के पास राजनेता की तरह काम करने और यह तर्क देने का एक साफ मौका है कि इस्राइल डिप्लोमैटिक रूप से अलग-थलग नहीं है और वह अभी भी सार्थक क्षेत्रीय और क्षेत्रीय-बाहरी पार्टनरशिप कर सकता है।

मोदी ऐसे समय तेल अवीव पहुंचे हैं, जब वहां घरेलू राजनीतिक अंतर्विरोध चरम पर है। पीएम मोदी द्वारा इस्राइली संसद ‘नेसेट’ को सम्बोधित करना था। संसद के स्पीकर आमिर ओहाना ने सुप्रीम कोर्ट के प्रेसिडेंट यित्ज़ाक अमित को बुलाने से मना कर दिया, इससे भड़के विपक्ष के नेता यायर लैपिड ने नेसेट सत्र के बॉयकॉट का ऐलान कर दिया। 2016 से नेतन्याहू के खिलाफ रिश्वतखोरी, धोखाधड़ी और विश्वासघात के आरोपों वाले तीन मामलों में मुकदमा भी चल रहा है, जिसमें उन्हें जेल भी हो सकती है। अदालत से नेतन्याहू के छत्तीस के आकड़े हैं!

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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