आज बदलाव की इच्छा कायम है, बस परिस्थितियां बदल गई हैं। एआई के माध्यम से अस्सी के दशक में लौटने वाले गंजे सिर पर घने, मुलायम और काले बालों का सुख भोग रहे हैं।
सोशल मीडिया पर इन दिनों अस्सी के दशक में वापसी की होड़ मची हुई है। एआई के सहारे बूढ़े-बुढ़िया फिर से जवान बनने को मचल रहे हैं। लगता है, फिल्म ‘दूर गगन की छांव में’ के गीत ‘कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन’ को सोशल मीडिया ने गंभीरता से ले लिया है। मित्रों और भाइयों से विलगाव तथा एआई से लगाव का यह अद्भुत नज़ारा इंस्टाग्राम और फेसबुक पर खूब दिखाई दे रहा है।
लोग टेक्नोलॉजी के सहारे नॉस्टैल्जिया का सुख प्राप्त करने में लगे हैं।
इच्छाओं के बंधन में बंधे आदमजात की फितरत भी कमाल की होती है। सोशल मीडिया ऐप मदारी बनकर ट्रेंड के डमरू पर हमें बंदर की तरह नचाता है। कुछ वर्ष पहले एक ऐप के माध्यम से यह बताया जाता था कि आपकी मृत्यु कब और कैसे होगी। डेढ़ सौ वर्ष की उम्र तक जीने की भविष्यवाणी पाने वाले कई लोग 35-40 की उम्र में ही कोरोना की चपेट में आकर दुनिया से विदा हो गए। तकनीक की भविष्यवाणी भी कभी-कभी इतनी सटीक निकलती है कि भविष्य से पहले ही वर्तमान समाप्त हो जाता है!
इसी तरह फेसऐप के दौर में चिरयुवा दिखने की चाह रखने वाले लोग अचानक 70-80 साल के बुजुर्ग बनने को व्याकुल हो गए थे। आज बदलाव की इच्छा कायम है, बस परिस्थितियां बदल गई हैं। एआई के माध्यम से अस्सी के दशक में लौटने वाले गंजे सिर पर घने, मुलायम और काले बालों का सुख भोग रहे हैं। चेहरे पर झुर्रियों का स्थायी पता बना चुके वयोवृद्ध फेसबुक उपभोक्ता बिना ब्यूटी पार्लर का शुल्क दिए त्वचा पर निखार ला रहे हैं। ओवरवेट बंदा अंडरएज दिखकर अपनी तस्वीरों पर ‘शानदार’, ‘लाजवाब’ जैसी टिप्पणियां बटोर रहा है।
बहरहाल, तकनीकी भागदौड़ और व्यस्तता के कारण भावनात्मक रूप से दूर होते मित्रों और रिश्तेदारों से मिलकर गपशप के माध्यम से पुरानी यादों और घटनाओं को फिर से जीने के आत्मीय सुख की बजाय हम सोशल मीडिया ऐप के जरिए आभासी सुख की तलाश में भटक रहे हैं। रिश्ते पास हों या दूर, एआई बस एक क्लिक में हमें हमारी जवानी के पास पहुंचा देता है।
बहरहाल, अब अस्सी-नब्बे के दशक या अतीत में लौटने के लिए न पुरानी तस्वीरों का संदूक खोलना है, न पुराने दोस्तों को ढूंढ़ना है। बस एआई को आदेश दीजिए और तकनीकजीवी अपनी जवानी में हाज़िर!

