पेट्रोलियम मंत्रालय कहता है, ‘इथेनॉल देश बचाएगा।’ चीनी उद्योग कहता है, ‘चीनी भी देश बचाएगी।’ और गृहिणी कहती है, ‘पहले चाय बचाओ।’
देश में इन दिनों चीनी की मिठास कुछ कम और उसकी कीमत कुछ ज्यादा हो गई है। सरकार ने सफाई दी है कि चीनी के दाम बढ़ने का कारण इथेनॉल नहीं, बल्कि चीनी उत्पादन में कमी है। यानी गन्ना खेत में कम हुआ, तो चीनी महंगी हो गई। जनता ने पूछा, ‘साहब, फिर इथेनॉल का क्या कसूर?’ सरकार बोली, ‘वह तो पेट्रोल में मिलकर देश की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ा रहा है, आप मिठाई में क्यों ढूंढ़ रहे हैं?’
दरअसल, गन्ने की दुनिया में भी परिवार बड़ा हो गया है। पहले गन्ने से चीनी बनती थी, अब इथेनॉल भी बनता है। गन्ना किसान सोचता है, ‘जिसकी कीमत अच्छी मिले, उसे भेज दूं।’ पेट्रोलियम मंत्रालय कहता है, ‘इथेनॉल देश बचाएगा।’ चीनी उद्योग कहता है, ‘चीनी भी देश बचाएगी।’ और गृहिणी कहती है, ‘पहले चाय बचाओ।’
अर्थशास्त्र का यही कमाल है। एक ही गन्ना किसान के लिए आय है, सरकार के लिए ऊर्जा सुरक्षा है, चीनी मिल के लिए कारोबार है और ग्राहक के लिए महंगी मिठाई।
उधर दुनिया में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को लेकर लगातार बेचैन हैं। दुनिया में राष्ट्रपति बनना आसान है, लेकिन दुनिया को अपनी इच्छा के अनुसार चलाना बहुत कठिन काम है। ईरान कहता है, ‘हम अपनी शर्तों पर बात करेंगे।’ अमेरिका कहता है, ‘हमारी शर्तों पर बात करो।’ और तेल बाजार बीच में खड़ा होकर कहता है, ‘भाइयों, जरा धीरे बोलो, मेरा भाव बढ़ रहा है।’
भारत में इस बीच क्रिकेट ने अलग ही माहौल बना दिया। श्रीलंका के खिलाफ गाले में भारत ने 165 रन से जीत दर्ज की। मानव सुथार ने शानदार गेंदबाजी करते हुए दोनों पारियों में कुल 10 विकेट लेकर मैच को भारतीय कब्जे में कर दिया।
और फिर हॉकी ने क्रिकेट को भी पीछे से आवाज दी, ‘भाई, मुझे भी देख लो!’
हॉकी विश्व कप में भारत ने पाकिस्तान को 5-3 से हराकर अगले दौर में जगह बनाई। अब भारतीय खेलप्रेमी के पास गर्व करने के कई कारण हैं। क्रिकेट में श्रीलंका हारा, हॉकी में पाकिस्तान हारा और पर चीनी महंगी हुई।
आम आदमी इस पूरे घटनाक्रम को देखकर बस इतना कह रहा है—‘खेल में भारत जीतता रहे, दुनिया में शांति बनी रहे और चीनी कम से कम इतनी महंगी न हो कि अगली बार मिठाई की दुकान पर दुकानदार पूछे, ‘कितने किलो?’ और ग्राहक जवाब दे, ‘बस फोटो खींचनी है।’

