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धर्मशाला में ‘स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट वर्कफ्लो’ पर कार्यशाला, 50 चिकित्सा अधिकारियों को मिला प्रशिक्षण

एनसीडी रोगों के बेहतर इलाज और साक्ष्य-आधारित निर्णय क्षमता बढ़ाने पर दिया गया जोर

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धर्मशाला के जोनल अस्पताल में स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट वर्कफ्लो (STW) विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के उपचार को निर्धारित मानकों के अनुसार बढ़ावा देना और रोगियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना रहा।

कार्यशाला का आयोजन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसमें जिला कांगड़ा के 50 चिकित्सा अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया, जो आगे अन्य डॉक्टरों को भी प्रशिक्षित करेंगे।

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आईसीएमआर के वैज्ञानिक-जी डॉ. आशु ग्रोवर ने कार्यशाला में स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट वर्कफ्लो की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उपचार के दौरान आवश्यक जांच, राष्ट्रीय सूची के अनुसार दवाओं का उपयोग, प्रारंभिक इलाज और समय पर रेफरल बेहद महत्वपूर्ण हैं।

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उन्होंने कहा कि यह पहल डॉक्टरों को अधिक सशक्त बनाएगी और उन्हें त्वरित व साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सक्षम बनाएगी। साथ ही हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह, किडनी रोग, श्वसन और मानसिक स्वास्थ्य जैसी गैर-संचारी बीमारियों के प्रभावी प्रबंधन में मदद मिलेगी।

डॉ. ग्रोवर ने बताया कि सामान्य बीमारियों के लिए 157 स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट वर्कफ्लो आईसीएमआर द्वारा विकसित किए गए हैं, जिन्हें वैज्ञानिक शोध, विशेषज्ञ परामर्श और डीजीएचएस व MoHFW के समन्वय से तैयार किया गया है। इन्हें राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की स्वीकृति भी प्राप्त है।

इस मौके पर MoHFW के उप सहायक महानिदेशक (DADG) डॉ. अविनाश सुंथलिया ने कहा कि STW के माध्यम से अनावश्यक जांच कम होंगी, सही उपचार को बढ़ावा मिलेगा और रेफरल प्रणाली मजबूत होगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुलभ और किफायती बनेंगी।

कार्यशाला के दौरान केंद्रीय टीम ने जोनल अस्पताल धर्मशाला के अलावा पीएचसी चामुंडा, पीएचसी डारी, सीएचसी गोपालपुर और सिविल अस्पताल पालमपुर का भी दौरा किया।

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