Women's Day 2026 : शिक्षा जगत की सशक्त पहचान, पीजीजीसी-46 की 'धुरी' रहीं दीपशिखा बतौर डीन संभाल रहीं कमान
37 साल की बेदाग सेवा के बाद जून 2024 में कॉलेज में हुई वापसी
Women's Day 2026 : शिक्षा के प्रति अटूट समर्पण और अनुशासन की प्रतिमूर्ति दीपशिखा का नाम चंडीगढ़ के शैक्षणिक गलियारों में बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। लगभग 37 वर्षों तक पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज (पीजीजीसी), सेक्टर-46 के विकास में 'धुरी' की भूमिका निभाने वाली दीपशिखा ने अपनी विद्वत्ता और मेहनत से एक अलग पहचान बनाई है। वर्तमान में वह सेक्टर-11 स्थित पीजीजीसी कॉलेज में बतौर डीन अपनी सेवाएं दे रही हैं, जहां उन्होंने जून 2024 में कार्यभार संभाला।
आगरा से चंडीगढ़ और पीयू का सफर
5 फरवरी, 1962 को आगरा में जन्मीं दीपशिखा की उच्च शिक्षा चंडीगढ़ की प्रतिष्ठित पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) से हुई। उन्होंने पीयू के 'ऑनर्स स्कूल' से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन की और 1982 में मास्टर डिग्री हासिल की। शिक्षा के प्रति उनकी गहरी रुचि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 1983 में ही एम.फिल. की डिग्री भी प्राप्त कर ली। 12 सितंबर, 1983 को उन्होंने सेक्टर-46 के सरकारी कॉलेज में बतौर शिक्षक अपनी पारी शुरू की थी, जहाँ वे संस्थान के इतिहास का अटूट हिस्सा बन गईं।
प्रशासनिक दक्षता और बहुआयामी भूमिका
दीपशिखा केवल एक कुशल अर्थशास्त्री ही नहीं, बल्कि एक सख्त और दूरदर्शी प्रशासक भी साबित हुईं। कॉलेज के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए जनवरी 2016 में उन्हें वाइस-प्रिंसिपल और जनवरी 2017 में कॉलेज का डीन नियुक्त किया गया। उन्होंने इकोनॉमिक्स विभाग की कमान संभालने के साथ-साथ कंप्यूटर एप्लीकेशन, एडवरटाइजिंग और सेल्स प्रमोशन जैसे विभागों के इंचार्ज के तौर पर भी सफलता के झंडे गाड़े। इसके अलावा, यूनिवर्सिटी परीक्षाओं के सफल संचालन, टाइम-टेबल मैनेजमेंट और स्टाफ एडिटर के रूप में उनकी विश्लेषणात्मक क्षमता का हर कोई कायल रहा।
सेवानिवृत्ति के बाद नई जिम्मेदारी
30 सितंबर, 2020 को जब वह सेक्टर-46 कॉलेज से सेवानिवृत्त हुईं, तो कॉलेज के प्रिंसिपल, फैकल्टी और छात्रों ने उनके प्रति अपना आभार और प्यार ज़ाहिर किया। उनकी कार्यक्षमता और लंबे अनुभव को देखते हुए ही जून 2024 में उन्हें पीजीजीसी-11 में बतौर डीन फिर से बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। सादगी और 'ड्यूटी फर्स्ट' के सिद्धांत को जीने वाली दीपशिखा आज भी शिक्षा जगत के लिए एक प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं।

