Salute To Lt. Gen Katiyar : 'ऑपरेशन सिंदूर' से स्वदेशी हथियारों तक अमिट छाप छोड़ गए लेफ्टिनेंट जनरल कटियार
40 साल की बेदाग सेवा के बाद सेना से रिटायर हुए लेफ्टिनेंट जनरल कटियार
Salute TO Lt. Gen Katiyar : एक फौजी कभी रिटायर नहीं होता, बस उसकी भूमिका बदल जाती है। सोमवार को चंडीमंदिर स्थित पश्चिमी कमान मुख्यालय में जब लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने अपने 40 साल लंबे शानदार सैन्य सफर और अपनी प्रिय 'ऑलिव ग्रीन' को अलविदा कहा, तो वहां मौजूद हर शख्स का गला रुंध गया। पिछले तीन वर्षों से पश्चिमी कमान का कुशल नेतृत्व कर रहे लेफ्टिनेंट जनरल कटियार जब मंच पर आए, तो उनके चेहरे पर एक कमांडर का तेज था, लेकिन आंखों में चार दशकों की यादों का समंदर उमड़ रहा था।
उन्होंने जैसे ही कहा 'भारतीय सेना की 40 साल की सेवा के बाद आज मैं रिटायर हो रहा हूं...', तो उस एक पल में सीमा की सर्द रातों से लेकर तपते रेगिस्तानों तक की स्मृतियां जीवंत हो उठीं। एक सैनिक के लिए अपनी छावनी और साथियों से दूर जाना सबसे मुश्किल पल होता है। अपनी इस भावुक विदाई बेला में उन्होंने साथी जवानों, नागरिक प्रशासन और आम जनता का हृदय से शुक्रिया अदा किया।
'ऑपरेशन सिंदूर' : मोर्चे की यादें और साथियों का वो अटूट साथ
देश की पश्चिमी सरहदों की सुरक्षा के मोर्चे पर मिली सफलताओं का जिक्र करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल कटियार पुरानी यादों में खो गए। उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' को याद करते हुए बताया कि कैसे पिछले साल भारतीय सेना ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए पाकिस्तान के नापाक इरादों को खाक में मिला दिया था। उन्होंने कहा, "सरहदों को महफूज रखने के लिए हमारे जवान आज भी सीना ताने खड़े हैं। मुझे फख्र है कि मैं इस महान सेना का हिस्सा रहा।" यह कहते हुए उन्होंने उन वीर साथियों को विशेष नमन किया, जिन्होंने कठिन से कठिन ऑपरेशंस और ट्रेनिंग में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर पसीना बहाया।
आत्मनिर्भर सेना का सपना और अपने 'दिग्गज' साथियों की फिक्र
अपने कार्यकाल के दौरान सेना के आधुनिकीकरण को नई दिशा देने वाले लेफ्टिनेंट जनरल कटियार ने स्पष्ट किया कि आज की सेना तेजी से बदल रही है। उन्होंने 'इन-हाउस' वर्कशॉप्स में अत्याधुनिक उपकरणों और 'काउंटर-ड्रोन' तकनीक के स्वदेशी निर्माण पर गर्व जताया। लेकिन हथियारों से परे, उनके दिल में जो बात सबसे गहरी थी, वह थी अपने पूर्व सैनिकों (एक्स-सर्विसमैन) की फिक्र। उन्होंने कहा कि देश के लिए जवानी कुर्बान करने वाले इन दिग्गजों का कल्याण उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहा। रिटायरमेंट के बाद उनकी पेंशन और मेडिकल सुविधाओं को लेकर सेना ने जो संवेदनशीलता दिखाई है, वह आगे भी जारी रहेगी।
'ऑपरेशन राहत' और वो पांच राज्य जो बन गए परिवार
युद्ध के मैदान के अलावा आपदा की घड़ी में भी सेना हमेशा तारणहार बनी है। अपने विदाई संदेश के अंत में उन्होंने 'ऑपरेशन राहत' जैसे नागरिक सहायता अभियानों का भावुकता से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर की जनता ने जो प्यार और सहयोग दिया, उसे वह कभी भुला नहीं पाएंगे। वहां की राज्य सरकारों और सिविल एडमिनिस्ट्रेशन ने सेना को हमेशा एक परिवार की तरह माना। इस भावुक पल में, जब उन्होंने छावनी की तरफ अंतिम बार पलटकर देखा, तो वहां सिर्फ एक रिटायर होता अधिकारी नहीं था, बल्कि एक ऐसा योद्धा था जिसने अपना पूरा जीवन भारत माता के चरणों में समर्पित कर दिया था।

