मनीमाजरा और आसपास के इलाकों में नगर निगम के अतिक्रमण विभाग की कार्यप्रणाली विवादों के घेरे में है। आरोप है कि विभाग की लापरवाही के कारण लाखों रुपये की लागत से बने पक्के वेंडर जोन खाली पड़े हैं, जबकि सड़कों और फुटपाथों पर अवैध वेंडरों का कब्जा बढ़ता जा रहा है। व्यापार मंडल के प्रधान मलकीत सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। कोर्ट ने सभी वेंडरों को निर्धारित जोन में शिफ्ट करने का आदेश दिया था, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। मलकीत सिंह के अनुसार मॉडर्न कॉम्प्लेक्स का पक्का वेंडर जोन आधा खाली पड़ा है। मोरीगेट बाजार के पास बना नया मॉडल वेंडर जोन पूरी तरह वीरान है। इसके विपरीत, शांति नगर रोड पर शाम के समय वेंडरों की भीड़ से यातायात बाधित हो रहा है और हादसों का खतरा बना रहता है। व्यापार मंडल का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने वाली टीमें केवल ‘खानापूर्ति’ कर रही हैं। वहीं, प्रशासनिक मिलीभगत की ओर इशारा करते हुए समाजसेवी रामेश्वर गिरि ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बस स्टैंड के पास वेंडरों द्वारा तिरपाल डालकर बनाए गए पक्के अड्डों को देखकर साफ लगता है कि ‘पूरी दाल ही काली है।’ नागरिकों का भी मानना है कि यदि जल्द ही निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो इलाके की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी।
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