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UPSC Result : असफलताओं से नहीं मानी हार, तीसरे प्रयास में चखा कामयाबी का स्वाद; बिना कोचिंग मोहाली के अमन का 295वां रैंक

अमन की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली, बल्कि इसके पीछे वर्षों का संघर्ष और धैर्य छिपा है

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UPSC Result : कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों और लक्ष्य पर नजरें टिकी हों, तो मंजिल मिल ही जाती है। इसे सच कर दिखाया है मोहाली के वेव एस्टेट में रहने वाले अमन अलून ने। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के नतीजों में अमन ने देशभर में 295वां रैंक हासिल कर अपनी मेधा का लोहा मनवाया है। अमन की इस सफलता ने साबित कर दिया है कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए बड़े शहरों की महंगी कोचिंग नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत और खुद पर भरोसा जरूरी है।

​शिक्षक पिता और गृहिणी मां का सपना किया पूरा

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​अमन का परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अमरोहा का रहने वाला है। उनके पिता चंद्रपाल सिंह (सीपी सिंह) शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े रहे हैं और केंद्रीय विद्यालय संगठन में पीजीटी भूगोल के पद से वर्ष 2023 में सेवानिवृत्त हुए हैं। वहीं मां कल्पना रानी एक कुशल गृहिणी हैं। एक शिक्षक पिता के साये में पले-बढ़े अमन ने बचपन से ही प्रशासनिक सेवाओं में जाने का सपना देखा था, जिसे उन्होंने आज अपनी मेहनत से हकीकत में बदल दिया है।

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​गिरकर संभलने का नाम है 'अमन' का सफर

​अमन की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली, बल्कि इसके पीछे वर्षों का संघर्ष और धैर्य छिपा है। यह उनका तीसरा प्रयास था।

​पहला प्रयास: वह प्रारंभिक परीक्षा (प्रिलिम्स) की बाधा भी पार नहीं कर सके थे।

​दूसरा प्रयास: मुख्य परीक्षा (मेन्स) तो पास की, लेकिन इंटरव्यू के लिए बुलावा नहीं आया।

​तीसरा प्रयास: पिछली गलतियों से सीखा और आज वह एक सफल रैंक के साथ हमारे सामने हैं।

​अमन के पिता चंद्रपाल सिंह बताते हैं कि पिछली असफलताओं ने उसे तोड़ा नहीं, बल्कि और मजबूत बनाया। हर हार के बाद अमन ने अपनी कमियों का विश्लेषण किया और दोगुनी ऊर्जा के साथ तैयारी में जुट गया।

सेल्फ स्टडी और डिजिटल मैटीरियल बना हथियार

​आजकल जहां यूपीएससी के लिए लाखों रुपये की कोचिंग को जरूरी माना जाता है, वहीं अमन ने एक अलग राह चुनी। उन्होंने किसी भी संस्थान से फिजिकल कोचिंग नहीं ली। अमन ने अपनी पूरी तैयारी 'सेल्फ स्टडी' के दम पर की। उन्होंने बताया कि उन्होंने केवल ऑनलाइन माध्यम से जरूरी पढ़ाई की सामग्री मंगवाई और घर पर ही अनुशासन के साथ पढ़ाई की। उनकी यह उपलब्धि उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी के चलते बड़े सपने देखने से कतराते हैं।

​कामयाबी का मंत्र: निरंतरता और परिवार का साथ

​अमन अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और विशेष रूप से अपनी बहन को देते हैं। उन्होंने कहा, "परीक्षा के दौरान कई बार ऐसा दौर आया जब मन में शंकाएं हुईं, लेकिन परिवार ने कभी मेरा साथ नहीं छोड़ा। मेरी बहन ने मुझे मानसिक रूप से बहुत सपोर्ट किया।" अमन का मानना है कि तैयारी के दौरान निरंतरता (Consistency) सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने पिछली गलतियों को अपना सबसे बड़ा शिक्षक माना और आखिरकार कामयाबी की दहलीज तक पहुंच गए।

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