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मूक-बधिर परिवार की बेजुबान पुकार सुनने में 'बहरा' हुआ मेंटेनेंस विभाग, मेयर ने प्रशासक से पूछा- और कितनी परीक्षा?

हाईकोर्ट में माली जगदीश के जर्जर मकान की मरम्मत में एक साल की देरी

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कहते हैं कि दर्द को जुबान की जरूरत नहीं होती, लेकिन जब व्यवस्था बहरी हो जाए तो चीखें भी अनसुनी रह जाती हैं। चंडीगढ़ के वीआईपी सेक्टर-16 के सरकारी मकान नंबर 665 की दीवारों के पीछे एक मूक-बधिर परिवार पिछले एक साल से बदहाली पर आंसू बहा रहा है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में माली के पद पर तैनात जगदीश, पत्नी मुक्ता व बड़ा बेटा न सुन सकते हैं और न बोल सकते हैं। इस सन्नाटे भरे घर में उम्मीद की इकलौती किरण उनका छोटा बेटा रोहन है, जो इस मूक परिवार और बाहरी दुनिया के बीच एकमात्र कड़ी है। मेयर सौरभ जोशी ने इस परिवार की दयनीय स्थिति को देखते हुए यूटी के प्रशासक को पत्र लिखकर तुरंत दखल देने की मार्मिक अपील की है।

जब वीडियो बना बेजुबानों की आवाज

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जगदीश और मुक्ता की बेबसी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब उनकी मौखिक शिकायतों पर किसी ने गौर नहीं किया, तो उन्होंने वीडियो बनाकर अपनी व्यथा साझा की। चूंकि वे बोल नहीं सकते, इसलिए हाथ के संकेतों और घर की जर्जर हालत को वीडियो में रिकॉर्ड कर उन्होंने प्रशासन के बंद दरवाजों को खटखटाने की कोशिश की है। इस घर में रोहन ही वह सदस्य है जो अपने माता-पिता और बड़े भाई के हाथों के संकेतों को समझकर उसे शब्दों में ढालता है।

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प्रशासक से तुरंत दखल की मांग

मेयर सौरभ जोशी ने इस मामले में मानवीय पहल करते हुए यूटी के प्रशासक को पत्र लिखकर मांग की है कि इस परिवार की समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए। मेयर ने अपने पत्र में कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक मूक-बधिर परिवार को अपनी मूलभूत जरूरतों के लिए वीडियो बनाकर गुहार लगानी पड़ रही है। उन्होंने प्रशासक से आग्रह किया कि मेंटेनेंस विभाग के अधिकारियों को मौके पर भेजा जाए और उनके साथ एक साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट (दुभाषिया) भी हो, ताकि जगदीश अपनी बात सही ढंग से समझा सकें।

फाइलों में दफन हुई संवेदनाएं, साल भर से कार्रवाई का इंतजार

मेयर ने बताया कि पिछले साल भी चंडीगढ़ प्रशासन के मुख्य अभियंता को इस बारे में सूचित किया गया था, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी मेंटेनेंस विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। "एक मूक-बधिर परिवार जो अपनी शिकायत चिल्लाकर नहीं कर सकता, क्या प्रशासन उन्हें इसी तरह नजरअंदाज करता रहेगा?

जगदीश ने वीडियो बनाकर अपनी बात कहनी चाही है, अब देखना यह है कि प्रशासन उनकी इस बेजुबान पुकार को कब सुनता है। मेयर ने मांग की है कि मकान की मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर शुरू किया जाए ताकि यह परिवार सुरक्षित महसूस कर सके।

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