मासिक धर्म स्वास्थ्य पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला मील का पत्थर : सुधा भारद्वाज
देश की करोड़ों किशोरियों के स्वास्थ्य, सम्मान और शिक्षा से जुड़े अधिकारों को संवैधानिक संरक्षण देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ‘मासिक धर्म स्वास्थ्य’ को मौलिक अधिकार घोषित किया है। हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुधा भारद्वाज ने इस फैसले...
देश की करोड़ों किशोरियों के स्वास्थ्य, सम्मान और शिक्षा से जुड़े अधिकारों को संवैधानिक संरक्षण देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ‘मासिक धर्म स्वास्थ्य’ को मौलिक अधिकार घोषित किया है। हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुधा भारद्वाज ने इस फैसले को दूरदर्शी और समय की जरूरत बताया।
सुधा भारद्वाज ने कहा कि यह निर्णय किशोरियों के जीवन में सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाने वाला है, जिससे स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति पर भी प्रभावी रोक लगेगी। न्यायालय ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं को नि:शुल्क सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने और ‘स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता नीति’ को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
सुधा भारद्वाज ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस विषय पर शुरू से संवेदनशील रही है और महिला कांग्रेस ने पर्यावरण के अनुकूल बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन के निर्माण व वितरण की पहल की। उन्होंने कहा कि अब सरकार और प्रशासन का दायित्व है कि आदेशों को जमीन पर उतारें, साथ ही स्कूलों में स्वच्छ और सुरक्षित शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

