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वैश्विक स्थिरता के लिए भारत-यूरोप के बीच मजबूत साझेदारी जरूरी : डॉ. मोनिका सूद

नई दिल्ली में आयोजित उच्च स्तरीय सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों और रणनीतिक विचारकों ने की भागीदारी

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बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत और यूरोप के बीच सहयोग की अहमियत लगातार बढ़ रही है। भाजपा चंडीगढ़ के इंटेलेक्चुअल सेल की संयोजक डॉ. मोनिका बी. सूद ने जोर दिया है कि तकनीकी प्रगति, सतत विकास और आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए दोनों क्षेत्रों को आपसी सहयोग और गहरा करने की आवश्यकता है। डॉ. सूद नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय राउंड टेबल सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं।

उन्होंने कहा कि भारत और यूरोप न केवल समान लोकतांत्रिक मूल्यों को साझा करते हैं, बल्कि एक-दूसरे की क्षमताओं के पूरक भी हैं। प्रौद्योगिकी शासन (Tech Governance), डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करके नवाचार और समावेशी विकास के नए रास्ते खोले जा सकते हैं।

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अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिग्गज राजनयिकों ने किया मंथन

यह महत्वपूर्ण सम्मेलन 'CMI – ए पीस फाउंडेशन ऑफ यूरेशिया' द्वारा 'मोवास्टाकॉन' के सहयोग से आयोजित किया गया था। सुज़ाना लेप्पाकोर्पी के नेतृत्व में हुए इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय संवाद और सामरिक सहयोग को मजबूत करना था।

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डॉ. मोनिका सूद ने इस प्रतिष्ठित कूटनीतिक मंच को यूक्रेन के पूर्व विदेश मंत्री पाव्लो क्लिमकिन, स्लोवेनिया के राजदूत एच.ई. टोमाज मेंसिन, यूक्रेन के राजदूत एच.ई. डॉ. ओलेक्सांद्र पोलिशचुक और लातविया गणराज्य की डिप्टी हेड ऑफ मिशन इंगा स्क्रूज़माने के साथ साझा किया। इस दौरान विभिन्न देशों के नीति विशेषज्ञों और रणनीतिक विश्लेषकों ने भारत-यूरोप साझेदारी से वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की।

तकनीकी और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग पर जोर

प्रसिद्ध भू-राजनीतिक विश्लेषक और नवजीवन ग्रुप की सीईओ डॉ. सूद ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, तकनीकी बदलाव और आर्थिक अनिश्चितता जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भारत-यूरोप की भूमिका निर्णायक हो सकती है। उन्होंने कहा कि दोनों क्षेत्रों के बीच गहरी साझेदारी से ऐसी जिम्मेदार तकनीक और आर्थिक ढांचे विकसित किए जा सकते हैं, जो पूरी दुनिया के लिए लाभकारी साबित होंगे।

सम्मेलन में मुख्य रूप से नवीकरणीय ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकी (Green Tech), मजबूत आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और डिजिटल अवसंरचना जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। वक्ताओं ने माना कि साझा पहल से न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में तेजी आएगी, बल्कि आर्थिक विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे। अंत में सभी विशेषज्ञों ने इस बात पर सहमति जताई कि आने वाले दशकों में वैश्विक नेतृत्व और आर्थिक स्थिरता को आकार देने में भारत-यूरोप का सहयोग और भी महत्वपूर्ण होता जाएगा।

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