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Sikh Regimental Glory : ‘हर काम देश के नाम’ : सिख रेजिमेंट की सात बटालियनों को एक साथ प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान

पंजाब के युवाओं से आह्वान : वर्दी पहनिए, परंपरा निभाइए, देश का मान बढ़ाइए

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Sikh Regimental Glory : भारतीय सेना की शान मानी जाने वाली सिख रेजिमेंट ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि शौर्य, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति उसकी पहचान ही नहीं, बल्कि उसकी जीवन शैली है। अग्रिम मोर्चों से लेकर संचालनात्मक चुनौतियों तक, सिख रेजिमेंट ने हर दौर में अपने अद्वितीय प्रदर्शन से भारतीय सेना की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का इतिहास रचा है। जनवरी 2026 में मिले प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान इस गौरवशाली विरासत में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ते हैं।

वेस्टर्न कमांड के प्रवक्ता के अनुसार, सिख रेजिमेंट की कुल सात बटालियनों को थल सेनाध्यक्ष और आर्मी कमांडर स्तर के प्रशस्ति एवं प्रशंसा पत्र प्रदान किए गए। इनमें दो बटालियनों को थल सेनाध्यक्ष यूनिट प्रशस्ति पत्र, एक बटालियन को थल सेनाध्यक्ष यूनिट प्रशंसा पत्र और चार बटालियनों को आर्मी कमांडर यूनिट प्रशंसा पत्र से सम्मानित किया गया। एक ही अवसर पर इतनी बड़ी संख्या में बटालियनों का सम्मानित होना न केवल असाधारण है, बल्कि रेजिमेंट की निरंतर उत्कृष्टता का भी प्रमाण है।

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पहले भी रचा है कीर्तिमान

यह पहली बार नहीं है जब सिख रेजिमेंट ने यह गौरव हासिल किया हो। जनवरी 2015 में भी रेजिमेंट की छह बटालियनों को उनके अनुकरणीय सेवाभाव और उत्कृष्ट सैन्य प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया था। वर्षों के अंतराल पर दोहराई गई यह उपलब्धि दर्शाती है कि सिख रेजिमेंट की सफलता किसी संयोग का परिणाम नहीं, बल्कि मजबूत परंपरा और कठोर प्रशिक्षण की देन है।

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गुरुओं की दी हुई योद्धा विरासत

सिख रेजिमेंट की वीरता की जड़ें सिख इतिहास में गहराई से समाई हैं। छठे गुरु गुरु हरगोबिंद साहिब द्वारा स्थापित मीरी पीरी की परंपरा और दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह द्वारा दी गई खालसा की अमर संकल्पना ने साहस, अनुशासन और बलिदान को सिख योद्धाओं का धर्म बना दिया। यही मूल्य आज भी सिख सैनिकों को हर परिस्थिति में अडिग रखते हैं।

पंजाब के युवा, रेजिमेंट की असली ताकत

सिख रेजिमेंट की आत्मा पंजाब के युवाओं में बसती है, जो पीढ़ियों से चली आ रही योद्धा परंपरा को गर्व के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। कुछ मानव संसाधन संबंधी चुनौतियों के बावजूद रेजिमेंट ने अपने उच्च प्रदर्शन मानकों से कभी समझौता नहीं किया। यही कारण है कि सिख रेजिमेंट आज भी भारतीय सेना की सबसे भरोसेमंद पैदल सेना रेजिमेंटों में शुमार है। पंजाबी रगों में बहने वाला योद्धा भाव सेना की सेवा के माध्यम से अपने सर्वोच्च स्वरूप को प्राप्त करता है। सिख रेजिमेंट उसी शौर्य का जीवंत प्रतीक है, जहां हर कदम, हर संघर्ष और हर बलिदान का एक ही मंत्र है, ‘हर काम देश के नाम’।

युवाओं से आह्वान, वर्दी में गर्व का जीवन

सिख रेजिमेंट पंजाब के युवाओं से आह्वान करती है कि वे आगे आएं, सेना में शामिल हों और अपने परिवार व प्रदेश का नाम रोशन करें। इस रेजिमेंट में सेवा करना न केवल सम्मान की बात है, बल्कि एक सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य का मार्ग भी है। रेजिमेंट के अनेक सैनिकों ने जूनियर कमीशंड अधिकारी से लेकर कमीशंड अधिकारी तक के पदों पर पहुंचकर नेतृत्व और कर्तव्यनिष्ठा के उदाहरण स्थापित किए हैं। सेना उन्हें तकनीक, खेलकूद और आत्म विकास के व्यापक अवसर भी प्रदान करती है।

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