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Digital Fraud Case : साइबर ठगी का सनसनीखेज खुलासा... वीडियो कॉल पर पुलिस बनकर आए और उड़ा ले गए बुजुर्ग की उम्र भर की कमाई

चंडीगढ़ पुलिस ने गुजरात से दबोचे 3 शातिर ठग

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Chandigarh Digital Fraud Case : जरा सोचिए, आप अपने घर में आराम से बैठे हैं और अचानक आपके फोन पर एक वीडियो कॉल आता है। सामने पुलिस की वर्दी पहने एक शख्स कहता है कि आपका नाम किसी बड़े जुर्म में आया है और आप 'डिजिटल अरेस्ट' हैं। डर के मारे आप अपनी मेहनत की कमाई उसके बताए खाते में डाल देते हैं। चंडीगढ़ के एक बुजुर्ग के साथ ठीक ऐसा ही हुआ, जिनसे शातिर ठगों ने 46 लाख रुपये ठग लिए। लेकिन अब चंडीगढ़ पुलिस के साइबर सेल ने इस गिरोह की कमर तोड़ दी है और गुजरात के गांधीधाम से तीन आरोपियों को दबोच लिया है।

दिसंबर से अप्रैल तक चला 'डिजिटल' शिकार

यह कहानी शुरू हुई थी दिसंबर 2025 में, जब एक बुजुर्ग को जालसाजों ने अपना शिकार बनाया। ठगों ने बुजुर्ग को इतना डरा दिया कि उन्होंने टुकड़ों में कुल 46 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में जमा कर दिए। जब तक पीड़ित को अहसास हुआ कि उनके साथ खेल हो गया है, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इसके बाद 7 मार्च 2026 को साइबर थाना, सेक्टर-17 में मामला दर्ज किया गया और एसपी साइबर गीतांजलि खंडेलवाल के नेतृत्व में एक टीम आरोपियों के सुराग तलाशने में जुट गई।

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गांधीधाम के ‘कमीशन एजेंट’ चढ़े पुलिस के हत्थे

साइबर सेल की टीम ने जब तकनीकी कड़ियों को जोड़ा, तो तार गुजरात के गांधीधाम से जुड़े मिले। पुलिस टीम ने वहां छापेमारी कर रमेश अजय भाई, योगेश देवजी माहेश्वरी और हितेश नारण बोरिचा को गिरफ्तार किया।

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ठगी का पूरा गणित:

कमीशन का लालच: पकड़े गए आरोपी असल में 'खाता प्रदाता' थे। वे मुख्य ठगों (जैसे अहमदाबाद के रफीक भाई) को कमीशन के बदले अपने बैंक खाते मुहैया कराते थे।

रकम का बंटवारा: अकेले रमेश के खाते में ही ठगी के 15 लाख रुपये आए थे, जिन्हें तुरंत अन्य खातों में ट्रांसफर कर निकाल लिया गया।

ट्रांजिट रिमांड: पुलिस इन तीनों को गुजरात से ट्रांजिट रिमांड पर चंडीगढ़ लेकर आई। फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में हैं।

क्या है डिजिटल अरेस्ट?

यह साइबर ठगी का एक नया तरीका है जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या कस्टम अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं। वे पीड़ित को डराते हैं कि वे एक ऑनलाइन निगरानी (अरेस्ट) में हैं और उन्हें तब तक कैमरा बंद नहीं करने दिया जाता जब तक वे पैसे नहीं दे देते।

पुलिस की चेतावनी: आपका एक डर ठगों की ताकत है

चंडीगढ़ पुलिस ने इस गिरफ्तारी के साथ ही शहरवासियों के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की है। पुलिस का कहना है कि डरने के बजाय जागरूक बनना ही सबसे बड़ा बचाव है।

वर्दी देखकर न डरें: कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर पैसे नहीं मांगती और न ही किसी को फोन पर 'अरेस्ट' करती है।

आधार कार्ड का सुरक्षा कवच: एम-आधार (m-Aadhaar) ऐप पर जाकर अपना बायोमेट्रिक डेटा लॉक कर दें ताकि कोई उसका गलत इस्तेमाल न कर सके।

अनजान कॉल से तौबा: व्हाट्सएप पर अनजान नंबर से आने वाले वीडियो कॉल को उठाने से बचें और अपनी प्राइवेसी सेटिंग बदलें।

फौरन करें कॉल: यदि कोई आपको डराता है, तो तुरंत 1930 पर संपर्क करें। यह नंबर साइबर ठगों के खिलाफ आपका सबसे बड़ा हथियार है।

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