'दहेज को कहें ना'... चंडीगढ़ कॉलेज में जागरूकता सत्र, छात्रों को बताई गई ये अहम बात
विद्यार्थियों को लैंगिक समानता, महिलाओं के अधिकारों और कानूनी जागरूकता के प्रति किया प्रेरित
पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज, सेक्टर-11 की जेंडर इक्विटी एंड सेल्फ डिफेंस सोसाइटी ने इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल के सहयोग से 29 सितंबर को ‘दहेज को कहें ना’ विषय पर जागरूकता सत्र आयोजित किया। दोपहर 12 बजे शुरू हुए कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को दहेज प्रथा से जुड़ी सामाजिक बुराइयों के प्रति जागरूक करना और लैंगिक समानता को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. जितेंद्र गोंड ने की। सत्र के दौरान दहेज प्रथा के व्यक्ति, परिवार और समाज पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर चर्चा की गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि दहेज आर्थिक दबाव, लैंगिक भेदभाव, उत्पीड़न और महिलाओं के साथ असमान व्यवहार को बढ़ावा दे सकता है। इस दौरान दहेज को विवाह का आवश्यक हिस्सा या सामाजिक परंपरा मानने की सोच को बदलने पर जोर दिया गया।
महिलाओं के अधिकारों और सम्मान पर दिया जोर
कार्यक्रम में महिलाओं के अधिकारों, सम्मान और कानूनी जागरूकता के महत्व को रेखांकित किया गया। विद्यार्थियों को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझने तथा भेदभावपूर्ण प्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही, युवा पीढ़ी की सामाजिक कुरीतियों को चुनौती देने और सकारात्मक बदलाव लाने में भूमिका पर चर्चा हुई।
समानता पर आधारित हो विवाह
सत्र में संदेश दिया गया कि विवाह आपसी सम्मान, समानता, समझ और सहमति पर आधारित होना चाहिए, न कि धन या वस्तुओं की मांग पर। विद्यार्थियों से अपने परिवारों और समुदायों में दहेज के खिलाफ जागरूकता फैलाने तथा भेदभाव से मुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक संदेश ‘दहेज कोई परंपरा नहीं है।
समानता हमारा अधिकार है।’ के साथ हुआ। आयोजकों ने कहा कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों को संवेदनशील बनाने और समान एवं सम्मानजनक समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

