संजय टंडन ने उठाया DC Rate, दिहाड़ी मजदूरों का मुद्दा: कहा- वेतन में देरी से परिवारों पर संकट, तय कैलेंडर लागू हो
वरिष्ठ भाजपा नेता संजय टंडन ने पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखकर संविदा, आउटसोर्स, डीसी रेट, दिहाड़ी और गैर-नियमित कर्मचारियों को समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का आग्रह किया
वरिष्ठ भाजपा नेता संजय टंडन ने पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से चंडीगढ़ में काम कर रहे संविदा, आउटसोर्स, डीसी रेट, दिहाड़ी और अन्य गैर-नियमित कर्मचारियों को समय पर वेतन और मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए उचित निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।
प्रशासक को लिखे पत्र में टंडन ने कहा कि उन्हें कई प्रतिनिधिमंडलों और लोगों की ओर से हर महीने वेतन और मजदूरी मिलने में देरी को लेकर शिकायतें मिली हैं। उन्होंने कहा कि यह समस्या सीधे विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों के साथ-साथ अधिकृत ठेकेदारों और आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से काम करने वाले कर्मचारियों को भी प्रभावित करती है।
टंडन ने कहा कि प्रभावित कर्मचारियों में संविदा पर कार्यरत शिक्षक और सहायक कर्मचारी, सफाई और हाउसकीपिंग कर्मचारी, सुरक्षा कर्मचारी, डाटा एंट्री और कार्यालय सहायक कर्मचारी, ड्राइवर, तकनीकी और कुशल कर्मचारी, फील्ड कर्मचारी, हेल्पर तथा अन्य जरूरी सार्वजनिक सेवाएं देने वाले कर्मचारी शामिल हैं।
टंडन ने कहा, “संविदा, आउटसोर्स, डीसी रेट और अन्य गैर-नियमित व्यवस्था के तहत काम करने वाले कर्मचारी हर दिन चंडीगढ़ की सार्वजनिक सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने में योगदान दे रहे हैं। उनकी मजदूरी केवल सरकारी प्रक्रिया का एक हिस्सा नहीं है, बल्कि कई परिवारों के लिए घर के जरूरी खर्च पूरे करने का यही मुख्य साधन है।”
उन्होंने कहा कि मिली शिकायतों के अनुसार कुछ मामलों में कर्मचारियों को तय और निश्चित समय पर भुगतान नहीं किया जाता तथा उन्हें अगले महीने की शुरुआत के बाद तक भी वेतन का इंतजार करना पड़ता है। टंडन ने कहा कि लंबे समय तक वेतन में देरी से उन कर्मचारियों के सामने आर्थिक परेशानियां खड़ी हो सकती हैं, जिनके ऊपर किराया, भोजन, बच्चों की पढ़ाई, इलाज और आने-जाने जैसे नियमित खर्च होते हैं।
पत्र में टंडन ने प्रशासक से एक ऐसी समान और समयबद्ध व्यवस्था बनाने पर विचार करने का आग्रह किया है, जिसके तहत सभी पात्र संविदा और अन्य गैर-नियमित कर्मचारियों को लागू सेवा, वित्तीय और संविदा नियमों के अनुसार अगले महीने की 7 तारीख तक वेतन या मजदूरी मिल सके।
उन्होंने कहा, “प्रशासन एक तय मासिक वेतन भुगतान कैलेंडर लागू करके व्यवस्था में अधिक निश्चितता ला सकता है। वेतन और मजदूरी के बिल तय समय सीमा के भीतर तैयार, जांचे और प्रक्रिया में लाए जाने चाहिए, ताकि सरकारी प्रक्रिया या प्रशासनिक देरी का बोझ कर्मचारियों पर न पड़े।”
वरिष्ठ भाजपा नेता ने सुझाव दिया कि जहां उपस्थिति, सेवा रिकॉर्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज उपलब्ध हों, वहां विभागों को हर महीने के अंत से पहले वेतन और मजदूरी से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी कर लेनी चाहिए। ठेकेदारों या आउटसोर्स एजेंसियों से जुड़े मामलों में संबंधित विभागों को तय संविदा नियमों के तहत कर्मचारियों को समय पर मजदूरी मिलने की निगरानी करनी चाहिए।
टंडन ने देरी से होने वाले भुगतान की पहचान करने और उसका जल्द समाधान सुनिश्चित करने के लिए विभागवार निगरानी व्यवस्था बनाने का भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि जहां भी कर्मचारियों की जायज बकाया राशि लंबित है, उसका जल्द से जल्द भुगतान किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “एक स्पष्ट शिकायत व्यवस्था भी होनी चाहिए, जिसके माध्यम से कोई कर्मचारी वेतन न मिलने या देरी से मिलने की शिकायत कर सके और उसे बार-बार अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। भुगतान प्रक्रिया में जवाबदेही और पारदर्शिता से कर्मचारियों को जरूरी आर्थिक निश्चितता मिलेगी।”
टंडन ने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था में यूटी प्रशासन के अधीन आने वाले विभागों, बोर्डों, निगमों, संस्थानों और अन्य प्रतिष्ठानों में काम कर रहे पात्र कर्मचारियों को लागू नियमों के अनुसार शामिल किया जाना चाहिए।
उन्होंने विश्वास जताया कि प्रशासक के हस्तक्षेप से बड़ी संख्या में कर्मचारियों को राहत मिलेगी और चंडीगढ़ में सार्वजनिक सेवाओं की व्यवस्था और मजबूत होगी।

