Punjab Politics : राज्यसभा से रवनीत बिट्टू का पत्ता कटा, सीएम भगवंत मान की भविष्यवाणी हुई सच
पंजाब की राजनीति
Punjab Politics : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का वह दावा सच साबित हो गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू जल्द ही सांसद नहीं रहेंगे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा राज्यसभा चुनाव के लिए जारी की गई नई सूची में बिट्टू को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया गया है। इससे उनके संसदीय सफर में अचानक बड़ा बदलाव आया है।
मान का मंत्री पद छिनने का भी है दावा
सीएम भगवंत मान ने अपने एक हालिया ट्वीट में न केवल बिट्टू के सांसद न रहने की बात कही थी, बल्कि यह भी भविष्यवाणी की थी कि वे जल्द ही "मंत्री नहीं रहेंगे"। आगामी हफ्तों में संभावित केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल के बीच, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मान का दूसरा दावा कितना सटीक बैठता है। पूर्व सीएम बेअंत सिंह के पोते रवनीत सिंह बिट्टू 2024 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। उन्हें पंजाब में पार्टी के एक प्रमुख सिख चेहरे के रूप में देखा जा रहा था, जो राज्य में भाजपा का जनाधार बढ़ाने में सक्षम थे।
भाजपा के फैसलों से मिले-जुले संकेत
बिट्टू को राज्यसभा से बाहर रखने के फैसले ने पंजाब में भाजपा की सिख रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, पार्टी हाईकमान ने पंजाब को लेकर मिले-जुले संकेत दिए हैं। एक तरफ पार्टी ने वरिष्ठ सिख नेता केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब भाजपा का नया अध्यक्ष बनाकर उनका कद बढ़ाया है, तो दूसरी तरफ बिट्टू जैसे बड़े सिख चेहरे को राज्यसभा सूची से बाहर कर दिया है।
कुछ महीने पहले तक, 2025 में बाढ़ राहत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पंजाब से केवल बिट्टू ही नजर आए थे। राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें उस समय काफी तवज्जो मिली थी, लेकिन ढिल्लों की नियुक्ति के बाद पार्टी के अंदरूनी समीकरण बदलते दिख रहे हैं। राज्यसभा के मोर्चे पर लगे इस झटके के बावजूद, बिट्टू ने स्पष्ट किया है कि वह 2027 में पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। यह उनके राष्ट्रीय राजनीति से वापस राज्य की जमीनी राजनीति में लौटने का सीधा संकेत है।
राहुल गांधी से विवाद रहा था सुर्खियों में
बिट्टू का राजनीतिक सफर हाल ही में कांग्रेस के साथ तल्खी के कारण भी चर्चा में रहा है। कांग्रेस छोड़ने के बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उन्हें "गद्दार" कहा था। दोनों नेताओं के बीच यह विवाद तब और बढ़ गया जब एक सार्वजनिक बातचीत के दौरान बिट्टू ने कांग्रेस पर पंजाब के हितों से समझौता करने का आरोप लगाया, जिसके बाद गांधी परिवार की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।
