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PGI चंडीगढ़ की प्रोफेसर डॉ. मधु गुप्ता को प्रतिष्ठित 'धन्वंतरि ओरेशन' अवॉर्ड

विकसित भारत 2047 की राह में टीकों को बताया आर्थिक और सामाजिक उन्नति का आधार

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अवार्ड ग्रहण करतीं प्रोफेसर डॉ. मधु गुप्ता।
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Dhanvantri Oration Award: दादरा एवं नगर हवेली के सिलवासा में आयोजित 'इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन' (IAPSMCON 2026) के 53वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन में पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ की प्रोफेसर डॉ. मधु गुप्ता को देश के चिकित्सा क्षेत्र के सबसे प्रतिष्ठित 'धन्वंतरि ओरेशन' सम्मान से नवाजा गया है। उन्हें यह सम्मान दमन-दीव, दादरा-नगर हवेली और लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल ने प्रदान किया।

इस अवसर पर डॉ. गुप्ता ने 'विकसित भारत 2047: टीकों का विकास से प्रभावशीलता तक योगदान' विषय पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीकाकरण केवल बीमारी से बचाव नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक न्याय को मजबूती देने वाला एक सशक्त निवेश है।

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प्रोफेसर डॉ. मधु गुप्ता।
प्रोफेसर डॉ. मधु गुप्ता।

टीकाकरण की सफलता: 4 से बढ़कर 12 हुई टीकों की संख्या

डॉ. मधु गुप्ता ने अपने संबोधन में भारत के टीकाकरण अभियान की ऐतिहासिक यात्रा का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 1978 में शुरू हुए 'यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम' (UIP) में तब केवल चार टीके शामिल थे, जो साल 2026 तक बढ़कर 12 हो चुके हैं। भारत ने चेचक, पोलियो और नवजात टिटनस जैसी जानलेवा बीमारियों को जड़ से खत्म कर एक मिसाल कायम की है। आंकड़ों के अनुसार, डीपीटी3 (DPT3) का कवरेज जो साल 2000 में मात्र 58 प्रतिशत था, वह 2024 में शानदार वृद्धि के साथ 94 प्रतिशत पर पहुंच गया है।

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डिजिटल क्रांति: 'कोविन' से 'एआई' तक भविष्य की तैयारी

डॉ. मधु गुप्ता ने आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की भूमिका को गेम-चेंजर बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने कोविड-19 के दौरान दुनिया को दिखाया कि कैसे तकनीक के जरिए करोड़ों लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं। 'कोविन' (CoWIN) और 'यू-विन' (U-WIN) जैसे डिजिटल माध्यमों ने न केवल टीकाकरण को पारदर्शी बनाया, बल्कि इसकी पहुंच को भी सुलभ किया।

भविष्य के लिए प्रस्तावित रोडमैप

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): डॉ. गुप्ता ने सुझाव दिया कि वैक्सीन के विकास और शोध में एआई (AI) का समावेश भविष्य की महामारियों से निपटने में तेजी लाएगा।

वयस्क टीकाकरण पर जोर: अब केवल बच्चों तक सीमित न रहकर, वयस्कों और बुजुर्गों के लिए भी मजबूत टीकाकरण नीति की आवश्यकता है।

लाइफ-कोर्स अप्रोच: जन्म से लेकर बुढ़ापे तक स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'लाइफ-कोर्स इम्यूनाइजेशन' मॉडल को अपनाने पर बल दिया।

पीजीआई का वैश्विक योगदान: रोटावायरस, टाइफाइड, खसरा-रुबेला और एचपीवी (सर्वाइकल कैंसर) जैसे टीकों के ट्रायल और सुरक्षा निगरानी में पीजीआई चंडीगढ़ की भूमिका की सराहना की।

वैक्सीन सामाजिक न्याय का साधन

डॉ. मधु गुप्ता ने कहा कि वैक्सीन सामाजिक न्याय का साधन हैं। 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के सपने को पूरा करने के लिए टीकाकरण में निरंतर निवेश और आधुनिक तकनीक का समावेश अनिवार्य है।

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