Chandigarh Bank News : लॉकर की चाबी ग्राहक के पास, अंदर से जेवर पार: पीएनबी की इस बड़ी लापरवाही पर देना होगा 1 करोड़ का हर्जाना
चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग की बड़ी कार्रवाई; बिना बताए लॉकर तोड़कर दूसरे को आवंटित करना बैंक को पड़ा भारी
Chandigarh Bank News : क्या आपका कीमती सामान बैंक लॉकर में सुरक्षित है ? चंडीगढ़ से सामने आए एक चौंकाने वाले मामले ने इस पर सवालिया निशान लगा दिया है। चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) को सेवा में गंभीर लापरवाही का दोषी पाते हुए एक महिला को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का ऐतिहासिक आदेश सुनाया है। बैंक ने न केवल महिला के लॉकर से जेवर गायब किए, बल्कि बिना किसी सूचना के उनका लॉकर किसी और को आवंटित भी कर दिया।
बैंक अधिकारियों ने लॉकर खोलने से किया साफ इनकार
सेक्टर 9-बी की निवासी बेला प्रसाद के साथ यह घटना तब शुरू हुई जब वह साल 2020 में अपना लॉकर (नंबर 37) ऑपरेट करने बैंक पहुंचीं। वह उस वक्त दंग रह गईं जब बैंक अधिकारियों ने उन्हें लॉकर एक्सेस देने से मना कर दिया। बैंक का कहना था कि यह लॉकर पहले ही बंद किया जा चुका है और किसी दूसरे ग्राहक को दिया जा चुका है।
हैरानी की बात यह थी कि लॉकर की मूल चाबी (नंबर 95) अभी भी बेला प्रसाद के पास ही थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने कभी भी लॉकर बंद करने का अनुरोध नहीं किया था। उनका करीब 1.5 करोड़ रुपये का जेवर उस लॉकर में था, जो बैंक की इस 'मनमानी' की भेंट चढ़ गया।
बैंक की दलीलें आयोग के सामने नहीं टिक पाईं
जब मामला आयोग पहुंचा, तो पीएनबी ने अपने बचाव में आंतरिक रिकॉर्ड पेश किए। बैंक का दावा था कि लॉकर नंबर 37 को नवंबर 2013 में ही सरेंडर कर दिया गया था और 2019 में इसे कानूनी प्रक्रिया के तहत तोड़ा गया। हालांकि, जब आयोग ने बैंक से सबूत मांगे, तो बैंक की पोल खुल गई।
आयोग ने पाया कि बैंक के पास ऐसा कोई दस्तावेज नहीं था जिससे यह साबित हो सके कि लॉकर तोड़ने से पहले ग्राहक को कोई नोटिस दिया गया था। साथ ही, लॉकर तोड़ते समय स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी और सामान की लिस्ट (इन्वेंट्री) बनाने के अनिवार्य नियमों का भी पालन नहीं किया गया था।
आयोग की फटकार: बैंक की जवाबदेही तय
आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि लॉकर प्रबंधन के मामले में बैंकों की जिम्मेदारी बहुत अधिक होती है। आयोग ने कहा, "केवल बैंक रिकॉर्ड पेश करना काफी नहीं है, जब तक कि सुरक्षा मानकों का पालन न किया गया हो।"
बैंक की इस कोताही को 'सेवा में भारी कमी' मानते हुए आयोग ने पीएनबी को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ता को जेवरों के नुकसान के बदले 1,00,00,000 (1 करोड़) रुपये का भुगतान करे। इसके अलावा, महिला को हुई मानसिक प्रताड़ना और कानूनी लड़ाई के खर्च के तौर पर 1 लाख रुपये अलग से देने का निर्देश दिया गया है।

