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पीजीआई का नया मिशन : अब एक ही छत के नीचे होंगे सभी अंग प्रत्यारोपित

जल्द साकार होगा 'ट्रांसप्लांट सेंटर' का सपना, संस्थान खरीदेगा तीसरा रोबोट

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चंडीगढ़ में 'इंडियन सोसाइटी ऑफ ट्रांसप्लांट सर्जन्स' के दूसरे वार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल। -ट्रिन्यू
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पीजीआई अब केवल इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि अंग प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट) के क्षेत्र में देश का एक बड़ा हब बनने जा रहा है। संस्थान के निदेशक प्रोफेसर विवेक लाल ने शनिवार को एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि पीजीआई में जल्द ही एक 'समर्पित ट्रांसप्लांट सेंटर' हकीकत बनेगा। यह केंद्र न केवल आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा, बल्कि एक ही छत के नीचे मरीजों को अंगों के प्रत्यारोपण की तमाम सुविधाएं मुहैया कराएगा।​प्रोफेसर लाल पीजीआई में आयोजित 'इंडियन सोसाइटी ऑफ ट्रांसप्लांटेशन' के वार्षिक सम्मेलन 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में अलग-अलग विभागों द्वारा किए जा रहे ट्रांसप्लांट कार्यों को अब एक सूत्र में पिरोया जाएगा, जिससे मरीजों की प्रतीक्षा सूची कम होगी और बेहतर नतीजे मिलेंगे।

​डायलिसिस का दर्द और प्रत्यारोपण की गरिमा

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​ निदेशक प्रो. विवेक लाल ने अपने संबोधन में चिकित्सा विज्ञान और मानवीय संवेदनाओं को जोड़ते हुए कहा कि डायलिसिस एक बेहद कठिन अनुभव है। इसे लिखना आसान है, लेकिन मरीज के लिए इसे सहना उतना ही मुश्किल। उन्होंने कहा कि ट्रांसप्लांट केवल एक सर्जरी नहीं है, बल्कि यह मरीज को उसका सम्मान और जीने की नई उम्मीद वापस लौटाता है। उन्होंने युवा सर्जनों को याद दिलाया कि वे पहले एक अच्छे इंसान और कुशल सर्जन बनें, क्योंकि ट्रांसप्लांट अनुशासन और अटूट समर्पण की मांग करता है।

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रोबोटिक सर्जरी से बढ़ेगी रफ्तार

​ रीनल ट्रांसप्लांट विभाग के प्रमुख प्रो. आशीष शर्मा ने रोबोटिक सर्जरी की बारीकियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पीजीआई अब तक महज 10 बेड के सीमित संसाधनों के बावजूद 5600 ट्रांसप्लांट का रिकॉर्ड बना चुका है। वर्तमान में पीजीआई के पास दो रोबोट उपलब्ध हैं और जल्द ही संस्थान तीसरा रोबोट भी खरीदने जा रहा है। तीसरा रोबोट आने के बाद सर्जरी की रफ्तार पकड़ लेगी और एक ही समय में अधिक ऑपरेशन किए जा सकेंगे। रोबोटिक तकनीक से किडनी ट्रांसप्लांट बेहद सटीक होता है और मरीज की रिकवरी भी तेजी से होती है।

दिग्गजों का हुआ सम्मान

​ प्रो. लाल ने कहा कि दुनिया का पहला रिकॉर्डेड ट्रांसप्लांट महर्षि सुश्रुत ने किया था। इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए पीजीआई अब सिमुलेशन सुविधाओं के साथ नई पीढ़ी के सर्जनों को तैयार करेगा। सम्मेलन में उन दिग्गजों को भी सम्मानित किया गया जिन्होंने संसाधनों की कमी के बावजूद देश में ट्रांसप्लांट की नींव रखी। इनमें एम्स से प्रो. एस.एन. मेहता, पीजीआई से प्रो. मुकुट मिंज और मुंबई से डॉ. वत्सला त्रिवेदी शामिल रहीं। डॉ. त्रिवेदी ने लिंग भेद की पुरानी धारणाओं को तोड़कर देश के पहले 'मृत दाता' ( अंगदान की शुरुआत करने के अपने संघर्ष को साझा किया।

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