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PGI Chandigarh में 12वां 'रिसर्च डे' कल : 59 नवाचारों की लगेगी प्रदर्शनी, 3 भटनागर पुरस्कार विजेता डॉक्टरों का होगा सम्मान

पीजीआईएमईआर का 12वां अनुसंधान दिवस : एम्स नई दिल्ली के डीन प्रो. निखिल टंडन 'डॉक्टर की दुविधा' पर करेंगे मंथन; एक साल में 143 करोड़ रुपये की रिसर्च फंडिंग के साथ पीजीआई ने लगाई बड़ी छलांग।

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PGI Innovation Exhibition  : मरीजों के बेहतरीन इलाज के साथ-साथ चिकित्सा जगत में नई तकनीकों की खोज के लिए मशहूर पीजीआई चंडीगढ़  में शनिवार सात मार्च को 12वां वार्षिक अनुसंधान दिवस (रिसर्च डे) मनाया जा रहा है। इस मौके पर स्वास्थ्य सेवा की दिशा बदलने वाले 59 नए इनोवेटिव (नवाचार) प्रोजेक्ट्स की खास प्रदर्शनी लगाई जाएगी। सुबह 9 बजे NINE ऑडिटोरियम में शुरू होने वाले इस आयोजन में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के डीन प्रो. निखिल टंडन बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगे।

रिसर्च फंडिंग में 143 करोड़ की शानदार छलांग

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पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने बताया कि संस्थान ने रिसर्च के क्षेत्र में एक नया मुकाम हासिल किया है। 1 अप्रैल 2025 से 5 मार्च 2026 के बीच पीजीआई को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से लगभग 143 करोड़ रुपये का फंड मिला है, जो पिछले साल (2024-25) 129.7 करोड़ रुपये था। वर्तमान में क्लिनिकल, सर्जिकल और बेसिक साइंस से जुड़े 827 रिसर्च प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 573 था। इसके अलावा 101 इंट्राम्यूरल (संस्थान के आंतरिक) प्रोजेक्ट भी जारी हैं।

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देश के जाने-माने एंडोक्रिनोलॉजिस्ट प्रो. निखिल टंडन इस मौके पर "वियरिंग टू हैट्स: डॉक्टर्स डिलेमा" (दोहरी जिम्मेदारी: डॉक्टर की दुविधा) विषय पर अपना विशेष व्याख्यान देंगे। वे इस बात पर रोशनी डालेंगे कि कैसे एक डॉक्टर को दिन भर मरीजों की भारी भीड़ देखने के साथ-साथ नई बीमारियों के बेहतर इलाज खोजने (रिसर्च) के बीच एक मुश्किल संतुलन बनाना पड़ता है।

35 सर्वश्रेष्ठ शोध और 3 भटनागर पुरस्कार विजेताओं का सम्मान

कार्यक्रम में उन तीन डॉक्टरों को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा, जिन्हें उत्कृष्ट वैज्ञानिक योगदान के लिए देश का प्रतिष्ठित 'शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार' मिल चुका है। इनमें पल्मोनरी मेडिसिन के प्रो. रितेश अग्रवाल (2020), बाल रोग विभाग के प्रो. जितेंद्र कुमार साहू (2024 विज्ञान युवा पुरस्कार) और प्रो. सुरेश कुमार (2025) शामिल हैं। प्रो. सुरेश ने आईसीयू में गंभीर रूप से बीमार बच्चों के लिए 'प्रोबायोटिक्स' के जीवन रक्षक प्रभाव पर अहम शोध कर यह सम्मान हासिल किया है।

इसके साथ ही, इस साल मूल्यांकन के लिए आए कुल 329 रिसर्च पब्लिकेशन में से 35 सबसे बेहतरीन शोधों को मुख्य अतिथि द्वारा अवार्ड देकर सम्मानित किया जाएगा। 59 प्रदर्शित होने वाले नवाचारों में से 7 प्रोजेक्ट अपने एडवांस (उन्नत) चरण में पहुंच चुके हैं, जो भविष्य में मरीजों के इलाज का तरीका पूरी तरह से बदल सकते हैं।

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