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PGI में बकाया वेतन और सुविधाओं को लेकर आंदोलन तेज, 24 घंटे की सामूहिक भूख हड़ताल को व्यापक समर्थन

आंदोलन को उस समय विशेष मजबूती मिली, जब 100 प्रतिशत सैनिटेशन सुपरवाइजर भूख हड़ताल में शामिल हुए

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पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) में संविदा कर्मचारियों की संयुक्त संघर्ष समिति (JAC) द्वारा बुलाई गई 24 घंटे की सामूहिक भूख हड़ताल को बड़ा समर्थन मिला। जेएसी के अनुसार, सैनिटरी अटेंडेंट, सैनिटेशन सुपरवाइजर, हॉस्पिटल अटेंडेंट, बेयरर और कुक्स (सुबह व शाम की शिफ्ट) सहित 80 से 85 प्रतिशत संविदा कर्मचारी इसमें शामिल हुए।

आंदोलन को उस समय विशेष मजबूती मिली, जब 100 प्रतिशत सैनिटेशन सुपरवाइजर भूख हड़ताल में शामिल हुए। जेएसी ने इसे आंदोलन के लिए मनोबल बढ़ाने वाला बताया। साथ ही, हाल ही में जेएसी से अलग हुई सफाई कर्मचारी यूनियन के करीब 50 प्रतिशत पदाधिकारी भी समर्थन में आगे आए।

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सुरक्षा गार्डों पर दबाव के आरोप

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जेएसी का आरोप है कि संविदा सुरक्षा गार्डों और नई ओपीडी में तैनात कर्मचारियों पर प्रशासनिक दबाव और धमकियां दी गईं। इसी कारण केवल 20 प्रतिशत सुरक्षा गार्ड भूख हड़ताल में शामिल हो सके, जबकि लगभग 10 प्रतिशत ने ड्यूटी से अनुपस्थित रहकर विरोध दर्ज कराया। जेएसी ने स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, स्वैच्छिक और लोकतांत्रिक रहा। किसी कर्मचारी पर जबरन भागीदारी का दबाव नहीं डाला गया और किसी भी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।

47वें दिन में प्रवेश, बकाया भुगतान बना मुख्य मुद्दा

संविदा कर्मचारियों की 24 घंटे की चेन भूख हड़ताल मंगलवार को 47वें दिन में प्रवेश कर गई। दोपहर दो बजे से अपर्णा और मंजू ने भूख हड़ताल शुरू की। जेएसी के अनुसार, लंबे समय से लंबित वेतन बकाया, समान कार्य के लिए समान वेतन, महिला संविदा कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश व चिकित्सीय सुविधाएं, बोनस, तथा नवंबर 2024 में हटाए गए चार सुरक्षा गार्डों की बहाली जैसी मांगों पर अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।

संगठन का आरोप है कि पहले दिए गए लिखित आश्वासन भी लागू नहीं हुए। जेएसी ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 2–3 दिनों में कोई ठोस पहल नहीं होती, तो जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में एक और सामूहिक भूख हड़ताल समेत आगे की रणनीति तय की जाएगी।

प्रशासन का पक्ष: सेवाएं रहीं पूरी तरह सुचारु

आंदोलन के बीच पीजीआई प्रशासन ने कहा है कि बंद और धरना आह्वान के बावजूद मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ा। प्रशासन के अनुसार, पहले से लागू कंटिंजेंसी प्लान के चलते ओपीडी, इनडोर, ऑपरेशन थिएटर, इमरजेंसी, ट्रॉमा और डायग्नोस्टिक सेवाएं सामान्य रहीं। प्रशासन का दावा है कि इस दौरान 8,770 मरीजों को ओपीडी में देखा गया, 166 मरीज इमरजेंसी व ट्रॉमा में पहुंचे, करीब 100 नए मरीज भर्ती किए गए और 137 सर्जरी की गईं।

साथ ही, अधिकांश आउटसोर्स कर्मचारी ड्यूटी पर उपस्थित रहे और उनकी हाजिरी–अनुपस्थिति की विस्तृत रिपोर्ट अलग से तैयार की गई है। इस तरह, पीजीआई में एक ओर संविदा कर्मचारियों का आंदोलन तेज होता दिखा, तो दूसरी ओर प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने का दावा किया।

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