PGI Chandigarh Foundation Day : पीजीआईएमईआर में इलाज का नया दौर, डॉक्टरों की मदद करेगा एआई
3,000 बेड की क्षमता के साथ आगे बढ़ रहा संस्थान; बीएचयू के कुलपति बोले- भारत को अपनी जरूरत के हिसाब से एआई तैयार करना होगा
PGI Chandigarh Foundation Day : छह दशक से अधिक की चिकित्सा सेवा, शिक्षा और शोध की विरासत के बाद पीजीआईएमईआर अब स्वास्थ्य सेवाओं के अगले दौर की तैयारी में जुट गया है। 63वें स्थापना दिवस समारोह में संस्थान के भविष्य की तस्वीर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को अहम भूमिका दी गई। मुख्य अतिथि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि एआई डॉक्टरों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनकी क्षमता बढ़ाकर मरीजों के इलाज को बेहतर बनाने में मदद करेगा। वहीं, संस्थान के दो नए केंद्रों के शुरू होने से इसकी बेड क्षमता 2,200 से बढ़कर 3,000 हो गई है।
एनआईएनई ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में प्रो. चतुर्वेदी ने पीजीआईएमईआर को देश की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थाओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि संस्थान ने स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा और शोध में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। समारोह में आईएमटेक चंडीगढ़ की निदेशक डॉ. अलका राव, पीजीआईएमईआर के पूर्व निदेशक प्रो. योगेश चावला, डीन (एकेडमिक्स) प्रो. संजय जैन, डीन (रिसर्च) प्रो. संजीव हांडा, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट-कम-हेड, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन प्रो. अशोक कुमार और वित्तीय सलाहकार रविंदर सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी, डॉक्टर, नर्सिंग अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
एआई डॉक्टर के लिए सहायक बनेगा
‘एआई इन हेल्थकेयर’ विषय पर बोलते हुए प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि एआई अब केवल नई तकनीक नहीं है। यह स्वास्थ्य सेवाओं, शोध और इलाज से जुड़े फैसलों में तेजी से इस्तेमाल हो रहा है।
उन्होंने कहा कि एआई मरीजों की जांच रिपोर्ट, अस्पताल के रिकॉर्ड और वैज्ञानिक शोध से जरूरी जानकारी कम समय में सामने ला सकता है। इससे डॉक्टरों को मरीज के इलाज के बारे में बेहतर फैसला लेने में मदद मिलेगी। उन्होंने साफ किया कि एआई डॉक्टर की विशेषज्ञता और अनुभव की जगह नहीं लेगा।
प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि एआई की मदद से शोधकर्ता ऐसे सवालों पर भी काम कर सकेंगे, जिनकी जांच पहले बहुत अधिक समय और पैसा मांगती थी। रेडियोलॉजी, दूर-दराज के मरीजों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने और अस्पताल के कामकाज में भी इसका इस्तेमाल बढ़ सकता है। हालांकि, सर्जरी जैसे जटिल शारीरिक कामों में एआई का इस्तेमाल अभी आगे की चुनौती है।
उन्होंने कहा कि मेडिकल शिक्षा में भी बदलाव आएगा। भविष्य में केवल किताबों की बातें याद करना पर्याप्त नहीं होगा। डॉक्टरों को सही फैसला लेने, जानकारी को समझने, सोच-विचार करने और मरीजों से बेहतर संवाद करने पर ज्यादा ध्यान देना होगा।
पश्चिमी आंकड़ों से तैयार एआई भारत के लिए पर्याप्त नहीं
प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि भारत में इस्तेमाल होने वाली एआई तकनीक यहां के मरीजों और बीमारियों की स्थिति को ध्यान में रखकर तैयार होनी चाहिए। पश्चिमी देशों के आंकड़ों पर तैयार सिस्टम भारतीय मरीजों और यहां की स्वास्थ्य जरूरतों को पूरी तरह नहीं समझ सकते।
उन्होंने कहा कि भारत को केवल दूसरे देशों की एआई तकनीक का इस्तेमाल करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। देश को अपनी जरूरत के अनुसार समाधान खुद विकसित करने होंगे।
उन्होंने कहा कि एआई की पहली पीढ़ी ने लोगों को जानकारी खोजने में मदद की। अगली पीढ़ी फैसले लेने में मदद कर रही है और आने वाली पीढ़ी इंसानों को काम करने में भी मदद करेगी।
बढ़ते मरीजों के बीच घट रही प्रतीक्षा सूची : प्रो. विवेक लाल
पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने संस्थान की बढ़ती क्षमता और मरीजों को मिल रही सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने 17 जुलाई को एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर और एडवांस्ड न्यूरोसाइंस सेंटर का उद्घाटन किया था। इन दोनों केंद्रों से संस्थान को 800 बेड मिले हैं। इससे पीजीआईएमईआर की बेड क्षमता 2,200 से बढ़कर 3,000 हो गई है। इन केंद्रों के उद्घाटन की आधिकारिक पुष्टि भी केंद्र सरकार ने की थी।
प्रो. लाल ने कहा कि मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन इलाज के लिए इंतजार करने वाले मरीजों की सूची लगातार कम हो रही है। उन्होंने इसे संस्थान के कामकाज में सुधार का संकेत बताया।
उन्होंने कहा कि पीजीआईएमईआर में मरीजों को बेहतर इलाज कम खर्च में देने पर जोर है। आयुष्मान भारत और अमृत फार्मेसी के जरिये मरीजों को इलाज और सस्ती जेनेरिक दवाओं का लाभ मिल रहा है। इससे गंभीर और लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों के मरीजों को करोड़ों रुपये की बचत हो रही है।
प्रो. लाल ने पीजीआईएमईआर को दुनिया के बेहतरीन संस्थानों में से एक बताते हुए कहा कि मरीजों का भरोसा इसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने माना कि संस्थान में सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है। इसके लिए बुनियादी ढांचे, जांच सुविधाओं, कर्मचारियों और दूसरे स्वास्थ्य संस्थानों के साथ सहयोग को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने बीएचयू के साथ सहयोग जारी रखने की बात कही और जरूरत पड़ने पर हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।
एमओयू से बढ़ेगा पीजीआईएमईआर-बीएचयू सहयोग
पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के बीच एमओयू साइन किया गया है। बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने स्थापना दिवस समारोह के दौरान इस एमओयू की जानकारी दी। इसके माध्यम से दोनों संस्थानों के बीच मेडिकल शिक्षा, शोध और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने का रास्ता तैयार हुआ है।
35 कर्मचारियों को उत्कृष्ट सेवा के लिए सम्मान
स्थापना दिवस समारोह में संस्थान के 35 कर्मचारियों को बेहतर सेवा के लिए सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल, डीन (एकेडमिक्स) प्रो. संजय जैन और डीन (रिसर्च) प्रो. संजीव हांडा के साथ कर्मचारियों को प्रशंसा प्रमाणपत्र और स्मृति चिह्न दिए।
सम्मानित कर्मचारियों में अलेल सिंह नेगी, सुशील कुमार, भूराम सिंह, सते सिंह, प्रताप चंद, दुर्गा सिंह, किरण पाल, विनोद कुमार, धन सिंह, दीपक, सोनू, काली दास, राजिंदर सिंह, सुरिंदर कुमार, परमजीत सिंह, अशोक कुमार, रवजीत सिंह, ललिता अरोड़ा, अश्वनी कुमार, मनदीप सैनी, ओमिंदर कुमार, रजनी गुप्ता, रीता, ज्योति, मनप्रीत कौर, रजनी, राजेश, ललित चंद पंत, सचिन शर्मा, श्वेता, विवेक कुमार, सुरभि शर्मा, सौरभ शर्मा, अंबिका सैनी और आनंद यादव शामिल रहे। डीन (रिसर्च) प्रो. संजीव हांडा ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा। इसके साथ 63वें स्थापना दिवस समारोह का समापन हुआ।

