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PGI Cancer Care Plus : पीजीआई में कैंसर इलाज की नई धारा: अब दवाओं के साथ थाली भी बनेगी ताकत

PGI Cancer Care Plus : कैंसर इलाज की तस्वीर अब धीरे धीरे बदल रही है। कीमोथेरेपी और दवाओं के साथ साथ यह समझ भी मजबूत हो रही है कि मरीज की थाली उसकी ताकत बन सकती है। विश्व कैंसर दिवस...

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PGI Cancer Care Plus : कैंसर इलाज की तस्वीर अब धीरे धीरे बदल रही है। कीमोथेरेपी और दवाओं के साथ साथ यह समझ भी मजबूत हो रही है कि मरीज की थाली उसकी ताकत बन सकती है। विश्व कैंसर दिवस 2026 पर इसी सोच को जमीन पर उतारते हुए पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के डाइटेटिक्स विभाग ने न्यू ओपीडी में डे केयर कीमोथेरेपी मरीजों के लिए विशेष डाइट कैंप आयोजित किया। इस पहल का मकसद पोषण को सहायक भूमिका से निकालकर कैंसर केयर के केंद्र में लाना रहा।

कीमोथेरेपी के हर चरण में डाइट की भूमिका

डाइट कैंप का नेतृत्व कर रहीं डाइटेटिक्स विभाग की प्रमुख और चीफ डाइटिशियन डॉ. नैन्सी साहनी ने मरीजों और देखभालकर्ताओं को कीमोथेरेपी से पहले, दौरान और बाद की डाइट प्लानिंग पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बताया कि पर्याप्त ऊर्जा और प्रोटीन लेने से मरीज इलाज के शारीरिक और मानसिक दबाव को बेहतर ढंग से सह पाते हैं।

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डॉ. साहनी ने कहा कि भूख न लगना, मतली और पाचन संबंधी दिक्कतों के कारण पैदा होने वाली पोषण की कमी को पॉलिमेरिक, मोनोमेरिक और रोग-विशेष ओरल न्यूट्रिशन सप्लीमेंट के माध्यम से सुरक्षित रूप से पूरा किया जा सकता है। उनके मुताबिक पोषण कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं, बल्कि कैंसर थैरेपी का अभिन्न हिस्सा है, जो इम्यूनिटी मजबूत करने और जीवन की गुणवत्ता सुधारने में अहम भूमिका निभाता है।

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उन्होंने कैंसर को लेकर फैली भोजन संबंधी भ्रांतियों पर भी चर्चा की और डर या अप्रमाणित सलाह के आधार पर डाइट सीमित करने से बचने की अपील की। मरीजों को उनकी बीमारी और इलाज की स्थिति के अनुसार प्रमाण आधारित व्यक्तिगत आहार अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

फूड सेफ्टी से लेकर फूड इंटरएक्शन तक

कार्यक्रम में मौजूद विपिन कौशल ने कैंसर देखभाल में फूड सेफ्टी और सस्टेनेबिलिटी के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कैंसर मरीज संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, इसलिए स्वच्छ और सुरक्षित भोजन की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। साथ ही उन्होंने स्थानीय और ताजा खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ भोजन स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प है।

क्लिनिकल दृष्टिकोण रखते हुए पंकज मल्होत्रा ने फूड और दवाओं के बीच संभावित इंटरएक्शन को लेकर सतर्क किया। उन्होंने बताया कि कुछ खाद्य पदार्थ और सप्लीमेंट कीमोथेरेपी की प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकते हैं। उनके अनुसार इलाज के दौरान सही खानपान के फैसले उतने ही जरूरी हैं जितना दवाओं का नियमित और सही सेवन।

व्यक्तिगत काउंसलिंग से व्यवहारिक बदलाव

डाइट कैंप की खास पहचान रही व्यक्तिगत डाइट काउंसलिंग। यहां कीमोथेरेपी साइकिल, अन्य बीमारियों और बेसलाइन न्यूट्रिशनल असेसमेंट के आधार पर मरीजों और परिजनों को टेलरमेड डाइट प्लान दिए गए। इस आकलन में भोजन का सेवन, वजन, बीएमआई, भोजन की पसंद नापसंद, अरुचि और पाचन स्वास्थ्य जैसे पहलुओं को शामिल किया गया, ताकि अस्पताल के बाहर भी डाइट को अपनाना आसान और टिकाऊ रहे।

कैंप के दौरान पौष्टिक ड्रिंक्स और हेल्दी स्नैक्स का वितरण कर पोषण संबंधी सलाह को व्यवहारिक रूप दिया गया। करीब 150 से 200 मरीजों और उनके परिजनों की भागीदारी ने यह साफ किया कि पोषण आधारित कैंसर देखभाल को लेकर जागरूकता लगातार बढ़ रही है।

विश्व कैंसर दिवस पर यह आयोजन पीजीआईएमईआर की समग्र कैंसर केयर सोच को सामने लाता है, जहां इलाज केवल दवाओं तक सीमित नहीं, बल्कि सही जानकारी, संतुलित पोषण और मानवीय संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ता है। संदेश साफ है कि कैंसर से लड़ाई में अब थाली भी उतनी ही अहम भूमिका निभा रही है जितनी दवा।

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