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Panjab University VC : पीयू में दशकों पुरानी परंपरा पर 'ब्रेक', क्या पंजाब की सियासत तय करेगी कुलपति का चेहरा ?

'नारी शक्ति' के हाथ में चयन की कमान, आंदोलनों को झेल चुकीं प्रो. विग के लिए राह नहीं आसान

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Panjab University VC : पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) में क्या दशकों से चली आ रही 'सेकंड टर्म' की परंपरा इस बार इतिहास बन जाएगी ? विश्वविद्यालय के कुलाधिपति (चांसलर) कार्यालय द्वारा नए कुलपति की तलाश के लिए 'सर्च एवं सिलेक्शन कमेटी' के गठन ने इन चर्चाओं को हवा दे दी है। चांसलर बदलते ही पीयू की सत्ता के समीकरण भी पूरी तरह बदल चुके हैं और अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस बार कुलपति की कुर्सी का फैसला पंजाब की आगामी सियासी जमीन को देखकर किया जाएगा।

आमतौर पर पीयू में मौजूदा कुलपति को ही दूसरा कार्यकाल मिलने की रीत रही है, लेकिन नए चांसलर सीपी राधाकृष्णन ने सीधे विस्तार के बजाय नए चेहरे की खोज के लिए पैनल बना दिया है। हालांकि, वर्तमान कुलपति प्रो. रेणु विग को चार महीने का सेवा विस्तार मिला है, लेकिन पैनल का गठन उनके लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

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संघर्षों भरा रहा कार्यकाल, 'अस्थिर' करने की हुईं कोशिशें

प्रो. रेणु विग
प्रो. रेणु विग

प्रो. रेणु विग का कार्यकाल काफी हलचल भरा रहा है। उनके समय में ही पीयू के इतिहास में पहली बार छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी (ABVP) ने जीत दर्ज कर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। हालांकि, उन्हें कड़े विरोध का भी सामना करना पड़ा। विशेष रूप से सीनेट चुनाव को लेकर हुए बड़े आंदोलन के दौरान कट्टरपंथी और वामपंथी ताकतों ने प्रशासन को अस्थिर करने की पूरी कोशिश की, जिसे प्रो. विग ने अपनी कुशलता से संभाला। यही नहीं, कैंपस में संघ और भाजपा नेताओं के दौरों व भाषणों को लेकर भी कई बार छात्र संगठन और पीयू प्रशासन आमने-सामने रहे।

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चांसलर बदलते ही पलटे समीकरण

केंद्र में भले ही सरकार वही है जिसने प्रो. विग को नियुक्त किया था, लेकिन चांसलर के बदलते ही प्रशासनिक हवा का रुख बदल गया है। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की जगह अब सीपी राधाकृष्णन पीयू के चांसलर हैं। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि प्रो. विग की नियुक्ति पूर्व चांसलर के दौर में हुई थी, इसलिए नया नेतृत्व अब नए सिरे से पैनल गठित कर अपनी प्राथमिकताएं तय करना चाहता है।

क्या 'सिख चेहरे' पर दांव खेलेगी भाजपा ?

सियासी हलकों में 'यूनिवर्सिटी बिजनेस स्कूल' (यूबीएस) के प्रोफेसर और वर्तमान में जीएनडीयू के कुलपति प्रो. कर्मजीत सिंह का नाम सबसे ऊपर है। यदि उनकी नियुक्ति होती है, तो वे पीयू के इतिहास में पहले सिख पुरुष कुलपति होंगे। पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा के लिए किसी प्रभावशाली सिख चेहरे को इस पद पर बैठाना राजनीतिक रूप से लाभप्रद हो सकता है। रेस में प्रो. टंकेश्वर कुमार, प्रो. एसके तोमर और प्रो. संजय कौशिक जैसे दिग्गज भी शामिल हैं।

तीन महिला विशेषज्ञ तय करेंगी पीयू का भविष्य

इस बार कुलपति के चयन की बागडोर पूरी तरह 'नारी शक्ति' के हाथ में सौंपी गई है। चांसलर कार्यालय द्वारा गठित तीन सदस्यीय कमेटी की सभी सदस्य महिलाएं हैं, जो पीयू के इतिहास में एक अनूठी पहल है:

  1. ले. जनरल माधुरी कानिटकर (चेयरपर्सन) : कुलपति, महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, नासिक।

  2. प्रो. शशिकला वंजारी (सदस्य) : कुलपति, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेटिव, नई दिल्ली।

  3. प्रो. विभा टंडन (सदस्य) : निदेशक, सीएसआईआर-आईआईसीबी, कोलकाता।

यह कमेटी जल्द ही तीन से पांच उपयुक्त नामों का पैनल चांसलर को सौंपेगी, जिसके बाद पीयू के नए मुखिया के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी।

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