जिला पंचकूला ने सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए जन्म के समय लिंगानुपात 971 दर्ज किया है, जो कि हरियाणा में सर्वाधिक है। यह जानकारी शुक्रवार को सिविल सर्जन पंचकूला डॉ. मुक्ता कुमार ने सिविल अस्पताल स्थित अपने कार्यालय में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह उल्लेखनीय उपलब्धि लिंग-आधारित भेदभावपूर्ण प्रथाओं पर अंकुश लगाने तथा लिंग चयन और मातृ स्वास्थ्य से संबंधित कानूनी प्रावधानों के कठोर अनुपालन व जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए सतत एवं बहु-आयामी प्रयासों से प्राप्त हुई है।
डॉ. मुक्ता कुमार ने बताया कि नैदानिक सेवाओं एवं चिकित्सकीय गर्भपात सेवाओं के दुरुपयोग को रोकने तथा सुदृढ़ निगरानी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, जिले में 27 फरवरी 2025 से अल्ट्रासाउंड जांच से पूर्व सभी एएनसी मामलों में आरसीएच आईडी की अनिवार्य लिंकिंग लागू की गई। इससे सभी गर्भावस्थाओं की पूर्ण ट्रेसेबिलिटी एवं जवाबदेही सुनिश्चित हुई है। वर्ष 2025 के दौरान जिले में 157 पीसी-पीएनडीटी केंद्रों तथा 55 एमटीपी केंद्रों का निरीक्षण किया गया और कुल 9 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, जिसमें 4 पीसी-पीएनडीटी अधिनियम तथा 5 एमटीपी अधिनियम के अंतर्गत थे। इसके अतिरिक्त, 15 बीएएमएस चिकित्सकों के निरीक्षण भी किए गए। डॉ. मुक्ता कुमार ने बताया कि जन्म के समय 971 के लिंगानुपात की यह उपलब्धि जिले के सशक्त शासन, अंतर-विभागीय समन्वय, कठोर कानून प्रवर्तन तथा सामुदायिक सहभागिता का प्रमाण है।
रिवर्स ट्रैकिंग एवं कानूनी कार्रवाई
डॉ. मुक्ता कुमार ने बताया कि 12 सप्ताह से अधिक अवधि के 75 एमटीपी मामलों की समर्पित रिवर्स ट्रैकिंग की गई, विशेषकर उन परिवारों में जहां पहले से कन्या संतान/संतानें थीं, ताकि लिंग-चयनात्मक प्रथाओं की संभावना को नकारा जा सके। इनमें से 12 मामले परिवारों द्वारा असहयोग अथवा सूचना के अभाव के कारण संदिग्ध पाए गए। दोषियों के विरुद्ध 2 एफआईआर दर्ज की गईं, जो उल्लंघनों के प्रति शून्य सहनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि 20 एमटीपी केंद्रों का पंजीकरण रद्द किया गया।

