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Panchkula MC Scam : पंचकूला नगर निगम के 150 करोड़ घाेटाले में कोटक बैंक के डिप्टी वीपी ने किया सरेंडर

भ्रष्टाचार पर शिकंजा : जाली हस्ताक्षरों से खोले फर्जी खाते, निगम की एफडी तोड़कर बिल्डरों को भेजा पैसा; विजिलेंस ने लिया हिरासत में

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प्रतीकात्मक चित्र
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Panchkula MC Scam : पंचकूला नगर निगम में हुए करीब 150 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले में बुधवार को बड़ी कार्रवाई हुई। मामले के मुख्य आरोपियों में से एक और कोटक महिंद्रा बैंक के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पुष्पेंद्र सिंह ने स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो (SV&ACB) के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। विजिलेंस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। वह इस मामले में गिरफ्तार होने वाला छठा आरोपी है।

पुष्पेंद्र सिंह पंचकूला के सेक्टर-11 स्थित कोटक महिंद्रा बैंक की शाखा में मैनेजर के पद पर तैनात थे। आरोप है कि इसी पद पर रहते हुए उन्होंने नगर निगम के करोड़ों रुपये के फंड को खुर्द-बुर्द करने में अहम भूमिका निभाई।

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फर्जी खातों से उड़ाई करोड़ों की रकम

जांच में सामने आया है कि पुष्पेंद्र सिंह ने नगर निगम के तत्कालीन सीनियर अकाउंट ऑफिसर विकास कौशिक के साथ मिलकर पूरी साजिश रची थी। एफआईआर के मुताबिक, दोनों ने मिलकर मई 2020 में नगर निगम के नाम पर बैंक में एक फर्जी खाता खोला। इस खाते को खोलने के लिए तत्कालीन निगम कमिश्नर (IAS) सुमेधा कटारिया और सीनियर अकाउंट ऑफिसर सुशील कुमार के जाली हस्ताक्षर और फर्जी मुहरों का इस्तेमाल किया गया।

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इसके बाद जून 2022 में इसी बैंक में एक और फर्जी खाता खोला गया। इस बार भी मुहरों और हस्ताक्षरों के साथ छेड़छाड़ की गई ताकि बैंक के रिकॉर्ड में यह खाता असली लगे।

एफडी तोड़कर बिल्डरों को भेजा पैसा

विजिलेंस ने कोर्ट को बताया कि विकास कौशिक और पुष्पेंद्र सिंह ने मिलकर नगर निगम की असली एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) को समय से पहले ही तुड़वा दिया। इसके बाद जाली डेबिट नोट्स (RTGS/NEFT) तैयार किए गए और सारा पैसा उन फर्जी खातों में ट्रांसफर कर दिया गया जो उन्होंने निगम के नाम पर ही खोले थे।

जांच में निम्नलिखित खुलासे हुए हैं:

  • नगर निगम की 145.03 करोड़ रुपये की 16 एफडी सेक्टर-11 की शाखा में जमा थीं।
  • पुष्पेंद्र सिंह ने जाली दस्तावेजों के जरिए पैसा अपने व्यक्तिगत खातों और कुछ अन्य लोगों के खातों में भेजा।
  • अंत में यह पैसा अलग-अलग बिल्डरों के खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।

कैसे खुला घोटाले का राज?

यह मामला तब प्रकाश में आया जब नगर निगम की 59.58 करोड़ रुपये की 11 एफडी मैच्योर हुईं। जब निगम के अधिकारी पैसा लेने बैंक पहुंचे, तो बैंक द्वारा दिए गए स्टेटमेंट और निगम के पास मौजूद रिकॉर्ड में भारी अंतर पाया गया। इसके बाद जब गहन जांच हुई, तो 150 करोड़ रुपये की हेराफेरी का यह बड़ा सच सामने आया। फिलहाल विजिलेंस की टीम आरोपी पुष्पेंद्र सिंह से रिमांड के दौरान आगे की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।

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