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पीजीआई चंडीगढ़ में 2000 से अधिक पद खाली

लोकसभा में खुलासा: मरीज सेवाओं, उपचार व्यव्था और शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ रहा असर

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देश के शीर्ष सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शामिल पीजीआई चंडीगढ़ में 2000 से अधिक पद रिक्त होने का मामला अब संसद तक पहुंच गया है। लोकसभा में सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों ने संस्थान में मानव संसाधन की गंभीर कमी को उजागर किया है, जिससे मरीज सेवाओं, उपचार व्यवस्था और शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ रहे असर को लेकर व्यापक चिंता सामने आई है। लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार संस्थान में 732 स्वीकृत फैकल्टी पदों में से 131 पद रिक्त हैं। इसी प्रकार 8265 नॉन फैकल्टी पदों में से 1874 पद खाली चल रहे हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर 2000 से अधिक पदों पर नियुक्ति नहीं हो पाई है।

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मरीजों की बढ़ती संख्या, स्टाफ पर बोझ

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पीजीआई की ओपीडी में प्रतिदिन लगभग 10000 से अधिक मरीज पहुंचते हैं। ऐसे में सीमित स्टाफ के सहारे सेवाएं संचालित होना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। अस्पताल सहायकों के 519 स्वीकृत पदों में से 191 भरे हुए हैं, जबकि 328 पद रिक्त हैं। नर्सिंग स्टाफ को तय मानकों से अधिक मरीजों की देखभाल करनी पड़ रही है। तकनीकी और प्रशासनिक श्रेणियों में भी कई पद खाली हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फैकल्टी पदों की कमी से शिक्षण और शोध कार्य प्रभावित हो रहे हैं, जबकि नर्सिंग तथा सहयोगी स्टाफ की कमी का सीधा असर मरीजों की देखभाल और उपचार की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।

पदों को भरने की प्रक्रिया जारी

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोकसभा में आश्वस्त किया कि रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है और चरणबद्ध तरीके से नियुक्तियां की जा रही हैं। हालांकि बढ़ती मरीज संख्या और संस्थान पर राष्ट्रीय स्तर के दबाव को देखते हुए त्वरित और व्यापक भर्ती की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

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