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"हमारा बेटा तो चला गया, पर उसकी धड़कनें अब किसी और के सीने में गूंजेंगी...", दविंदर ने जाते-जाते 6 लोगों को दिया जीवनदान

रूपनगर के 36 वर्षीय दविंदर ने 6 लोगों को दिया जीवनदान; कलेजे पर पत्थर रख पिता ने पेश की मानवता की मिसाल

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Chandigarh News : कहते हैं कि इंसान दुनिया से चला जाता है, लेकिन उसके नेक कर्म उसे अमर कर देते हैं। पंजाब के रूपनगर जिले के गांव सोल्खियां निवासी 36 वर्षीय दविंदर सिंह आज शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी धड़कनें किसी और के सीने में धड़क रही हैं और उनकी आंखों से अब कोई और इस दुनिया के रंग देख रहा है। एक सड़क हादसे ने परिवार की खुशियां उजाड़ दीं, लेकिन कलेजे पर पत्थर रखकर लिए गए एक साहसी फैसले ने 'जिंदगी की जंग लड़ रहे' छह लोगों के बुझते चिराग फिर से रोशन कर दिए।

हादसे ने छीनी जान, हौसले ने दिया जीवनदान

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पेशे से इलेक्ट्रिशियन दविंदर सिंह 21 फरवरी को एक सड़क दुर्घटना का शिकार हुए थे। पीजीआई के डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। 25 फरवरी को उन्हें 'ब्रेन डेड' घोषित कर दिया गया। जब जवान बेटा दुनिया छोड़ जाए, तो परिवार पर क्या गुजरती है, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। पर इस असहनीय दुख के बीच दविंदर के पिता अमर सिंह और पत्नी गुरप्रीत कौर ने मानवता की वह मिसाल पेश की, जिसे देख हर आंख नम हो गई। उन्होंने दविंदर के अंग दान करने का निर्णय लिया।

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Donor Davinder Singh’s son offers a floral tribute to his late father during the body handover ceremony at PGIMER.
Donor Davinder Singh’s son offers a floral tribute to his late father during the body handover ceremony at PGIMER.

"सांसें अब दूसरों में चलती रहेंगी, यही हमारी तसल्ली है"

कांपती आवाज और नम आंखों से पिता अमर सिंह ने कहा, "एक पिता के लिए अपने जवान बेटे की अर्थी उठाना दुनिया का सबसे भारी बोझ है। हम अपने बच्चे को तो नहीं बचा सके, लेकिन अब उसकी धड़कनें किसी और के सीने में धड़केंगी। बस इसी तसल्ली के सहारे हम अपनी बाकी जिंदगी काट लेंगे।" पत्नी गुरप्रीत ने रुंधे गले से कहा कि दविंदर हमेशा दूसरों की मदद करते थे, और जाते-जाते भी उन्होंने छह परिवारों को नया जीवन दे दिया।

हवाई मार्ग से समय पर पहुंचाए गए अंग

दविंदर के अंगों को सुरक्षित रखने और जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए पीजीआई प्रशासन ने पल-पल की जंग लड़ी:

लीवर और फेफड़े: दविंदर का लीवर दिल्ली और फेफड़े गुरुग्राम भेजे गए। इन्हें समय पर पहुंचाने के लिए हवाई जहाजों की मदद ली गई ताकि जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे मरीजों की सांसें थामी जा सकें।

पीजीआई में सफल प्रत्यारोपण: पीजीआई के डॉक्टरों ने दविंदर की किडनी और पैंक्रियाज को दो गंभीर मरीजों में ट्रांसप्लांट किया। इसके अलावा, उनकी आंखों (कॉर्निया) से दो नेत्रहीन व्यक्तियों की दुनिया फिर से रोशन हो गई।

Donor Davinder Singh’s son offers a floral tribute to his late father during the body handover ceremony at PGIMER.
Donor Davinder Singh’s son offers a floral tribute to his late father during the body handover ceremony at PGIMER.

निदेशक ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने परिवार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा, "दविंदर के परिवार ने अपनी निजी त्रासदी को दूसरों के लिए 'जीवन के उपहार' में बदल दिया। यह साहस वंदनीय है।" मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. विपिन कौशल ने बताया कि दविंदर के इस महादान से छह घरों में फिर से खुशियां लौट आई हैं।

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