Mother's Day : मां की एक सीख ने बदल दी जिंदगी, 5वीं कक्षा के बच्चे को बना दिया आई सर्जन
पीजीआई के पूर्व डॉ. अशोक गुप्ता ने मदर्स डे पर साझा की अपनी सफलता की कहानी। बताया कैसे मां की प्रेरणा और मार्गदर्शन ने उन्हें चिकित्सा क्षेत्र में मुकाम हासिल करने का रास्ता दिखाया।
Mother's Day : दुनिया में मां ही वह पहली गुरु है, जो अपने बच्चे के भविष्य की मजबूत नींव रखती है। मां के शब्दों में वह ताकत होती है, जो किसी भी सपने को हकीकत में बदल सकती है। इस बात की सबसे खूबसूरत मिसाल हैं पीजीआई चंडीगढ़ के पूर्व आई सर्जन और दृष्टि आई अस्पताल के चेयरमैन डॉ. अशोक गुप्ता। मदर्स डे के मौके पर जब वह अपने 37 साल से अधिक के चिकित्सा करियर पर नजर डालते हैं, तो उन्हें अपना बचपन याद आता है। यह उनकी मां की ही प्रेरणा थी, जिसने पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले एक छोटे से बच्चे को आज चिकित्सा जगत के शिखर पर पहुंचा दिया है।
डॉ. अशोक गुप्ता पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताते हैं कि जब वह पांचवीं कक्षा में थे, तो उनकी मां हमेशा एक ही बात कहती थीं कि 'उन्हें खूब पढ़ना है और डॉक्टर बनना है'। मां की यह नसीहत उनके बाल मन पर ऐसी छपी कि यही उनके जीवन का इकलौता लक्ष्य बन गया। अपनी मां की प्रेरणा और उनके भावनात्मक सहयोग की बदौलत ही उन्होंने साल 1978 में सरकारी मेडिकल कॉलेज पटियाला में दाखिला लिया। डॉ. गुप्ता का कहना है कि आज वह जो कुछ भी हैं, सिर्फ और सिर्फ अपनी मां की बदौलत हैं। इस मदर्स डे पर उन्होंने अपनी मां के लंबे, स्वस्थ और खुशहाल जीवन की कामना की।
अपनी मां माया देवी जी के देखे सपने को पूरी शिद्दत से साकार करते हुए डॉ. गुप्ता ने साल 1982 में पंजाबी विश्वविद्यालय से एमबीबीएस की। इसके बाद उन्होंने 1987 में देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान पीजीआई चंडीगढ़ से एमएस (नेत्र रोग विशेषज्ञ) की डिग्री हासिल की। उन्होंने पीजीआई एडवांस आई सेंटर के 'आई रिसर्च फाउंडेशन' में कार्यकारी सदस्य के रूप में भी काम किया। विशेषज्ञता को और निखारते हुए वह फैको और लेसिक सर्जरी के विशेषज्ञ बने। इसी समर्पण के साथ साल 1995 में उन्होंने दृष्टि आई अस्पताल की नींव रखी, जो आज हरियाणा और ट्राईसिटी के प्रमुख नेत्र देखभाल केंद्रों में शुमार है।
चिकित्सा क्षेत्र में डॉ. गुप्ता ने हमेशा गुणवत्ता और मरीजों के साथ पारदर्शिता को प्राथमिकता दी है। डॉ. गुप्ता भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए एनक्यूएएस (NQAS) असेसर के रूप में भी अहम भूमिका निभा चुके हैं। वर्तमान में वह पंचकूला एकेडमी ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी के अध्यक्ष और एएचपीआई (AHPI) हरियाणा के उपाध्यक्ष के तौर पर स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं।

