दर्द से जन्मी सेवा: सिख मां-बेटी की अनोखी श्रद्धांजलि, कैंसर मरीजों के लिए दान किए 'केश'
Inspiring Story: सिख धर्म में केश के महत्व के बावजूद पिता की याद में उठाया प्रेरणादायी कदम
Inspiring Story: कनाडा हेल्पस (CanadaHelps) ने हाल ही में कनाडा में रहने वाली एक सिख मां-बेटी की भावुक और प्रेरणादायक कहानी साझा की है। गगनदीप समरा (Gagandeep Samra) और उनकी 11 वर्षीय बेटी रूहबानी समरा (Ruhbani Samra) ने कैंसर मरीजों के लिए अपने बाल दान किए। यह कदम उन्होंने परिवार के एक प्रिय सदस्य गगनदीप के पिता की याद में उठाया। गगनदीप के पिता की मौत कैंसर से मृत्यु हो गई थी।
गगनदीप समरा ने बताया कि वे अपने पिता के जन्मदिन पर उनकी याद में कुछ सार्थक करना चाहते थी। उन्होंने कहा, “मेरे पिता कैंसर के कारण हमें छोड़कर चले गए। इसलिए हमने सोचा कि उनकी याद में कैंसर मरीजों के लिए बाल दान करना सबसे अच्छा श्रद्धांजलि होगा।”
11 साल की रुहबानी के लिए यह अनुभव भावुक करने वाला था। शुरू में वह इस फैसले से सहमत थी, लेकिन जब उसके बाल काटे गए तो वह भावुक हो गई। हालांकि उसकी मां ने बताया कि जब उसे इस काम के पीछे का उद्देश्य समझ आया, तो उसने इसे गर्व के साथ स्वीकार किया।
इस पहल की खास बात यह भी है कि सिख धर्म में बाल न कटवाना आस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। बिना कटे बाल यानी ‘केश’ सिख पंथ में पंच ककार (केश, कंघा, कड़ा, कछैरा और कृपाण) में से एक हैं।
पंजाब मूल का यह परिवार अब कनाडा में रहता है, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है और समय-समय पर अपने घर चंडीगढ़ के सेक्टर-11 और अपने पैतृक स्थान पर आता-जाता रहता है।
सिख पंथ में बालों के धार्मिक महत्व को देखते हुए मां-बेटी का यह फैसला और भी प्रेरणादायक माना जा रहा है। उनकी इस कहानी को CanadaHelps द्वारा जारी एक वीडियो में भी साझा किया गया है।
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