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वैश्विक निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए विवाद समाधान का हब बने भारत : जस्टिस सूर्यकांत

सीजेआई ने चंडीगढ़ में इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर का किया उद्घाटन, कहा-आर्थिक मजबूती के लिए विश्वसनीय न्याय तंत्र जरूरी

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चंडीगढ़ में शनिवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की नवीनीकृत लाइब्रेरी के उद्घाटन अवसर पर (बाएं से दूसरे) देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, (बाएं से तीसरे) पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू, द ट्रिब्यून ट्रस्ट के ट्रस्टी जस्टिस (सेवानिवृत्त) एसएस सोढी (दाएं से तीसरे) और परमजीत सिंह पटवालिया (दाएं से चौथे)। -ट्रिब्यून फोटो
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देश के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि देश की बढ़ती आर्थिक साख के अनुरूप भारत को वाणिज्यिक विवादों के निपटारे के लिए एक भरोसेमंद वैश्विक केंद्र के रूप में खुद को स्थापित करना होगा। उन्होंने जोर दिया कि जटिल होते अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक रिश्तों के बीच एक विश्वसनीय और प्रभावी न्याय प्रणाली का होना अनिवार्य है।

जस्टिस सूर्यकांत यहां 'इंडिया इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन समिट वीक' के दौरान 'चंडीगढ़ इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर' (सीआईएसी) का उद्घाटन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी के इन 25 वर्षों में भारत की आर्थिक मौजूदगी दुनिया भर में तेजी से फैली है। आज भारतीय कंपनियां विदेशों में निवेश कर रही हैं और विदेशी निवेश भारत आ रहा है, जिससे कानूनी पेचीदगियां भी बढ़ी हैं।

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सीजेआई ने कहा कि आज की डिजिटल अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन महाद्वीपों में फैली हुई है। उन्होंने उदाहरण दिया कि चंडीगढ़ में हुआ कोई अनुबंध दुबई में निष्पादित हो सकता है, जिसकी फंडिंग सिंगापुर में हो और उसे लंदन में लागू किया जाए।" उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में निवेशकों का भरोसा तभी बना रहेगा जब उन्हें त्वरित और प्रभावी न्याय का आश्वासन मिले।

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सीजेआई ने स्पष्ट किया कि भारत को केवल सुधारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अदालतों और वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) प्रणालियों के बीच एक मजबूत ढांचा तैयार करना होगा। उन्होंने इस पहल को 'संस्थागत कल्पना' करार दिया। इस सम्मेलन में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और फ्रांस सहित कई देशों के न्यायाधीशों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं और कानून विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

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