Organ Donation Shortage : देश में अंगदान की भारी कमी, हर साल 2 लाख मरीजों को है किडनी की जरूरत, एक डोनर दे सकता है 8 लोगों को नई जिंदगी
डायरेक्टर अनिल कुमार ने कहा- ऑर्गन फेलियर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, मांग के मुकाबले डोनर्स की संख्या बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर जागरूकता जरूरी
Organ Donation Shortage : देश में ऑर्गन फेलियर (अंग खराब होने) की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसके मुकाबले अंगदान करने वालों की संख्या अभी भी काफी कम है। हर साल करीब दो लाख नए मरीज ऐसे सामने आ रहे हैं, जिन्हें किडनी ट्रांसप्लांट की सख्त जरूरत होती है, अन्यथा उन्हें डायलिसिस के सहारे रहना पड़ता है। इसके अलावा लिवर और हार्ट ट्रांसप्लांट के मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है (राष्ट्रीय स्तर पर हर साल करीब 50 से 80 हजार लिवर और 10 हजार हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है)।
राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO ) के डायरेक्टर अनिल कुमार ने 'दैनिक ट्रिब्यून' से खास बातचीत में देश में अंगदान की वर्तमान स्थिति और इसकी अहमियत पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि हाल ही में प्रधानमंत्री ने भी 'मन की बात' कार्यक्रम में अंगदान के जरिए लोगों को मिलने वाली नई जिंदगी का जिक्र कर इस नेक मुहिम की सराहना की थी।
एक डोनर से बच सकती हैं 8 जानें
नोटो डायरेक्टर अनिल कुमार ने बताया कि जब कोई मरीज अस्पताल के आईसीयू में ब्रेन डेड (मस्तिष्क मृत) घोषित हो जाता है, तो वह अंगदान के लिए सबसे उपयुक्त स्थिति होती है। एक ब्रेन डेड व्यक्ति से 8 लोगों की जान बचाई जा सकती है। इनमें दो किडनी, एक लिवर, एक हार्ट, दो फेफड़े (लंग्स), आंत (इंटेस्टाइन) और पैंक्रियाज शामिल हैं। अंगों के अलावा कॉर्निया, स्किन (त्वचा), हड्डी और हार्ट वाल्व जैसे टिश्यू (ऊतक) भी दान किए जा सकते हैं। अब एडवांस तकनीक से एक कॉर्निया को लेयर्स में बांटकर 3 लोगों को लगाया जा सकता है, यानी एक डोनर की आंखों से 6 लोगों को रोशनी मिल सकती है। इसके अलावा गंभीर रूप से झुलसे मरीजों की जान बचाने के लिए स्किन दान भी अहम है। दिल्ली और पीजीआई में स्किन बैंक भी खुल चुके हैं।
2013 के मुकाबले ट्रांसप्लांट में आया बड़ा उछाल
देश में ट्रांसप्लांट की प्रोग्रेस रिपोर्ट साझा करते हुए अनिल कुमार ने बताया कि 2013 में जहां 5 हजार से कम ट्रांसप्लांट होते थे, वहीं अब यह आंकड़ा 20 हजार के पार चला गया है। 2013 में मरणोपरांत अंगदान से केवल 837 ट्रांसप्लांट हुए थे, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा बढ़कर 3,475 हो गया। बीते साल लगभग 1200 से अधिक परिवारों ने अपने परिजनों के मृत्यु उपरांत अंगदान का साहसिक फैसला लिया। एक व्यक्ति औसतन 3 ऑर्गन डोनेट करता है।
घर बैठे लें अंगदान की शपथ, 24x7 टोल फ्री नंबर जारी
अनिल कुमार ने स्पष्ट किया कि अंगदान में कोई भी धर्म आड़े नहीं आता और न ही इससे शरीर विरूपित (डिसफिगर) होता है। सामान्य मृत्यु या हार्ट रुकने के बाद भी कॉर्निया और स्किन का दान घर से ही किया जा सकता है। इसके लिए नोट्टो के 24x7 हेल्पलाइन नंबर 1800-11-4770 पर कॉल की जा सकती है। मृत्यु के 6 से 10 घंटे के भीतर यह दान हो जाना चाहिए। जीते-जी अंगदान की शपथ लेने के लिए भारत सरकार की वेबसाइट notto.gov.in पर जाकर आधार नंबर और ओटीपी के जरिए फॉर्म भरा जा सकता है। इसके बाद ई-डोनर सर्टिफिकेट डाउनलोड हो जाता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि शपथ लेने के बाद भी मृत्यु उपरांत अंगदान तभी संभव है, जब परिवार इसके लिए अपनी सहमति दे। इसलिए अपनी इस इच्छा के बारे में परिवार को जरूर अवगत कराएं।

