नये कानूनों का असर : हरियाणा में 22 जिला अटॉर्नी बने डिप्टी डायरेक्टर
जिला स्तर पर मजबूत होगा अभियोजन तंत्र, जिला मुख्यालयों पर बनेंगे निदेशालय, सेक्शन-20 के तहत स्थापना, खाली पद भरने की दिशा में बड़ा कदम
हरियाणा में लागू हुए तीन नये आपराधिक कानूनों के बाद अभियोजन व्यवस्था में बड़े प्रशासनिक बदलाव शुरू हो गए हैं। इन्हीं बदलावों के तहत सरकार ने 22 जिला अटॉर्नी (डीए) अधिकारियों को पदोन्नत कर डिप्टी डायरेक्टर ऑफ प्रॉसिक्यूशन (डीडीपी) के पद पर नियुक्त किया है। यह पदोन्नति नये कानूनों में किए गए प्रावधानों के अनुरूप की गई है।
इसका उद्देश्य जिला स्तर पर अभियोजन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाना है। नये कानूनों के तहत सेक्शन-20 में यह स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि प्रत्येक जिले में अभियोजन निदेशालय का गठन होगा और उसका प्रमुख डिप्टी डायरेक्टर होगा। इसी कानूनी व्यवस्था को लागू करने के लिए यह पदोन्नतियां की गई हैं। गृह विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा की ओर से इसके आदेश जारी किए गए हैं।
आदेश के अनुसार ये पदोन्नतियां हरियाणा स्टेट लीगल सर्विसेज (ग्रुप-ए) संशोधित नियम, 2025 के तहत की गई हैं और सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी। पदोन्नति वरिष्ठता के आधार पर की गई है तथा सभी अधिकारी एक वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर रहेंगे।
पदोन्नत किए गए अधिकारियों में सुमन बंसल, सोहन सिंह, लेघहा दीपक रंजीत, सतीश कुमार, आनंद मान, सुनील कुमार और सत्येंद्र कुमार शामिल हैं। इसके अलावा राजेश कुमार चौधरी, धर्मेंद्र राणा, मनोज कुमार, दीपक बूरा, हरपाल सिंह, अनीता, राजेश कुमार, परवेज, सुमेर सिंह, हितेंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह, मनजीत सिंह, अश्विनी कुमार, सुरेश कुमार और पारुल चहल को भी डिप्टी डायरेक्टर पद पर पदोन्नत किया गया है।
सरकार के इस फैसले से लंबे समय से खाली पड़े डिप्टी डायरेक्टर के पदों को भरने की प्रक्रिया को गति मिली है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे ये पद भरे जाएंगे, उसी अनुपात में डिप्टी डीए और अन्य निचले पदों पर भी पदोन्नति के रास्ते खुलेंगे। इसी क्रम में आने वाले दिनों में असिस्टेंट डायरेक्टर के पदों पर भी नियुक्तियों की संभावना जताई जा रही है।
नये कानूनों से बदली संरचना
नये आपराधिक कानूनों का उद्देश्य केवल प्रक्रिया में बदलाव नहीं, बल्कि अभियोजन तंत्र को जमीनी स्तर पर मजबूत करना है। जिला स्तर पर निदेशालय बनने से मामलों की निगरानी बेहतर होगी, अभियोजन में देरी कम होगी और जवाबदेही तय करना आसान होगा। डिप्टी डायरेक्टर को जिले में अभियोजन का प्रमुख बनाए जाने से प्रशासनिक और कानूनी समन्वय भी बेहतर होने की उम्मीद है।
जल्द जारी होंगे पोस्टिंग आदेश
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी पदोन्नत अधिकारी फिलहाल अपने वर्तमान पद का कार्यभार संभालते रहेंगे। उनके पोस्टिंग आदेश बाद में जारी किए जाएंगे। तब तक वे अपने मौजूदा कार्यस्थल पर कानूनी कार्यों को देखते रहेंगे, ताकि अदालतों और कार्यालयों के कामकाज पर कोई असर न पड़े। माना जा रहा है कि आगामी सप्ताह में सभी नये डिप्टी डायरेक्टर को जिले आवंटित कर दिए जाएंगे।

