IDFC First Bank Scam : 657 करोड़ का बैंक घोटाला: 329 करोड़ का सोना, 55 करोड़ की प्रॉपर्टी... खुलासे ने उड़ाए होश
चंडीगढ़ प्रशासन के दो विभागों से कथित तौर पर फंड का गबन किया गया
IDFC First Bank Scam : सीबीआई ने धोखाधड़ी के एक ऐसे तरीके का पता लगाया है, जिसमें सरकारी फंड को निजी बैंकों में जमा करके सावन ज्वैलर्स के जरिए सोना खरीदा गया था। इसके बाद सोने को खुले बाजार में बेचकर कैश में बदल दिया गया। फिर उससे मिली रकम मुख्य साजिशकर्ता रिभव ऋषि और उनके कर्मचारियों को लौटा दी गई, ताकि उसे बाकी में बांटा जा सके।
657 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के कुछ पर हरियाणा के एक आईएएस समेत अन्य सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर सरकारी फंड के कथित गबन का आरोप है। 'द ट्रिब्यून' को मिले सीबीआई दस्तावेजों के अनुसार, हरियाणा सरकार के आठ विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के दो विभागों से कथित तौर पर फंड का गबन किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि चंडीगढ़ के सेक्टर-35 स्थित सावन ज्वैलर्स के संचालक राजन सिंह कटोडिया को रिभव ऋषि द्वारा बनाई गई कथित शेल (फर्जी) कंपनियों के माध्यम से सरकारी धन पहुंचाया गया।
इन कथित शेल कंपनियों में स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, कैपको फिनटेक सर्विसेज़, आरएस ट्रेडर्स, एसआरआर प्लानिंग गुरुज, विस्टामेड सॉल्यूशंस और मां वैभव लक्ष्मी इंटीरियर शामिल हैं। रिभव ऋषि चंडीगढ़ के सेक्टर 32 स्थित IDFC फर्स्ट बैंक के ब्रांच मैनेजर थे। उन्होंने ही इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में जाने के बाद भी इसे जारी रखा।
सावन ज्वैलर्स के चार्टर्ड अकाउंटेंट के अनुसार, 6 नवंबर 2024 और 18 फरवरी 2026 के बीच मुख्य रूप से शेल कंपनियों से 329.57 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इसमें कैपको फिनटेक से 138 करोड़ रुपये, स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स से 131 करोड़ रुपये और आरएस ट्रेडर्स से 45 करोड़ रुपये शामिल हैं। प्लान के मुताबिक, कटोडिया अपने सप्लायर्स से सोना खरीदता था और फिर ट्रांजेक्शन पूरा करने के लिए शेल कंपनियों के नाम पर इनवॉइस जारी करता था।
हालांकि कटोडिया ने शेल कंपनियों को सोना नहीं दिया। उसने उसे खुले बाजार में बेच दिया, कैश इकट्ठा किया और उसे रिभव ऋषि व उनके कर्मचारियों को सौंप दिया। रिभव ऋषि के कर्मचारियों जैसे राहुल, मनीष और अमृतपाल ने CBI के सामने बयान दिया कि वे चंडीगढ़ के सेक्टर 35 में सावन ज्वैलर्स के दफ्तर से बड़ी मात्रा में कैश इकट्ठा करते थे। ये कर्मचारी कैश लाने-ले जाने का काम करते थे।

