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सूरजकुंड हादसे पर मानवाधिकार आयोग का कड़ा रुख, झूला दुर्घटना के बाद सुरक्षा मानकों पर ‘जीरो टॉलरेंस’, चार हफ्तों में मांगी विस्तृत रिपोर्ट

हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला 2026 में 7 फरवरी को हुए झूला हादसे पर सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले को गंभीर प्रशासनिक चूक से जुड़ा बताया और...

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हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला 2026 में 7 फरवरी को हुए झूला हादसे पर सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले को गंभीर प्रशासनिक चूक से जुड़ा बताया और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

हादसे में 13 लोग घायल हुए थे, जबकि बचाव कार्य के दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिस निरीक्षक जगदीश प्रसाद की मौत हो गई। घटना के बाद मेले में अफरा-तफरी मच गई थी। घायलों को फरीदाबाद के सुप्रीम हॉस्पिटल और बीके सिविल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। फरीदाबाद के उपायुक्त को चार सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट देने और पुलिस महानिदेशक से निरीक्षक जगदीश प्रसाद के आश्रितों को मुआवजे संबंधी जानकारी प्रस्तुत करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

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आयोग ने देखीं मौके पर खामियां

आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा, सदस्य कुलदीप जैन और दीप भाटिया उस दिन जागरूकता शिविर के सिलसिले में मेले में ही थे। आयोग ने मौके पर अस्थायी ढांचों की कमजोर स्थापना और तकनीकी लापरवाही की ओर संकेत किया। फूड कोर्ट के पास तेज हवा से एक अस्थायी प्रवेश द्वार गिरने और गेट नंबर-2 के निकट ढांचे के झुकने की घटनाओं को भी गंभीर माना गया।

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तकनीकी जांच और प्रमाणन पर सवाल

आयोग ने कहा कि ऐसा कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है कि आयोजन से पहले सक्षम तकनीकी समिति द्वारा संरचनात्मक और विद्युत सुरक्षा की समग्र जांच की गई हो। संरचनात्मक स्थिरता, वायु वेग आकलन, भार क्षमता और विद्युत सुरक्षा मानकों की अनदेखी को गंभीर चूक बताया गया है।

आपदा प्रबंधन भी सवालों के घेरे में

साथ ही आपदा प्रबंधन व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए गए हैं। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि भविष्य में बहु-विषयक तकनीकी समिति के प्रमाणन के बिना कोई आयोजन शुरू न हो। सभी झूलों और अस्थायी ढांचों का तृतीय-पक्ष सुरक्षा ऑडिट कराया जाए तथा पर्याप्त एंबुलेंस, अग्निशमन और बचाव दल तैनात किए जाएं।

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