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लाहौर से चंडीगढ़ तक की स्मृतियों का सम्मान, पीयू ने 104 वर्षीय पूर्व विधायक साही राम बिश्नोई को दिया ‘साइटेशन ऑफ ऑनर’

पंजाब विश्वविद्यालय ने अपने सबसे वरिष्ठ जीवित पूर्व छात्र और अविभाजित पंजाब के सबसे उम्रदराज विधायक 104 वर्षीय साही राम बिश्नोई को ‘साइटेशन ऑफ ऑनर’ प्रदान कर सम्मानित किया। यह सम्मान उनके दीर्घ सार्वजनिक जीवन, सामाजिक योगदान और विश्वविद्यालय से...

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पंजाब विश्वविद्यालय ने अपने सबसे वरिष्ठ जीवित पूर्व छात्र और अविभाजित पंजाब के सबसे उम्रदराज विधायक 104 वर्षीय साही राम बिश्नोई को ‘साइटेशन ऑफ ऑनर’ प्रदान कर सम्मानित किया। यह सम्मान उनके दीर्घ सार्वजनिक जीवन, सामाजिक योगदान और विश्वविद्यालय से दशकों पुराने जुड़ाव के लिए उनके निवास स्थान सक्ता खेड़ा गांव, डबवाली के निकट, प्रदान किया गया। यह अवसर विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक विरासत और मूल्यों को सहेजने वाला रहा।

विश्वविद्यालय का प्रतिनिधिमंडल कुलसचिव प्रो. वाईपी वर्मा और डीन, एलुमनाई रिलेशंस प्रो. लतिका शर्मा के नेतृत्व में बिश्नोई के निवास पर पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में प्रो. दिनेश बिश्नोई, डॉ. अर्चना चौहान और डॉ. जयदेव बिश्नोई भी शामिल रहे। यह सम्मान उस जीवन यात्रा को समर्पित रहा, जिसने विश्वविद्यालय के लाहौर काल से लेकर चंडीगढ़ तक के परिवर्तनशील दौर को प्रत्यक्ष रूप से देखा।

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इस अवसर पर कुलपति प्रो. रेणु विग ने वीडियो कॉल के माध्यम से बिश्नोई से संवाद किया। उन्होंने कहा कि साही राम बिश्नोई को सम्मानित करना विश्वविद्यालय की उस परंपरा को स्मरण करना है, जिसमें सेवा, ज्ञान और मानवीय मूल्यों को पूर्व छात्रों ने पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया है।

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संघर्ष, सेवा और जनजीवन को समर्पित जीवन

बिश्नोई ने विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह ईश्वर की कृपा है कि वे इस आयु में भी ऐसा सम्मान प्राप्त कर सके। उन्होंने विश्वविद्यालय से अपने लंबे जुड़ाव को जीवन की अमूल्य पूंजी बताया। कुलसचिव प्रो. वाई. पी. वर्मा ने कहा कि बिश्नोई का जीवन संघर्ष, नैतिकता और सेवा भावना का प्रतीक है। अत्यंत वृद्धावस्था में भी उनकी बौद्धिक सजगता, सादगी और शिक्षा में आस्था युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। डीन प्रो. लतिका शर्मा ने कहा कि उनका सरल जीवन, निस्वार्थ सेवा और सामाजिक चेतना नई पीढ़ी को साथ जीने और एक दूसरे के लिए जीने की प्रेरणा देती है।

जनवरी 1922 में जन्मे साही राम बिश्नोई ने अविभाजित पंजाब विश्वविद्यालय, लाहौर से विधि की शिक्षा प्राप्त की। विभाजन के बाद उन्होंने ईस्ट पंजाब यूनिवर्सिटी, सोलन से पढ़ाई पूरी की, जो आगे चलकर पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ बना। विभाजन के दौरान उनका परिवार बहावलपुर से विस्थापित होकर सक्ता खेड़ा गांव में आकर बसा। जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता उन्हें 1957 में विधायक बनने तक ले गई। आज वे अविभाजित पंजाब के सबसे वरिष्ठ जीवित विधायक हैं। पंजाब विश्वविद्यालय उन्हें शीघ्र ही पंजाब विश्वविद्यालय एलुमनाई एसोसिएशन की मानद सदस्यता भी प्रदान करेगा।

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