Carmel Convent School incident : पेड़ गिरने के हादसे में HC की सख्ती का असर, प्रशासन ने पीड़ित परिवारों को सौंपे 1.2 करोड़ रुपए
अवमानना याचिका का निपटारा, 1.5 करोड़ रुपये का कुल मुआवजा पूरा; घायल छात्रा के इलाज के लिए आगे भी अदालत जाने की छूट
Carmel Convent School incident : चंडीगढ़ के कार्मेल कॉन्वेंट स्कूल में पेड़ गिरने के दुखद हादसे के करीब सात महीने बाद प्रशासन ने पीड़ित परिवारों को मुआवजे के तौर पर 1.2 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद प्रशासन ने मृतक छात्रा के पिता को 80 लाख रुपये और अपना हाथ गंवाने वाली घायल छात्रा के लिए 40 लाख रुपये के ड्राफ्ट उनके वकील रामदीप प्रताप सिंह को सौंप दिए हैं। यूटी प्रशासन द्वारा पहले ही 30 लाख रुपये दिए जा चुके थे, जिसके साथ ही अदालत के आदेशानुसार 1.5 करोड़ रुपये के मुआवजे का भुगतान पूरा हो गया है।
हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका का किया निपटारा
इस मामले में जस्टिस विकास बहल की बेंच ने मुआवजे की राशि के ड्राफ्ट सौंपे जाने का संज्ञान लेते हुए प्रशासन के खिलाफ दायर अवमानना याचिका का निपटारा कर दिया। सुनवाई के दौरान प्रशासन के वकील ने अदालत को बताया कि 30 लाख रुपये पहले ही दिए जा चुके थे और अब बाकी राशि देकर कुल 1.5 करोड़ का भुगतान कर दिया गया है। हालांकि, यह भुगतान प्रशासन द्वारा दायर की गई अपील के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा। वहीं, पीड़ित पक्ष के वकील रामदीप प्रताप सिंह ने तर्क दिया कि सिंगल जज का 1.5 करोड़ रुपये का आदेश पहले दी गई 30 लाख की राशि से "अलग और उसके अतिरिक्त" था, इसलिए पूरा भुगतान अभी नहीं हुआ है। फिर भी उन्होंने वर्तमान याचिका के निपटारे पर सहमति जताई और भविष्य में बकाया राशि के लिए खंडपीठ के समक्ष जाने की छूट मांगी।
घायल छात्रा के इलाज के लिए अदालत जाने की छूट
अदालत ने अपने आदेश में यह भी दर्ज किया कि हादसे में अपना एक हाथ गंवाने वाली पीड़ित छात्रा (जो अब बालिग हो चुकी है) हाथ के ट्रांसप्लांट की संभावनाएं तलाश रही है। ऐसे में याचिकाकर्ता भविष्य में प्रशासन से इसके चिकित्सा खर्च उठाने की मांग कर सकते हैं। इसके लिए हाईकोर्ट ने उन्हें अवमानना याचिका को फिर से जीवित करने या नई याचिका दायर करने की छूट प्रदान की है। गौरतलब है कि पिछले महीने ही जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया था कि मुआवजे का भुगतान सिंगल जज के आदेश के अनुरूप होगा, लेकिन यह अपील के नतीजे के अधीन रहेगा।
'एक्ट ऑफ गॉड' की दलील हुई थी खारिज
बता दें कि 29 सितंबर 2025 को हाईकोर्ट ने इस हादसे को लेकर अहम फैसला सुनाया था। अदालत ने चंडीगढ़ प्रशासन की उस दलील को सिरे से खारिज कर दिया था जिसमें घटना को 'एक्ट ऑफ गॉड' (प्राकृतिक आपदा) बताया गया था। जस्टिस कुलदीप तिवारी ने प्रशासन को लापरवाही का जिम्मेदार ठहराते हुए उसकी कड़ी आलोचना की थी।
उन्होंने अपने आदेश में कहा था, "प्रशासन का यह रवैया उनकी संवेदनशीलता और सहानुभूति की कमी को दर्शाता है।" कोर्ट ने इंजीनियरिंग विभाग की लापरवाही को उजागर करते हुए स्पष्ट किया था कि इस हादसे ने घायल छात्रा के करियर और भविष्य की संभावनाओं को सीमित कर दिया है, जबकि मृतका के माता-पिता के दर्द की गहराई को मापा नहीं जा सकता और कोई भी राशि इस नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती।
