Lambardar Appointment : कम पढ़ा-लिखा या उम्रदराज होना नंबरदार को हटाने का आधार नहीं, पर नियमों में बदलाव की जरूरत: हाईकोर्ट
अदालत ने पंजाब सरकार से नंबरदार पद के लिए कम से कम 'मैट्रिक' शैक्षणिक योग्यता तय करने पर विचार करने को कहा; पटियाला के 7वीं पास नंबरदार की नियुक्ति को रखा बरकरार।
Lambardar Appointment : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पटियाला जिले के एक गांव में पिछले 10 वर्षों से कार्यरत 7वीं पास नंबरदार (गांव के मुखिया) की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस हर्ष बुंगर की पीठ ने स्पष्ट किया कि पंजाब भूमि राजस्व नियमों के तहत नंबरदार के लिए कोई न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय नहीं है, इसलिए केवल कम पढ़े-लिखे होने के आधार पर किसी को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने बदलते दौर में नंबरदार की जिम्मेदारियों को देखते हुए पंजाब सरकार से नियमों में संशोधन कर न्यूनतम योग्यता 'मैट्रिक' (10वीं) तय करने पर विचार करने का अनुरोध किया है।
योग्यता और उम्र की तुलना पर कोर्ट का रुख
याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि वह 12वीं पास है और वर्तमान नंबरदार से अधिक युवा व शिक्षित है, इसलिए वह इस पद के लिए बेहतर विकल्प है। इस पर जस्टिस हर्ष बुंगर ने कहा कि जब नियमों में कोई न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित ही नहीं है, तो केवल कम शैक्षणिक योग्यता के आधार पर चुने गए उम्मीदवार को अयोग्य नहीं माना जा सकता।
न्यायालय ने उम्र के तर्क को भी खारिज करते हुए कहा कि आयु का महत्व केवल व्यक्ति की शारीरिक क्षमता और कर्तव्यों के निर्वहन के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया गया है जिससे यह साबित हो कि वर्तमान नंबरदार अपनी उम्र के कारण काम करने में असमर्थ हैं। इसके अलावा, पिछले 10 वर्षों से उनकी कार्यकुशलता को लेकर कोई शिकायत भी दर्ज नहीं है।
पड़ोसी राज्य हरियाणा का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ने टिप्पणी की कि नंबरदार के कर्तव्यों को देखते हुए यह बेहद जरूरी है कि उस व्यक्ति को पंजाबी, हिंदी और अंग्रेजी भाषा की बुनियादी समझ हो। उन्होंने पड़ोसी राज्य हरियाणा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां नंबरदार के पद के लिए न्यूनतम योग्यता 'मिडिल पास' (8वीं) तय है, जबकि पंजाब में ऐसा कोई नियम नहीं है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा " यह अदालत इस विचार पर है कि एक नंबरदार द्वारा निभाए जाने वाले कर्तव्यों की प्रकृति को देखते हुए यह वांछनीय होगा कि ऐसे व्यक्ति के पास कम से कम मैट्रिक स्तर की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता हो।"
अदालत ने इस आदेश की प्रति राज्य के वकील को भेजने का निर्देश दिया है ताकि इसे संबंधित उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जा सके और पंजाब सरकार इस पद के लिए नियम पुस्तिका में बदलाव करने पर गंभीरता से विचार कर सके।
