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Grant in Aid Crisis: दो साल से सरकारी अनुदान अटका, 500 से अधिक अनाथ बच्चों की देखभाल प्रभावित

Grant in Aid Crisis: संचालकों ने सीएम को पत्र लिखकर सरकार से लगाई गुहार

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सांकेतिक चित्र।
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Grant in Aid Crisis: हरियाणा में अनाथ और जरूरतमंद बच्चों की देखभाल करने वाले गैर-सरकारी बाल देखभाल संस्थान गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। राज्य के 21 संस्थान, जो जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत पंजीकृत हैं, करीब 500 से अधिक बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा और पुनर्वास का जिम्मा संभाल रहे हैं। पिछले दो वित्तीय वर्षों (2024-25 और 2025-26) से सरकारी ग्रांट-इन-एड जारी न होने के कारण इन संस्थानों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।

संस्थानों के संचालकों के अनुसार, हालात इतने खराब हो चुके हैं कि रोजमर्रा के खर्चों के लिए उधार लेना पड़ रहा है। कई जगहों पर बच्चों की बुनियादी सुविधाओं में कटौती करनी पड़ रही है। भोजन, स्कूल फीस, किताबें, यूनिफॉर्म और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी आवश्यक जरूरतें प्रभावित हो रही हैं।

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इस मुद्दे को लेकर कनफेडरेशन ऑफ नॉन गवर्नमेंटल चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशंस (सीएनजीसीआई) ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखकर जल्द समाधान की मांग की है। संगठन के महासचिव पीआर नाथ का कहना है कि विभागीय अधिकारियों से कई बार मुलाकात और आश्वासन के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

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वहीं, महिला एवं बाल विकास विभाग हरियाणा का कहना है कि केंद्र से फंड मिलने के बाद ही अनुदान जारी किया जा सकेगा। हालांकि, संचालकों का तर्क है कि नया वित्तीय वर्ष शुरू होने के बावजूद पिछले साल की राशि लंबित है, जिससे संकट और गहरा गया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द अनुदान जारी नहीं हुआ तो बच्चों के पोषण, शिक्षा और मानसिक विकास पर गंभीर असर पड़ सकता है।

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